Women's Reservation: 2029 तक लागू होगा महिला आरक्षण; 2011 की जनगणना बनेगी आधार और लोकसभा सीटें बढ़कर होंगी 816
केंद्र सरकार नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन कर इसे 2029 के चुनावों तक प्रभावी बनाने की योजना बना रही है। इसके लिए 2011 की जनगणना को आधार मानकर परिसीमन किया जाएगा जिससे लोकसभा की सीटें 543 से बढ़कर 816 हो जाएंगी
News Tv India हिंदी Official | Verified Expert • 27 Mar, 2026Editor
Mar 25, 2026 • 10:44 AM
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28 days ago
Women's Reservation: 2029 तक लागू होगा महिला आरक्षण; 2011 की जनगणना बनेगी आधार और लोकसभा सीटें बढ़कर होंगी 816
केंद्र सरकार नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन कर इसे 2029 के चुनावों तक प्रभावी बनाने की योजना बना रही है। इसके लिए 2011 की जनगणना को आधार मानकर परिसीमन किया जाएगा जिससे लोकसभा की सीटें 543 से बढ़कर 816 हो जाएंगी
Full Story: https://www.newstvindia.in/women-s-reservation-women-s-reservation-to-be-implemented-by-2029-2011-census-to-be-made-aadhaar-and-lok-sabha-seats-to-increase-816
Women's Reservation: 2029 तक लागू होगा महिला आरक्षण; 2011 की जनगणना बनेगी आधार और लोकसभा सीटें बढ़कर होंगी 816
नई दिल्ली:संसद के दोनों सदनों से पारित होने के बावजूद महिला आरक्षण कानून अब तक लागू नहीं हो सका है क्योंकि मूल कानून में इसे नई जनगणना और परिसीमन के बाद ही प्रभावी बनाने का प्रावधान था। अब सरकार इस तकनीकी बाधा को दूर करने के लिए इसी हफ्ते संसद में एक संशोधन विधेयक और संविधान संशोधन लाने की तैयारी में है जिससे 2029 के लोकसभा चुनाव तक महिला आरक्षण लागू किया जा सके।
2011 की जनगणना और सीटों का नया गणित
सरकार की नई रणनीति के तहत जनगणना के इंतजार को खत्म कर पुराने आंकड़ों के आधार पर ही सीटों की संख्या बढ़ाई जाएगी। साल 2011 की जनगणना के आधार पर नए परिसीमन के बाद लोकसभा की कुल सीटें 543 से बढ़कर 816 हो सकती हैं और 816 सदस्यों वाली इस नई लोकसभा में महिलाओं के लिए 273 सीटें (33%) आरक्षित की जाएंगी। यह संविधान संशोधन इसलिए लाया जाएगा जिससे साल 2011 की जनगणना के आधार पर लोकसभा में सीटें बढ़ाई जा सकें और 2029 के आम चुनाव में महिला आरक्षण को पूरी तरह प्रभावी बनाया जा सके।
विपक्ष के साथ संवाद और आम सहमति की कोशिश
इतने बड़े संवैधानिक बदलाव के लिए सरकार ने विपक्षी खेमे के साथ बातचीत शुरू कर दी है। गृह मंत्री अमित शाह ने महिला आरक्षण बिल में संशोधन को लेकर शिवसेना (यूबीटी) और एनसीपी (शरद पवार) जैसे विपक्षी दलों के नेताओं के साथ चर्चा की है। हालांकि कांग्रेस जैसी प्रमुख विपक्षी पार्टी और अन्य बड़े दलों के नेताओं के साथ बातचीत अभी बाकी है लेकिन शुरुआती दौर में छोटे और क्षेत्रीय विपक्षी दलों को भरोसे में लेने की कोशिश की जा रही है जिससे संसद के पटल पर इस बिल को निर्बाध रूप से पारित कराया जा सके।
यदि यह संशोधन पारित हो जाता है तो यह भारतीय संसदीय इतिहास का सबसे बड़ा बदलाव होगा जो महिलाओं की राजनीति में भागीदारी को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा। इससे न केवल संसद का स्वरूप पूरी तरह बदल जाएगा बल्कि 816 सदस्यों वाली यह सभा दुनिया की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक संस्थाओं में से एक होगी जहाँ एक तिहाई से अधिक शक्ति महिलाओं के हाथ में होगी। सरकार की इस पहल से लंबे समय से प्रतीक्षित महिला आरक्षण का रास्ता साफ होता नजर आ रहा है।
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