War Against Drugs: पंजाब में नशा तस्करों का होगा 'डायनासोर' जैसा अंत, मान सरकार ने लॉन्च किया खास ऐप और 'पिंड दे पहरेदार' मुहिम
मुख्यमंत्री भगवंत मान और अरविंद केजरीवाल ने पंजाब को नशा मुक्त करने के लिए 'युद्ध नशे के विरुद्ध' के दूसरे चरण का शंखनाद किया है। अब 1.5 लाख 'पिंड दे पहरेदार' गांवों में निगरानी करेंगे और एक विशेष मोबाइल ऐप के जरिए सीधे CM और DGP को गुप्त रिपोर्ट भेजेंगे। जानें कैसे काम करेगा यह नया सिस्टम।
News Tv India हिंदी Official | Verified Expert • 27 Mar, 2026Editor
Jan 7, 2026 • 4:08 PM
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War Against Drugs: पंजाब में नशा तस्करों का होगा 'डायनासोर' जैसा अंत, मान सरकार ने लॉन्च किया खास ऐप और 'पिंड दे पहरेदार' मुहिम
मुख्यमंत्री भगवंत मान और अरविंद केजरीवाल ने पंजाब को नशा मुक्त करने के लिए 'युद्ध नशे के विरुद्ध' के दूसरे चरण का शंखनाद किया है। अब 1.5 लाख 'पिंड दे पहरेदार' गांवों में निगरानी करेंगे और एक विशेष मोबाइल ऐप के जरिए सीधे CM और DGP को गुप्त रिपोर्ट भेजेंगे। जानें कैसे काम करेगा यह नया सिस्टम।
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War Against Drugs: पंजाब में नशा तस्करों का होगा 'डायनासोर' जैसा अंत, मान सरकार ने लॉन्च किया खास ऐप और 'पिंड दे पहरेदार' मुहिम
नशे के विरुद्ध पंजाब के निर्णायक अभियान के एक नए और अधिक आक्रामक चरण में प्रवेश करने के साथ, आम आदमी पार्टी (आप) की सरकार ने बुधवार को औपचारिक रूप से ‘युद्ध नशे के विरुद्ध’ के दूसरे चरण की शुरुआत की। इस बार मुख्य ध्यान बड़े स्तर पर कानूनी कार्रवाई से हटकर सामुदायिक निगरानी और जीरो टॉलरेंस पर केंद्रित किया गया है। पहले चरण के परिणामों को आगे बढ़ाते हुए, जिसमें 30,000 से अधिक नशे के मामले दर्ज किए गए, 43,000 से अधिक गिरफ्तारियां हुईं और सजा की दर लगभग 87-88 प्रतिशत रही, अब नए अभियान का उद्देश्य गांवों और मोहल्लों को इस लड़ाई के केंद्र में रखकर नशा तस्करों पर शिकंजा कसना है।
लगभग 1.5 लाख वॉलंटियर्स की बढ़ती फौज ‘पिंड दे पहरेदार’ की शुरुआत और सीधी एवं गुप्त रिपोर्टिंग के लिए एक समर्पित मोबाइल एप्लिकेशन इस अभियान के अगले स्तर का संकेत है। यह स्पष्ट करता है कि पंजाब की नशे के विरुद्ध जंग अब एक जन आंदोलन बन चुकी है, जहाँ नागरिक अब मूक दर्शक नहीं बल्कि खुद नेतृत्व कर रहे हैं।
एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए ‘आप’ पंजाब के मीडिया प्रभारी बलतेज पन्नू ने कहा कि भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार द्वारा शुरू किया गया नशा विरोधी अभियान केवल सरकारी पहल नहीं है, बल्कि पंजाब के माथे से नशे का कलंक स्थायी रूप से मिटाने के लिए एक जन आंदोलन है। उन्होंने कहा कि यह अभियान औपचारिक रूप से 1 मार्च 2025 को हर स्तर पर और बिना किसी समझौते के नशे के खिलाफ जंग लड़ने के दृढ़ संकल्प के साथ शुरू किया गया था। ‘आप’ पंजाब के मीडिया प्रभारी ने बताया कि नशे के खिलाफ लड़ाई 1 मार्च 2025 को शुरू की गई थी। पंजाब को पहले पांच ज़ोन में बांटा गया, उसके बाद ज़ोन प्रमुखों की नियुक्ति, जिला स्तरीय टीमें, वार्ड स्तरीय पहुँच और अंत में ‘नशा मुक्ति मोर्चा’ के सक्रिय सहयोग से घर-घर और गांव स्तर तक लामबंदी की गई। हमने हर गांव, हर वार्ड और हर मोहल्ले तक पहुँच बनाई है।
