Hormuz Crisis: पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच फोन पर हुई चर्चा, 'होर्मुज जलडमरूमध्य' को खुला रखने पर दिया जोर

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष के बीच मंगलवार को पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच पहली बार आधिकारिक फोन कॉल हुई। दोनों नेताओं ने मिडिल ईस्ट की नाजुक स्थिति और वैश्विक तेल आपूर्ति के सबसे प्रमुख मार्ग 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर विस्तार से चर्चा की।

Mar 24, 2026 - 22:20
Hormuz Crisis: पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच फोन पर हुई चर्चा, 'होर्मुज जलडमरूमध्य' को खुला रखने पर दिया जोर
Hormuz Crisis: पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच फोन पर हुई चर्चा, 'होर्मुज जलडमरूमध्य' को खुला रखने पर दिया जोर

नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर बात कर पश्चिम एशिया के ताजा हालातों पर विमर्श किया। भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने इस बातचीत की पुष्टि करते हुए बताया कि दोनों नेताओं के बीच रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चर्चा हुई। भारत ने हमेशा से ही युद्ध के बजाय बातचीत के जरिए विवाद सुलझाने पर बल दिया है और यह कॉल उसी दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।

होर्मुज जलडमरूमध्य और दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा पर गहराता संकट

बातचीत का सबसे मुख्य केंद्र 'होर्मुज जलडमरूमध्य' रहा जो वर्तमान युद्ध के कारण ब्लॉक होने की कगार पर है। यह क्षेत्र वैश्विक तेल आपूर्ति का सबसे महत्वपूर्ण रूट है और भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का 60 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल और गैस इसी मार्ग से आयात करता है। पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप इस बात पर सहमत हुए कि अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में नौवहन की स्वतंत्रता बनाए रखना पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए अनिवार्य है क्योंकि यहाँ किसी भी तरह का अवरोध वैश्विक तेल-गैस सप्लाई को पूरी तरह ठप कर सकता है।

ट्रंप का 5-दिवसीय अल्टीमेटम और शांति की धुंधली उम्मीद

यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब राष्ट्रपति ट्रंप ने हाल ही में ईरान को लेकर एक बड़ा ऐलान किया है। ट्रंप ने दावा किया है कि तेहरान के साथ उनके प्रतिनिधियों की बातचीत सकारात्मक और उत्पादक रही है जिसके चलते उन्होंने अमेरिकी सेना को अगले 5 दिनों तक ईरान के ऊर्जा संयंत्रों पर हमला न करने का निर्देश दिया है। हालांकि इससे पहले ट्रंप ने ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने के लिए 48 घंटे का कड़ा अल्टीमेटम भी दिया था। दूसरी ओर ईरान के विदेश मंत्रालय ने फिलहाल किसी भी सीधी बातचीत से इनकार किया है जिससे कूटनीतिक सस्पेंस बना हुआ है।

संसद में पीएम मोदी की चिंता और भारत का कूटनीतिक रुख

प्रधानमंत्री ने सोमवार और मंगलवार को संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) को संबोधित करते हुए इस संकट को बेहद चिंताजनक बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत इस समय सभी प्रमुख पक्षों यानी ईरान, इजरायल, अमेरिका और खाड़ी देशों के साथ लगातार संपर्क में है। पीएम ने चेतावनी दी कि इस युद्ध के कारण दुनिया भर की सप्लाई चेन प्रभावित हुई है जिसका असर खाद, पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर पड़ सकता है। भारत का प्राथमिक उद्देश्य अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के साथ-साथ क्षेत्र में शांति बहाल करना है।

भविष्य की रणनीति

पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच हुई इस बातचीत से यह संकेत मिलता है कि भारत मध्य-पूर्व में मध्यस्थ की एक प्रभावी भूमिका निभा सकता है। दोनों नेता इस बात पर सहमत हुए कि वे क्षेत्र में स्थिरता बहाल करने के प्रयासों के लिए एक-दूसरे के निरंतर संपर्क में बने रहेंगे। भारत ने एक बार फिर दुनिया को यह संदेश दिया है कि किसी भी बड़े विवाद का हल केवल डायलॉग और डिप्लोमेसी के जरिए ही संभव है।

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