मोबाइल डेटा पर राघव चड्ढा का बड़ा प्रहार: क्या टेलीकॉम कंपनियां कर रही हैं करोड़ों का 'डेटा खेल'?
राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने संसद में मोबाइल उपभोक्ताओं के हितों से जुड़ा एक बेहद संवेदनशील मुद्दा उठाया है। उन्होंने टेलीकॉम कंपनियों की 'डेली डेटा लिमिट' (Daily Data Limit) व्यवस्था पर सवाल खड़े करते हुए इसे उपभोक्ताओं के साथ होने वाला आर्थिक नुकसान बताया है। चड्ढा ने मांग की है कि बचा हुआ डेटा बेकार जाने के बजाय 'कैरी फॉरवर्ड' होना चाहिए।
News Tv India हिंदी Official | Verified Expert • 27 Mar, 2026Editor
Mar 23, 2026 • 11:28 PM
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29 days ago
मोबाइल डेटा पर राघव चड्ढा का बड़ा प्रहार: क्या टेलीकॉम कंपनियां कर रही हैं करोड़ों का 'डेटा खेल'?
राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने संसद में मोबाइल उपभोक्ताओं के हितों से जुड़ा एक बेहद संवेदनशील मुद्दा उठाया है। उन्होंने टेलीकॉम कंपनियों की 'डेली डेटा लिमिट' (Daily Data Limit) व्यवस्था पर सवाल खड़े करते हुए इसे उपभोक्ताओं के साथ होने वाला आर्थिक नुकसान बताया है। चड्ढा ने मांग की है कि बचा हुआ डेटा बेकार जाने के बजाय 'कैरी फॉरवर्ड' होना चाहिए।
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मोबाइल डेटा पर राघव चड्ढा का बड़ा प्रहार: क्या टेलीकॉम कंपनियां कर रही हैं करोड़ों का 'डेटा खेल'?
Telecom Data Crisis : राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने संसद में मोबाइल उपभोक्ताओं के हितों से जुड़ा एक बेहद संवेदनशील मुद्दा उठाया है। उन्होंने टेलीकॉम कंपनियों की 'डेली डेटा लिमिट' (Daily Data Limit) व्यवस्था पर सवाल खड़े करते हुए इसे उपभोक्ताओं के साथ होने वाला आर्थिक नुकसान बताया है। चड्ढा ने मांग की है कि बचा हुआ डेटा बेकार जाने के बजाय 'कैरी फॉरवर्ड' होना चाहिए।
डेली डेटा लिमिट का गणित
सांसद राघव चड्ढा ने सदन में विस्तार से समझाया कि कैसे देश के करोड़ों मोबाइल यूजर्स हर दिन अनजाने में वित्तीय नुकसान झेल रहे हैं। वर्तमान में, जब कोई यूजर 1.5GB या 2GB प्रतिदिन वाला प्लान खरीदता है, तो वह पूरे डेटा का भुगतान पहले ही कर चुका होता है।
विवाद की मुख्य जड़ यह है कि यदि कोई उपभोक्ता दिन भर में केवल 1GB डेटा इस्तेमाल कर पाता है, तो बचा हुआ 500MB या 1GB डेटा आधी रात को अपने आप खत्म हो जाता है। वह अगले दिन के कोटा में नहीं जुड़ता, जबकि यूजर ने उसकी पूरी कीमत चुकाई होती है।
राघव चड्ढा ने इस समस्या को एक सरल उदाहरण के जरिए पेश किया। उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति 20 लीटर पेट्रोल खरीदता है और गाड़ी में केवल 15 लीटर ही इस्तेमाल करता है, तो बचा हुआ 5 लीटर पेट्रोल कंपनी वापस नहीं ले सकती।
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ठीक इसी तरह, डेटा भी उपभोक्ता की 'डिजिटल प्रॉपर्टी' है। उन्होंने आरोप लगाया कि टेलीकॉम कंपनियां जानबूझकर ऐसे प्लान्स को बढ़ावा देती हैं ताकि बचा हुआ डेटा लैप्स हो जाए और कंपनियों का मुनाफा बढ़े। उन्होंने इंटरनेट को आज के दौर की 'डिजिटल ऑक्सीजन' (Digital Oxygen) करार दिया।
संसद में चर्चा के दौरान उन्होंने सरकार और रेगुलेटरी बॉडी के सामने तीन बड़े सुझाव रखे हैं, जो मोबाइल यूजर्स की जेब को राहत दे सकते हैं:
डेटा कैरी फॉरवर्ड (Data Carry Forward): दिन के अंत में बचा हुआ डेटा अगले दिन या अगले महीने के बैलेंस में जोड़ा जाना चाहिए।
वैल्यू एडजस्टमेंट (Value Adjustment): यदि महीने के अंत में डेटा बच जाता है, तो उसकी कीमत को अगले रिचार्ज में कम (Adjust) किया जाना चाहिए।
डेटा ट्रांसफर सुविधा: अनयूज्ड डेटा को डिजिटल संपत्ति मानते हुए उसे दूसरे यूजर्स को ट्रांसफर करने की अनुमति मिलनी चाहिए।
उपभोक्ता अधिकारों की लड़ाई
यह पहली बार नहीं है जब राघव चड्ढा ने टेलीकॉम सेक्टर की विसंगतियों पर बात की है। इससे पहले भी वह 28 दिन की वैलिडिटी वाले 'महीने के प्लान' और रिचार्ज खत्म होते ही इनकमिंग कॉल बंद होने जैसे मुद्दों पर आवाज उठा चुके हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार इन सुझावों पर विचार करती है, तो यह भारतीय टेलीकॉम बाजार में एक बड़ा बदलाव होगा। इससे न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि ग्राहकों को उनके खर्च किए गए हर पैसे का पूरा लाभ मिल सकेगा।