यूपी में 1 से 15 अप्रैल तक चलेगा स्कूल वाहनों का विशेष फिटनेस अभियान; अनफिट बसों पर होगी कड़ी कार्रवाई
उत्तर प्रदेश सरकार ने स्कूली वाहनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए 1 से 15 अप्रैल तक विशेष जाँच अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। मुख्य सचिव एस.पी. गोयल ने स्पष्ट किया है कि अनफिट वाहनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और इसके लिए 'इंटीग्रेटेड स्कूल व्हीकल मॉनीटरिंग पोर्टल' का उपयोग किया जाएगा जिससे अभिभावक भी वाहनों की स्थिति ट्रैक कर सकेंगे।
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में नए शिक्षा सत्र की शुरुआत के साथ ही शासन स्कूली वाहनों की सुरक्षा को लेकर सख्त हो गया है। बुधवार, 25 मार्च 2026 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हुई साप्ताहिक समीक्षा बैठक में मुख्य सचिव एस.पी. गोयल ने सभी मण्डलायुक्तों और जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि बच्चों की सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं होगा। उन्होंने बताया कि परिवहन विभाग द्वारा विकसित इंटीग्रेटेड स्कूल व्हीकल मॉनीटरिंग पोर्टल के माध्यम से सभी स्कूलों को अपने वाहनों का विवरण अनिवार्य रूप से दर्ज कराना होगा। इस डिजिटल प्रणाली से स्कूल वाहनों की निगरानी अधिक पारदर्शी बनेगी और रीयल-टाइम ट्रैकिंग के जरिए जवाबदेही भी तय होगी।
डिजिटल निगरानी और 15 दिवसीय विशेष अभियान
परिवहन आयुक्त किंजल सिंह ने बैठक में जानकारी दी कि नए पोर्टल को ‘वाहन’ और ‘सारथी’ डेटाबेस से जोड़ा गया है जिससे वाहनों और चालकों का स्वतः सत्यापन संभव होगा। इसके जरिए फिटनेस, बीमा और परमिट से संबंधित सभी दस्तावेजों की निगरानी की जा सकेगी जबकि अभिभावक भी वाहनों की वर्तमान स्थिति देख सकेंगे। मुख्य सचिव ने निर्देश दिया कि 1 से 15 अप्रैल तक चलने वाले इस विशेष अभियान के दौरान अनफिट पाए जाने वाले स्कूली वाहनों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। बच्चों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए भौतिक सत्यापन पर भी विशेष जोर दिया गया है।
लखपति दीदी और गो-आश्रय स्थलों की समीक्षा
बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने “लखपति दीदी” कार्यक्रम की प्रगति का भी जायजा लिया। उन्होंने निर्देश दिया कि डिजिटल आजीविका रजिस्टर में स्वयं सहायता समूह की महिलाओं की त्रैमासिक आय का शत-प्रतिशत और त्रुटिरहित डेटा दर्ज किया जाए। इसके साथ ही गो-आश्रय स्थलों को लेकर 15 अप्रैल से विशेष भूसा संग्रह अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं ताकि चारे की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित हो सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि खरीद प्रक्रिया में बिचौलियों को शामिल न किया जाए और स्थानीय स्तर पर भंडारण व्यवस्था को मजबूत किया जाए। प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए किसानों को गो-आश्रय स्थलों से जोड़ने और बायोगैस संयंत्रों की स्थापना पर भी चर्चा की गई।
ओलावृष्टि से हुए नुकसान का तत्काल सर्वे और राहत
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से हुए नुकसान पर भी मुख्य सचिव ने संवेदनशीलता दिखाई है। उन्होंने अधिकारियों को तत्काल सर्वे कराने और किसानों को समयबद्ध क्षतिपूर्ति देने के निर्देश दिए हैं। प्रत्येक ग्राम पंचायत में एक संयुक्त समिति बनाई जाएगी जो पारदर्शी ढंग से फसल की क्षति का आकलन करेगी जिससे राहत राशि का वितरण बिना किसी देरी के सुनिश्चित हो सके। मुख्य सचिव ने विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर जोर दिया ताकि सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र व्यक्तियों तक त्वरित गति से पहुँच सके।