विदेशी सेब के 'चमकते छिलके' पर न जाएं, कश्मीरी और हिमाचली सेब हैं सेहत का खजाना: स्पीकर संधवां
पंजाब स्पीकर संधवां ने कहा कि आयातित सेबों में 85% विटामिन-सी कम हो जाता है। उन्होंने भारत-अमेरिका ट्रेड डील को किसान विरोधी बताया और हिमाचली सेब को सराहा।
चंडीगढ़: पंजाब विधानसभा के स्पीकर कुलतार सिंह संधवां ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते और आयातित सेबों की गुणवत्ता को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने अपोलो अस्पताल के विशेषज्ञ डॉक्टरों की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि विदेशी सेब देखने में भले ही चमकदार हों, लेकिन वे भारतीय सेबों (हिमाचली और कश्मीरी) के मुकाबले बेहद कम पौष्टिक हैं। संधवां ने चेतावनी दी कि अमेरिका के साथ होने वाले व्यापारिक समझौते से न केवल भारतीय किसानों को आर्थिक चोट पहुंचेगी, बल्कि आम जनता की सेहत के साथ भी खिलवाड़ होगा।
"आयातित सेब में 85% तक कम हो जाता है विटामिन-C"
स्पीकर संधवां ने बताया कि अपोलो अस्पताल के डॉक्टरों के अनुसार, विदेशी सेब लंबे समय तक स्टोर किए जाते हैं और लंबी दूरी तय करके भारत पहुंचते हैं। इस प्रक्रिया के दौरान इनमें मौजूद 40 से 85 प्रतिशत तक पोषक तत्व, खासकर विटामिन-सी, खत्म हो जाते हैं।
"आयातित सेब चमकदार दिखने के लिए वैक्स और रसायनों का सहारा लेते हैं, लेकिन उनकी गुणवत्ता घटिया दर्जे की होती है। इसके उलट हमारे देश के कश्मीरी और हिमाचली सेब ताजे, पौष्टिक और किफायती हैं।" - कुलतार सिंह संधवां, स्पीकर
किसान विरोधी नीतियों पर कड़ा विरोध
संधवां ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को 'किसान विरोधी' करार दिया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की उदासीनता निंदनीय है। अमेरिका से सस्ते कृषि उत्पादों के आयात से भारतीय किसानों की कमर टूट जाएगी। पंजाब सरकार इस समझौते के खिलाफ किसानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है और केंद्र की इन नीतियों का पुरजोर विरोध किया जाएगा।
स्वदेशी सेब: कम लागत, ज्यादा फायदा
स्पीकर ने जोर दिया कि हमें विदेशी सेबों के लिए भारी कीमत चुकानी पड़ती है, जबकि वे स्वास्थ्य के लिहाज से उतने फायदेमंद नहीं हैं। उन्होंने आशा जताई कि केंद्र सरकार इन कड़वे तथ्यों पर गौर करेगी और स्थानीय बागवानी को बढ़ावा देने के लिए ठोस कदम उठाएगी।