बसपा अध्यक्ष करीमपुरी का तीखा हमला: "दफ्तरों में अंबेडकर की फोटो और बोर्ड पर जातिवाद यह सरकार का दोहरा चेहरा है"

पंजाब के नवांशहर में सरकारी बोर्ड पर 'हरिजन' शब्द लिखे जाने पर बसपा और अकाली दल ने भगवंत मान सरकार को घेरा। जानें क्या है पूरा कानूनी विवाद।

Feb 15, 2026 - 10:48
बसपा अध्यक्ष करीमपुरी का तीखा हमला: "दफ्तरों में अंबेडकर की फोटो और बोर्ड पर जातिवाद यह सरकार का दोहरा चेहरा है"
बसपा अध्यक्ष करीमपुरी का तीखा हमला: "दफ्तरों में अंबेडकर की फोटो और बोर्ड पर जातिवाद यह सरकार का दोहरा चेहरा है"

नवांशहर (ब्रह्मपुरी): नवांशहर जिले के गांव गहूंण से रक्कड़ां बेट तक बनाई गई करीब 670 मीटर लंबी सड़क के बोर्ड पर “हरिजन बस्ती” शब्द लिखे जाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। यह सड़क मार्केट कमेटी बलाचौर द्वारा बनाई गई बताई जा रही है।

स्थानीय नेताओं का आरोप है कि बोर्ड पर “हरिजन” शब्द का प्रयोग जातिसूचक है और यह संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ है।

सरकार पर प्रचार के आरोप

विपक्षी दलों का कहना है कि राज्य सरकार सार्वजनिक कार्यों पर मुख्यमंत्री के नाम वाले बोर्ड लगाने की मुहिम चला रही है। पहले सरकारी स्कूलों में वॉशरूम रेनोवेशन के दौरान और बाद में ट्रांसफॉर्मर व सड़क मरम्मत के कामों पर भी उद्घाटन बोर्ड लगाए गए थे, जिनका विरोध हुआ था।

अब सड़क के बोर्ड पर लिखे शब्द को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है।

बसपा ने की कानूनी कार्रवाई की मांग

Avtar Singh Karimpuri, प्रदेश अध्यक्ष, Bahujan Samaj Party ने कहा कि जातिसूचक शब्द का इस्तेमाल संविधान की भावना के खिलाफ है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार राजनीतिक ताकत का दुरुपयोग कर रही है और इस मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।

बलाचौर क्षेत्र के बसपा नेता डॉ. राजिंदर लक्की ने भी कहा कि “हरिजन” शब्द का उपयोग आपराधिक मामला बन सकता है और वे इस मुद्दे पर कानूनी कदम उठाएंगे।

अकाली दल ने भी जताया विरोध

Shiromani Akali Dal के स्थानीय नेताओं हनी टोंसा, अशोक नानोवाल, गुरप्रीत गुज्जर और अन्य ने भी इस मामले की निंदा की। उनका कहना है कि सरकार की ओर से ऐसे शब्दों का प्रयोग सामाजिक विभाजन को बढ़ावा देता है।

उन्होंने कहा कि वे इस संबंध में एससी आयोग के चेयरमैन से मिलकर लिखित शिकायत देंगे।

संवैधानिक बहस का मुद्दा

विवाद के केंद्र में यह प्रश्न है कि क्या सार्वजनिक बोर्डों पर “हरिजन” जैसे शब्दों का उपयोग किया जाना चाहिए। कई सामाजिक संगठनों और दलित समूहों ने समय-समय पर इस शब्द के प्रयोग पर आपत्ति जताई है और “दलित” या “अनुसूचित जाति” जैसे आधिकारिक शब्दों के उपयोग की वकालत की है।

फिलहाल इस मामले में प्रशासन या सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

यह मामला अब राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है।

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