11 मार्च को 3 बड़े व्रत एक साथ; शीतला माता और कालभैरव को प्रसन्न करने के लिए नोट करें शुभ मुहूर्त
नई दिल्ली : हिंदू पंचांग के अनुसार 11 मार्च, बुधवार को शीतला अष्टमी (बासोड़ा), कालाष्टमी और मासिक कृष्ण जन्माष्टमी है। ये दिन भक्तों के लिए पूजा, व्रत और आध्यात्मिक साधना का विशेष अवसर है। इन तीनों तिथियों पर अलग-अलग देवी-देवताओं की आराधना की जाती है, जिससे परिवार में सुख-शांति, स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है।
शीतला अष्टमी या बासोड़ा पूजा होली के बाद कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मनाई जाती है। इस दिन माता शीतला की पूजा की जाती है, जो संक्रामक रोगों और चर्म रोगों से रक्षा करने वाली देवी मानी जाती हैं। पूजा में बासी (ठंडा या पुराना) भोजन चढ़ाने का विधान है, इसलिए इसे बासोड़ा भी कहते हैं। भक्त इस दिन देवी से परिवार के स्वास्थ्य की कामना करते हैं।
कालाष्टमी भगवान कालभैरव को समर्पित है। यह हर महीने कृष्ण पक्ष की अष्टमी को पड़ता है। कालभैरव के उपासक इस दिन उपवास रखते हैं, पूजा-अर्चना करते हैं और भैरव चालीसा का पाठ करते हैं। भगवान कालभैरव समय के स्वामी, न्याय के रक्षक और भय-शत्रु के नाशक माने जाते हैं।
बुधवार को मासिक कृष्ण जन्माष्टमी भी है। यह प्रत्येक महीने कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मनाई जाती है। यह भाद्रपद मास की वार्षिक जन्माष्टमी से अलग है। इस व्रत का मुख्य उद्देश्य भगवान श्रीकृष्ण का निरंतर स्मरण, उनकी लीलाओं का चिंतन और सेवा में लीन रहना है। भक्त इस दिन व्रत रखते हैं, भजन-कीर्तन करते हैं और मंदिरों में दर्शन करते हैं।
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चैत्र माह, कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 11 मार्च को है। इस दिन सूर्योदय 6 बजकर 36 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 6 बजकर 27 मिनट पर होगा। नक्षत्र ज्येष्ठा रात 10 बजे तक है।
शुभ मुहूर्त की बात करें तो ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 58 मिनट से 5 बजकर 47 मिनट तक अमृत काल दोपहर 12 बजकर 8 मिनट से 1 बजकर 55 मिनट तक है। विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 30 मिनट से 3 बजकर 17 मिनट तक है। वहीं, गोधूलि मुहूर्त शाम 6 बजकर 25 मिनट से 6 बजकर 49 मिनट तक है।
अशुभ समय की बात करें तो राहुकाल दोपहर 12 बजकर 31 मिनट से 2 बजे तक है। यमगंड सुबह 8 बजकर 5 मिनट से 9 बजकर 33 मिनट तक है। गुलिक काल सुबह 11 बजकर 2 मिनट से दोपहर 12 बजकर 31 मिनट तक और दुर्मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 8 मिनट से 12 बजकर 55 मिनट तक है।