2015 मारपीट केस में पूर्व अकाली विधायक मनजीत सिंह मन्ना भगोड़ा घोषित, 10 साल बाद कोर्ट का सख्त रुख
2015 के एक मारपीट मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। अकाली-भाजपा सरकार के दौरान विधायक व मंत्री रह चुके मनजीत सिंह मन्ना और उनके भाई रणजीत सिंह को कोर्ट ने भगोड़ा घोषित कर दिया। अदालत में लगातार पेश न होने और गिरफ्तारी वारंट की अवहेलना के बाद यह कार्रवाई की गई।
News Tv India हिंदी Official | Verified Expert • 27 Mar, 2026Editor
Feb 5, 2026 • 7:37 AM
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2015 मारपीट केस में पूर्व अकाली विधायक मनजीत सिंह मन्ना भगोड़ा घोषित, 10 साल बाद कोर्ट का सख्त रुख
2015 के एक मारपीट मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। अकाली-भाजपा सरकार के दौरान विधायक व मंत्री रह चुके मनजीत सिंह मन्ना और उनके भाई रणजीत सिंह को कोर्ट ने भगोड़ा घोषित कर दिया। अदालत में लगातार पेश न होने और गिरफ्तारी वारंट की अवहेलना के बाद यह कार्रवाई की गई।
Full Story: https://www.newstvindia.in/former-akali-mla-manjit-singh-manna-declared-fugitive-in-2015-assault-case-court-stern-after-10-years
2015 मारपीट केस में पूर्व अकाली विधायक मनजीत सिंह मन्ना भगोड़ा घोषित, 10 साल बाद कोर्ट का सख्त रुख
अमृतसर : अकाली-भाजपा सरकार के दौरान विधायक और मंत्री रह चुके मनजीत सिंह मन्ना और उनके भाई रणजीत सिंह को अदालत ने भगौड़ा घोषित कर दिया है। यह कार्रवाई वर्ष 2015 के एक मारपीट मामले में लंबे समय से अदालत में पेश न होने के चलते की गई है।
यह मामला उस वक्त सुर्खियों में आया था, जब पार्टी के ही एक सक्रिय कार्यकर्ता पूरन सिंह के साथ कथित तौर पर गंभीर मारपीट की गई थी। पीड़ित ने राजनीतिक प्रभाव के बावजूद करीब एक दशक तक न्याय की लड़ाई लड़ी, जिसके बाद अदालत को यह सख्त कदम उठाना पड़ा।
जानकारी के अनुसार, 18 सितंबर 2015 को अकाली सरकार के कार्यकाल के दौरान एक नॉन-कस्टोडियल केस को लेकर हुए विवाद में तत्कालीन अकाली विधायक मनजीत सिंह मन्ना और उनके भाई रणजीत सिंह पर अपने समर्थकों के साथ मिलकर पूरन सिंह की बेरहमी से पिटाई करने का आरोप लगा था। आरोपों में यह भी कहा गया कि पीड़ित पर तेजधार हथियारों से हमला किया गया और उसकी पगड़ी उतार दी गई, जिसे सिख समुदाय में अपमानजनक कृत्य माना जाता है।
घटना के बाद पीड़ित के बेटे ने थाना खलचिया में शिकायत दी और मेडिकल जांच की मांग की, लेकिन आरोप है कि उस समय पुलिस ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। इसके बाद पीड़ित पक्ष ने पंजाब पुलिस हेल्पलाइन 181 पर भी शिकायत दर्ज कराई थी।
अदालत का दरवाज़ा खटखटाया
इलाज के लिए पूरन सिंह को गुरु नानक देव अस्पताल, अमृतसर में भर्ती कराया गया, जहां से मेडिकल रिपोर्ट थाना खलचिया भेजी गई। बावजूद इसके, पुलिस पर राजनीतिक दबाव के आरोप लगते रहे।
न्याय न मिलने पर पीड़ित पूरन सिंह ने अपने वकील वी.के. जसवाल के माध्यम से ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट, बाबा बकाला साहिब की अदालत में धारा 156(3) सीआरपीसी के तहत शिकायत दाखिल की। अदालत ने इसे शिकायत केस के रूप में स्वीकार किया।
समन से भगौड़ा घोषित होने तक
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने शिकायतकर्ता, प्रत्यक्षदर्शी गवाहों, डॉक्टरों और सरकारी गवाहों सहित कुल नौ गवाहों के बयान दर्ज किए। इसके बाद 12 जुलाई 2019 को अदालत ने मनजीत सिंह मन्ना समेत सभी आरोपियों को धारा 326, 324, 323, 341, 148 और 149 आईपीसी के तहत समन जारी कर 8 अगस्त 2019 को पेश होने का आदेश दिया।
हालांकि, कुछ सह-आरोपी अदालत में पेश हुए, लेकिन मनजीत सिंह मन्ना और उनके भाई लगातार पेशी से बचते रहे। इस पर 29 जुलाई 2025 को अदालत ने उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किए।
31 जनवरी 2026 को भगौड़ा घोषित
लगातार गैर-हाजिरी को गंभीरता से लेते हुए 31 जनवरी 2026 को ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट (जूनियर डिवीजन) रमनदीप कौर ने मनजीत सिंह मन्ना और उनके भाई को भगौड़ा घोषित कर दिया। इस संबंध में थाना मुखी खलचिया को भी सूचना भेज दी गई है।
अदालत ने मामले में शेष आरोपियों के खिलाफ गवाही के लिए 16 फरवरी की तारीख तय की है।