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अभियान के ठोस आंकड़े साझा करते हुए बलतेज पन्नू ने बताया कि 1 मार्च से 5 जनवरी के बीच पंजाब पुलिस ने नशे से संबंधित 30,104 मामले दर्ज किए और 43,437 आरोपियों को गिरफ्तार किया। उन्होंने बताया कि इस दौरान पुलिस ने 1,886 किलो हेरोइन, 0.266 किलो स्मैक, 603 किलो अफीम और 27,374 किलो चूरा पोस्त बरामद किया है। उन्होंने कहा कि ये कोई खोखले दावे नहीं बल्कि योजनाबद्ध कार्रवाई के ठोस परिणाम हैं।
अभियान के प्रभाव पर रोशनी डालते हुए बलतेज पन्नू ने कहा कि नशे से संबंधित मामलों में पंजाब में सजा की दर अब लगभग 87-88 प्रतिशत तक पहुँच गई है, जो राज्य में अब तक की सबसे अधिक है। उन्होंने कहा कि पहले ऐसी सजा दर की कल्पना भी नहीं की जा सकती थी। आज पुलिस, प्रशासन और सामाजिक संस्थाएं मिलकर लड़ रही हैं और नतीजे जमीनी स्तर पर साफ दिखाई दे रहे हैं।
पहले चरण के बारे में बताते हुए बलतेज पन्नू ने कहा कि इसका ध्यान न केवल सख्त कार्रवाई पर था, बल्कि सामाजिक व्यवहार को बदलने पर भी था। लोगों से अपील की गई थी कि वे नशा तस्करों का साथ न दें और नशा करने वालों से नफरत न करें, बल्कि उन्हें सरकारी नशा मुक्ति केंद्रों तक पहुँचाने में मदद करें। हमने इन केंद्रों में दवाओं, टेस्टिंग सुविधाओं और माहौल में सुधार करके इन्हें बदल दिया है, ताकि लोग वहां जाने से न डरें।
उन्होंने आगे कहा कि पुनर्वास के नए मॉडल पेश किए गए हैं। फतेहगढ़ साहिब के एक पायलट प्रोजेक्ट का हवाला देते हुए पन्नू ने बताया कि आई.टी.आई. इंस्ट्रक्टर्स को सीधे नशा मुक्ति केंद्रों में लाया गया। उन्होंने कहा कि जिन्होंने नशा पूरी तरह छोड़ दिया, उन्हें कौशल प्रशिक्षण और नौकरियों से जोड़ा गया ताकि वे दोबारा नशे के दलदल में न फंसें।
नशा विरोधी अभियान के दूसरे चरण के आगाज की घोषणा करते हुए बलतेज पन्नू ने बताया कि आज लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और ‘आप’ के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल की उपस्थिति में इसकी शुरुआत की गई। उन्होंने कहा कि दूसरा चरण सामुदायिक सतर्कता और नशा तस्करी के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर केंद्रित होगा। बलतेज पन्नू ने कहा कि दूसरे चरण के तहत ‘पिंड दे पहरेदार’ नाम की ग्राम रक्षा समितियां निर्णायक भूमिका निभाएंगी। उन्होंने कहा कि आज सवा लाख से डेढ़ लाख के करीब लोग पहले ही ‘पिंड दे पहरेदार’ के रूप में जुड़ चुके हैं, जो इस लहर में जन-भागीदारी की ताकत को दर्शाता है।
बलतेज पन्नू ने बताया कि ‘आप’ ने एक विशेष मोबाइल एप्लिकेशन भी लॉन्च की है जो केवल पंजीकृत ‘पिंड दे पहरेदारों’ के लिए उपलब्ध होगी। इस ऐप के माध्यम से, वे नशा बेचने वालों के बारे में नाम, स्थान, पता या संपर्क विवरण सहित जानकारी गुप्त रूप से दे सकते हैं। सूचना देने वाले की पहचान पूरी तरह गुप्त रखी जाएगी।
उन्होंने आगे कहा कि यह जानकारी सीधी मुख्यमंत्री और डीजीपी के पास जाएगी, जिससे केस की गंभीरता के अनुसार कुछ ही घंटों में तुरंत जांच और कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने किसी भी पंजाबी को नशा विरोधी लहर के साथ आसानी से जोड़ने के लिए एक मिस्ड कॉल नंबर जारी करने की भी घोषणा की। बलतेज पन्नू ने कहा कि कोई भी व्यक्ति जो नशे के खिलाफ इस जंग का हिस्सा बनना चाहता है, वह सिर्फ एक मिस्ड कॉल के जरिए जुड़ सकता है। हमें भरोसा है कि आने वाले दिनों में लाखों लोग इस मिशन से जुड़ेंगे।
अंत में बलतेज पन्नू ने कहा कि सरकार और लोग मिलकर पंजाब से नशा तस्करी को खत्म करने के लिए दृढ़ हैं। उन्होंने कहा कि हम ऐसा माहौल बना रहे हैं जहाँ नशा तस्कर उसी तरह खत्म हो जाएंगे, जैसे सालों पहले डायनासोर खत्म हो गए थे। यह लोगों की जंग है, और हम मिलकर पंजाब को पूरी तरह नशा मुक्त