पंजाब सूचना आयोग का कड़ा रुख: अबोहर के BDPO के खिलाफ वारंट जारी, 5 बार गैरहाजिर रहने पर वेतन रोकने के भी आदेश
सूचना आयुक्त हरप्रीत सिंह संधू ने अबोहर के बीडीपीओ के खिलाफ वारंट जारी किए और वेतन रोकने के आदेश दिए। अधिकारी को 19 मार्च को पेश होने की हिदायत।
चंडीगढ़/अबोहर: पंजाब राज्य सूचना आयोग ने सूचना के अधिकार (RTI) के प्रति लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त तेवर अपना लिए हैं। ताजा मामले में, आयोग ने फाजिल्का जिले के अबोहर ब्लॉक विकास एवं पंचायत अधिकारी (BDPO) अंतरप्रीत सिंह के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किए हैं। यह कार्रवाई बार-बार आदेशों की अवहेलना करने और सुनवाई में शामिल न होने के चलते की गई है।
"5 सुनवाइयों से नदारद रहे अधिकारी"
पंजाब राज्य सूचना आयुक्त हरप्रीत सिंह संधू ने इस मामले की जानकारी देते हुए बताया कि हाकम सिंह निवासी गांव रामगढ़ (अबोहर) द्वारा दायर केस नंबर 6508/2023 की सुनवाई चल रही है। इस मामले में लोक सूचना अधिकारी (PIO) कम-बीडीपीओ अंतरप्रीत सिंह को आयोग के समक्ष उपस्थित होना था। संधू ने बताया कि अधिकारी अब तक हुई पिछली 5 सुनवाइयों में आयोग की स्पष्ट हिदायतों के बावजूद गैर-उपस्थित रहे, जिसे आयोग ने गंभीरता से लिया है।
वेतन रोकने और SSP फाजिल्का को वारंट तामील करने के आदेश
आयोग ने केवल वारंट ही जारी नहीं किए, बल्कि अनुशासनहीनता को देखते हुए ग्रामीण विकास एवं पंचायत विभाग को अंतरप्रीत सिंह का वेतन अटैच (रोकने) करने के आदेश भी जारी कर दिए हैं।
सूचना आयुक्त ने आरटीआई एक्ट 2005 की धारा 18 (3) (ए) के तहत मिली शक्तियों का प्रयोग करते हुए एसएसपी (SSP) फाजिल्का को निर्देश दिए हैं कि वे उक्त अधिकारी को वारंट की कॉपी तामील करवाएं। आयोग ने सख्त निर्देश दिए हैं कि अधिकारी को अगली सुनवाई की तारीख 19 मार्च, 2026 को हर हाल में आयोग के समक्ष पेश किया जाए।
आरटीआई एक्ट के प्रति जवाबदेही तय
सूचना आयोग की इस कार्रवाई से प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। हरप्रीत सिंह संधू ने स्पष्ट किया कि लोक सूचना अधिकारियों को जनता के प्रति जवाबदेह होना होगा और आयोग की कार्यवाही को हल्के में लेने वालों के खिलाफ भविष्य में भी ऐसी ही कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।