यूपी के सरकारी स्कूलों में 25 मार्च को मनेगा ‘नवारंभ उत्सव’, खेल-खेल में पढ़ाई शुरू करेंगे नौनिहाल

उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा विभाग 25 मार्च को प्रदेश के सभी बालवाटिका युक्त विद्यालयों में 'नवारंभ उत्सव' का आयोजन करने जा रहा है। इस उत्सव का मुख्य उद्देश्य 3 से 6 वर्ष की आयु के बच्चों को खेल-आधारित गतिविधियों के माध्यम से औपचारिक शिक्षा से जोड़ना और कक्षा 1 में उनके प्रवेश को सुगम बनाना है।

Mar 24, 2026 - 22:28
यूपी के सरकारी स्कूलों में 25 मार्च को मनेगा ‘नवारंभ उत्सव’, खेल-खेल में पढ़ाई शुरू करेंगे नौनिहाल
यूपी के सरकारी स्कूलों में 25 मार्च को मनेगा ‘नवारंभ उत्सव’, खेल-खेल में पढ़ाई शुरू करेंगे नौनिहाल

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में छोटे बच्चों के लिए स्कूल जाने का अनुभव अब और भी यादगार और रोचक होने वाला है। राज्य का बेसिक शिक्षा विभाग 25 मार्च को प्रदेश भर के को-लोकेटेड आंगनवाड़ी केंद्रों जिन्हें 'बालवाटिका' कहा जाता है, उनमें 'नवारंभ उत्सव' आयोजित करने जा रहा है। इस पहल के जरिए योगी सरकार प्रारंभिक शिक्षा के ढांचे को सुदृढ़ करने और बच्चों के मन से स्कूल का डर भगाकर सीखने के प्रति उनमें जिज्ञासा जगाने का प्रयास कर रही है।

पार्थ सारथी सेन शर्मा करेंगे राज्यव्यापी कार्यक्रम का शुभारंभ

इस महत्वपूर्ण उत्सव की औपचारिक शुरुआत अपर मुख्य सचिव (बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा) पार्थ सारथी सेन शर्मा द्वारा की जाएगी। वे लखनऊ के विकासखंड सरोजनीनगर स्थित ग्राम रामचौरा के प्राथमिक विद्यालय की बालवाटिका से इस अभियान का आगाज करेंगे। इस दौरान विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहेंगे जो बच्चों का उत्साहवर्धन करेंगे और उनके पहले शैक्षणिक कदम को यादगार बनाएंगे।

रेत पर लेखन और खेल-आधारित रोचक गतिविधियां

नवारंभ उत्सव की सबसे बड़ी विशेषता इसकी आधुनिक शिक्षण पद्धति है जहाँ पारंपरिक किताबी ज्ञान के बजाय बच्चों को खेल और रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ा जाएगा। 3 से 4 वर्ष के छोटे बच्चों को 'रेत पर लेखन' जैसी गतिविधियों के माध्यम से अक्षरों की प्रारंभिक समझ विकसित कराई जाएगी। इसके साथ ही 3 से 6 वर्ष की आयु के बच्चों के नामांकन और 6 वर्ष पूर्ण कर चुके बच्चों के कक्षा 1 में सीधे प्रवेश को सरल और आकर्षक बनाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। खेल-आधारित इस पद्धति से बच्चों की जिज्ञासा और सीखने की क्षमता को प्रारंभिक स्तर पर ही सशक्त करने का लक्ष्य रखा गया है।

सामुदायिक सहभागिता और अभिभावकों की सक्रिय भूमिका

इस आयोजन को केवल एक सरकारी कार्यक्रम तक सीमित न रखकर इसे एक सामाजिक उत्सव का रूप दिया जा रहा है जिसमें स्थानीय जनप्रतिनिधियों और अभिभावकों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई है। विद्यालय, अभिभावक और समुदाय के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होने से बच्चों के लिए घर जैसा सुरक्षित और प्रेरक वातावरण तैयार हो सकेगा। यह पहल बच्चों के प्रारंभिक सीखने के अनुभव को समृद्ध करने में सहायक सिद्ध होगी।

नेतृत्व का संदेश और समग्र विकास का लक्ष्य

बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने इस पहल को बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव बताया है। वहीं महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने इस बात पर जोर दिया है कि प्रारंभिक स्तर पर खेल-खेल में दी जाने वाली शिक्षा बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास के लिए अत्यंत प्रभावशाली होती है। विभाग का मानना है कि इस प्रकार के आयोजनों से सरकारी स्कूलों के प्रति आम जनता का विश्वास बढ़ेगा और बुनियादी शिक्षा के स्तर में सुधार होगा।

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