व्यापम घोटाला: पीएमटी-2011 में डमी कैंडिडेट बनकर परीक्षा देने वाले 12 दोषियों को 5-5 साल की सजा
इंदौर की सीबीआई कोर्ट ने पीएमटी-2011 व्यापम मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। दूसरे की जगह परीक्षा देने वाले 12 डमी उम्मीदवारों को दोषी ठहराते हुए 5 साल के कठोर कारावास और जुर्माने की सजा दी गई।
News Tv India हिंदी Official | Verified Expert • 27 Mar, 2026Editor
Dec 28, 2025 • 7:53 AM
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व्यापम घोटाला: पीएमटी-2011 में डमी कैंडिडेट बनकर परीक्षा देने वाले 12 दोषियों को 5-5 साल की सजा
इंदौर की सीबीआई कोर्ट ने पीएमटी-2011 व्यापम मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। दूसरे की जगह परीक्षा देने वाले 12 डमी उम्मीदवारों को दोषी ठहराते हुए 5 साल के कठोर कारावास और जुर्माने की सजा दी गई।
Full Story: https://www.newstvindia.in/vyapam-scam-12-convicts-sentenced-to-5-years-in-jail-for-appearing-as-dummy-candidates-in-pmt-2011
व्यापम घोटाला: पीएमटी-2011 में डमी कैंडिडेट बनकर परीक्षा देने वाले 12 दोषियों को 5-5 साल की सजा
इंदौर : मध्य प्रदेश की इंदौर सीबीआई कोर्ट ने शनिवार को पीएमटी-2011 परीक्षा (व्यापम घोटाला) में दूसरे के स्थान पर परीक्षा देने वाले 12 डमी उम्मीदवारों को दोषी पाते हुए उन्हें सजा सुनाई है। कोर्ट ने दोषियों को 5-5 साल के कठोर कारावास और प्रत्येक पर 6,000 रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई है।
जांच में यह स्पष्ट हुआ कि इन आरोपियों ने असली परीक्षार्थियों से मिलीभगत कर उनके स्थान पर अवैध रूप से परीक्षा दी थी। दोषियों में आशीष यादव उर्फ आशीष सिंह, सत्येंद्र वर्मा, धीरेंद्र तिवारी, बृजेश जायसवाल, दुर्गा प्रसाद यादव, राकेश कुर्मी, नरेंद्र चौरसिया, अभिलाष यादव, खूब चंद राजपूत, पवन राजपूत, लखन धनगर और सुंदरलाल धनगर शामिल हैं। अपराध के समय नाबालिग दीपक गौतम के मामले में किशोर न्याय बोर्ड द्वारा किशोर न्याय अधिनियम के तहत कार्रवाई की जा चुकी थी।
यह मामला इंदौर के सशक्त उत्कृष्ट विद्यालय के उप प्रधानाध्यापक की शिकायत से शुरू हुआ, जिसमें उन्होंने व्यापम द्वारा आयोजित मध्य प्रदेश पीएमटी-2011 परीक्षा के दौरान फर्जीवाड़े का पता लगाया था।
24 जुलाई 2011 को सत्येंद्र वर्मा को आशीष यादव उर्फ आशीष सिंह बनकर परीक्षा देते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया, जिसके बाद इंदौर के तुकोगंट पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया था। शुरुआत में राज्य पुलिस ने दो आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया। बाद में, भारत के सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर, मामले को पुनः पंजीकृत किया गया और सीबीआई द्वारा आगे की जांच की गई।
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सीबीआई की जांच में पता चला कि मध्य प्रदेश पीएमटी-2011 परीक्षा में फर्जी उम्मीदवारों को बिचौलियों के एक नेटवर्क के माध्यम से नियुक्त किया गया था। सीबीआई की जांच के दौरान यह बात सामने आई थी कि इन आरोपियों ने पहचान बदलकर और दस्तावेजों में हेराफेरी कर परीक्षा केंद्रों में प्रवेश पाया था। फर्जी उम्मीदवारों को इंदौर लाया गया, एक होटल में ठहराया गया, और उन्होंने जाली दस्तावेजों और प्रवेश पत्रों का उपयोग करके परीक्षा दी। दस्तावेजी साक्ष्य, होटल के रिकॉर्ड और जांच के दौरान हुए खुलासों ने उम्मीदवारों, फर्जी उम्मीदवारों और बिचौलियों की मिलीभगत वाली साजिश की पुष्टि की।
न्यायालय ने मुकदमे के बाद आरोपियों को दोषी ठहराया और सजा सुनाई। इस मामले में मिली सफलता व्यापम घोटाले पर की गई व्यापक कार्रवाई का हिस्सा है, जिसमें फर्जीवाड़े, जालसाजी और आपराधिक साजिश के माध्यम से प्रतियोगी परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर हेराफेरी शामिल है।