New Delhi World Book Fair 2026: 53वें विश्व पुस्तक मेले का आगाज, धर्मेंद्र प्रधान बोले- भारत बना दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा प्रकाशन केंद्र
भारत मंडपम में 53वें नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेले का भव्य उद्घाटन हुआ। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने 'राष्ट्रीय ई-लाइब्रेरी' और डिजिटल रीडिंग पर जोर देते हुए भारत को प्रकाशन जगत की वैश्विक शक्ति बताया। जानें इस बार मेले में क्या है खास और 'वंदे मातरम' का 150वां कनेक्शन।
News Tv India हिंदी Official | Verified Expert • 27 Mar, 2026Editor
Jan 10, 2026 • 6:30 PM
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New Delhi World Book Fair 2026: 53वें विश्व पुस्तक मेले का आगाज, धर्मेंद्र प्रधान बोले- भारत बना दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा प्रकाशन केंद्र
भारत मंडपम में 53वें नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेले का भव्य उद्घाटन हुआ। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने 'राष्ट्रीय ई-लाइब्रेरी' और डिजिटल रीडिंग पर जोर देते हुए भारत को प्रकाशन जगत की वैश्विक शक्ति बताया। जानें इस बार मेले में क्या है खास और 'वंदे मातरम' का 150वां कनेक्शन।
Full Story: https://www.newstvindia.in/53rd-world-book-fair-opens-dharmendra-pradhan-says-india-becomes-the-third-largest-publishing-center-in-the-world
New Delhi World Book Fair 2026: 53वें विश्व पुस्तक मेले का आगाज, धर्मेंद्र प्रधान बोले- भारत बना दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा प्रकाशन केंद्र
नई दिल्ली : भारत मंडपम में 53वें नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला 2026 का भव्य उद्घाटन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने किया। उद्घाटन समारोह के दौरान उन्होंने टैम्बोरिन बजाकर कार्यक्रम की शुरुआत की।
इस अवसर पर धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि पिछले 53 वर्षों से लगातार आयोजित हो रहा दिल्ली पुस्तक मेला आज प्रकाशन जगत का एक प्रतिष्ठित और भरोसेमंद मंच बन चुका है।
उन्होंने बताया कि आज भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा प्रकाशन और पुस्तक व्यापार केंद्र बनकर उभरा है, जो देश की बौद्धिक और सांस्कृतिक शक्ति को दर्शाता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विचारों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि पीएम मोदी हमेशा कहते हैं, "पढ़ोगे, तो नेतृत्व करोगे।" सरकार देश में पढ़ने की संस्कृति को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दे रही है।
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केंद्रीय मंत्री ने बताया कि 19वीं सदी की शुरुआत में ओडिशा के संबलपुर में अंग्रेजों के खिलाफ हुए एक बड़े संघर्ष में वीर सुरेंद्र साईं के भाई चाबिल साईं ने कुडोपाली में अपने प्राणों की आहुति दी थी। इस बलिदान की कहानी अब एक पुस्तक के रूप में प्रकाशित की गई है, जिसका अनुवाद कई विदेशी भाषाओं में किया गया है। उन्होंने इस पहल के लिए नेशनल बुक ट्रस्ट (एनबीटी) को बधाई दी।
डिजिटल युग पर बात करते हुए धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि आज सरकार का लक्ष्य ज्ञान को सुलभ और समावेशी बनाना है, जहां भाषा बाधा नहीं बल्कि सेतु बने। इसी सोच के तहत राष्ट्रीय ई-लाइब्रेरी जैसी पहलें डिजिटल इंडिया के विजन को साकार कर रही हैं। उन्होंने बताया कि इन प्लेटफॉर्म्स पर 23 से अधिक भाषाओं में 6,000 से ज्यादा मुफ्त ई-बुक्स उपलब्ध होंगी, जिनमें टेक्स्ट-टू-स्पीच जैसी सुविधाएं भी शामिल हैं।
कार्यक्रम में उन्होंने 'वंदे मातरम' की 150वीं वर्षगांठ का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ऑल इंडिया रेडियो पर ओंकारनाथ ठाकुर द्वारा गाया गया वंदे मातरम केवल एक संगीत प्रस्तुति नहीं थी, बल्कि स्वतंत्र भारत के जन्म का सांस्कृतिक उत्सव था। इस ऐतिहासिक विरासत को आज दिल्ली विश्व पुस्तक मेले में प्रदर्शित किया जा रहा है, जो हमें अतीत से जोड़ते हुए भविष्य की दिशा दिखाती है।