ईरान पर अमेरिका का बड़ा प्रहार: तेल निर्यात रोकने के लिए 14 जहाजों पर लगाए प्रतिबंध, भारतीय जहाज भी शामिल
ओमान में ईरान और अमेरिका के बीच हुई अप्रत्यक्ष वार्ता के सकारात्मक रहने के दावों के बीच, संयुक्त राज्य अमेरिका ने शुक्रवार को ईरान के विरुद्ध कड़ा रुख अपनाते हुए नए प्रतिबंधों की घोषणा की है।
नई दिल्ली : ओमान में ईरान और अमेरिका के बीच अप्रत्यक्ष वार्ता खत्म होने के कुछ ही घंटों बाद वॉशिंगटन ने तेहरान पर दबाव और बढ़ा दिया है। संयुक्त राज्य अमेरिका ने ईरान के तेल निर्यात पर शिकंजा कसते हुए नए प्रतिबंधों की घोषणा की है। अमेरिकी विदेश विभाग ने 14 ऐसे जहाजों को निशाना बनाया है, जो ईरानी तेल का परिवहन कर रहे थे। इनमें तुर्की, भारत और संयुक्त अरब अमीरात के ध्वज वाले जहाज भी शामिल हैं।
अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता टॉमी पिगोट ने कहा कि ईरान अपने तेल से होने वाली कमाई का इस्तेमाल वैश्विक अस्थिरता फैलाने और देश के भीतर दमन को बढ़ाने में कर रहा है। उन्होंने साफ कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने ‘मैक्सिमम प्रेशर’ अभियान के तहत ईरान के अवैध तेल और पेट्रोकेमिकल निर्यात को लगभग पूरी तरह खत्म करने के लिए प्रतिबंधों को और सख्त कर रहे हैं।
प्रतिबंधों का दायरा बढ़ा
नए फैसले के तहत अमेरिका ने इन 14 जहाजों के साथ किसी भी तरह के वित्तीय या कारोबारी लेन-देन पर पूरी तरह रोक लगा दी है। इसके साथ ही 15 संस्थाओं और दो व्यक्तियों को भी प्रतिबंध सूची में डाला गया है। अमेरिकी प्रशासन का दावा है कि ईरान का तेल निर्यात पहले ही काफी हद तक घट चुका है, लेकिन कुछ जहाज अब भी गुप्त तरीकों से तेल पहुंचाने में लगे हैं।
ओमान में हुई थी अप्रत्यक्ष बातचीत
इन प्रतिबंधों की टाइमिंग अहम मानी जा रही है, क्योंकि इससे कुछ ही समय पहले ओमान में ईरान के विदेश मंत्री और ट्रंप के वरिष्ठ दूतों के बीच अप्रत्यक्ष वार्ता हुई थी। ईरान के विदेश मंत्री ने बातचीत के बाद माहौल को “सकारात्मक” बताया था। यह वार्ता 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद ईरान में हुए सबसे बड़े विरोध प्रदर्शनों और उनके दमन की पृष्ठभूमि में हुई थी।
अमेरिका की सख्त चेतावनी
डोनाल्ड ट्रंप पहले भी ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की चेतावनी दे चुके हैं और फारस की खाड़ी में अमेरिकी नौसेना की मौजूदगी बढ़ाई गई है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि ये प्रतिबंध ईरान को उसके परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय अस्थिरता फैलाने वाली गतिविधियों से रोकने की रणनीति का हिस्सा हैं।
ईरान का जवाब
ईरान ने अमेरिकी प्रतिबंधों को ‘आर्थिक आतंकवाद’ करार दिया है और कहा है कि वह अपने तेल निर्यात को जारी रखेगा। जानकारों का मानना है कि नए प्रतिबंधों से ईरानी अर्थव्यवस्था पर दबाव और बढ़ेगा, खासकर ऐसे समय में जब वैश्विक तेल बाजार पहले से ही अस्थिर है। भारत और तुर्की जैसे देश, जो कभी ईरानी तेल के बड़े खरीदार रहे हैं, अब इन जहाजों से दूरी बना सकते हैं।