उत्तर प्रदेश: 68,236 कर्मचारियों का वेतन रोका जाएगा , संपत्ति विवरण नहीं जमा करने पर सख्त कार्रवाई
उत्तर प्रदेश में 68,236 सरकारी कर्मचारियों ने संपत्ति विवरण मानव संपदा पोर्टल पर अपलोड नहीं किया। सरकार ने 31 जनवरी की डेडलाइन के बाद वेतन रोकने के आदेश जारी किए। तृतीय श्रेणी में सबसे ज्यादा डिफॉल्टर, पारदर्शिता और भ्रष्टाचार रोकने के लिए सख्त कार्रवाई।
News Tv India हिंदी Official | Verified Expert • 27 Mar, 2026Editor
Feb 2, 2026 • 6:31 PM
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उत्तर प्रदेश: 68,236 कर्मचारियों का वेतन रोका जाएगा , संपत्ति विवरण नहीं जमा करने पर सख्त कार्रवाई
उत्तर प्रदेश में 68,236 सरकारी कर्मचारियों ने संपत्ति विवरण मानव संपदा पोर्टल पर अपलोड नहीं किया। सरकार ने 31 जनवरी की डेडलाइन के बाद वेतन रोकने के आदेश जारी किए। तृतीय श्रेणी में सबसे ज्यादा डिफॉल्टर, पारदर्शिता और भ्रष्टाचार रोकने के लिए सख्त कार्रवाई।
Full Story: https://www.newstvindia.in/uttar-pradesh-salary-of-68-236-employees-to-be-withheld-strict-action-to-be-taken-for-not-submitting-property-details
उत्तर प्रदेश: 68,236 कर्मचारियों का वेतन रोका जाएगा , संपत्ति विवरण नहीं जमा करने पर सख्त कार्रवाई
उत्तर प्रदेश सरकार के लाखों कर्मचारियों के लिए संपत्ति विवरण देना अब अनिवार्य हो गया है, लेकिन बड़ी संख्या में अभी भी कर्मचारी नियमों की अनदेखी कर रहे हैं. आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, प्रदेश के 68,236 राज्यकर्मियों ने अब तक अपनी चल और अचल संपत्ति का ब्योरा मानव संपदा पोर्टल पर अपलोड नहीं किया है.
राज्य सरकार ने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को 31 जनवरी तक अपनी संपत्ति का विवरण ऑनलाइन दर्ज करने के आदेश दिए थे. इस संबंध में मुख्य सचिव एस.पी. गोयल ने समयसीमा का सख्ती से पालन कराने के आदेश जारी किए थे. इसके बावजूद बड़ी संख्या में कर्मचारियों ने निर्देशों का पालन नहीं किया. अब सरकार ने इस लापरवाही पर कड़ा कदम उठाते हुए तय समय तक संपत्ति विवरण जमा नहीं करने वाले कर्मचारियों का वेतन रोकने के आदेश लागू कर दिए हैं.
वहीं, प्रशासन का कहना है कि पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखने के लिए यह कार्रवाई बहुत जरूरी है. विभागवार आंकड़ों के अनुसार सबसे अधिक 34,926 तृतीय श्रेणी कर्मचारी डिफॉल्टर सूची में शामिल हैं. इसके अलावा 22,624 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी, 7,204 द्वितीय श्रेणी कर्मचारी और 2,628 प्रथम श्रेणी अधिकारी अब तक अपना संपत्ति विवरण जमा नहीं कर पाए हैं. प्रशासनिक स्तर पर इसे गंभीर और चिंताजनक स्थिति माना जा रहा है.
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सरकारी सूत्रों का कहना है कि संपत्ति का वार्षिक विवरण देना सेवा नियमों के तहत अनिवार्य है. इससे कर्मचारियों की आय और संपत्ति में पारदर्शिता बनी रहती है और भ्रष्टाचार पर नियंत्रण में मदद मिलती है. अधिकारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि आदेशों की अवहेलना करने वालों के खिलाफ वेतन रोकने के अलावा विभागीय कार्रवाई भी की जा सकती है. अब देखना यह होगा कि सख्ती के बाद कितने कर्मचारी जल्द से जल्द पोर्टल पर अपना विवरण अपडेट करते हैं.
संपत्ति विवरण न देने पर वेतन रोका जाएगा
सरकारी सूत्रों के अनुसार, सेवा नियमों के तहत कर्मचारियों के लिए संपत्ति का वार्षिक विवरण देना अनिवार्य है. इससे आय और संपत्ति में पारदर्शिता बनी रहती है और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने में सहायता मिलती है. अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि निर्देशों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ वेतन रोकने के साथ-साथ विभागीय कार्रवाई भी की जा सकती है. अब यह देखना होगा कि सख्ती के बाद कितने कर्मचारी जल्द पोर्टल पर अपना विवरण साझा करते हैं.