Punjab Congress Rally: "मनरेगा बचाओ संग्राम" से गूंजा पंजाब! राजा वड़िंग और भूपेश बघेल ने केंद्र-राज्य को घेरा; जानें क्या है 'VB G RAM G' कानून का विवाद
पंजाब कांग्रेस ने मनरेगा योजना को खत्म करने के खिलाफ 'मनरेगा बचाओ संग्राम' रैली आयोजित की। पूर्व सीएम भूपेश बघेल और राजा वड़िंग ने केंद्र सरकार के नए 'विकसित भारत-जी राम जी' कानून को गरीबों का अधिकार छीनने वाला बताया। जानें क्यों पंजाब के ग्रामीण इलाकों में इस योजना को लेकर उबाल है।
News Tv India हिंदी Official | Verified Expert • 27 Mar, 2026Editor
Jan 13, 2026 • 3:27 PM
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Punjab Congress Rally: "मनरेगा बचाओ संग्राम" से गूंजा पंजाब! राजा वड़िंग और भूपेश बघेल ने केंद्र-राज्य को घेरा; जानें क्या है 'VB G RAM G' कानून का विवाद
पंजाब कांग्रेस ने मनरेगा योजना को खत्म करने के खिलाफ 'मनरेगा बचाओ संग्राम' रैली आयोजित की। पूर्व सीएम भूपेश बघेल और राजा वड़िंग ने केंद्र सरकार के नए 'विकसित भारत-जी राम जी' कानून को गरीबों का अधिकार छीनने वाला बताया। जानें क्यों पंजाब के ग्रामीण इलाकों में इस योजना को लेकर उबाल है।
Full Story: https://www.newstvindia.in/punjab-congress-rally-punjab-resonates-with-mgnrega-bachao-sangram-raja-warring-and-bhupesh-baghel-surround-centre-state-know-what-is-vb-g-ram-g-law-dispute
Punjab Congress Rally: "मनरेगा बचाओ संग्राम" से गूंजा पंजाब! राजा वड़िंग और भूपेश बघेल ने केंद्र-राज्य को घेरा; जानें क्या है 'VB G RAM G' कानून का विवाद
चंडीगढ़। पंजाब में कांग्रेस पार्टी द्वारा आयोजित “मनरेगा बचाओ रैली” ने एक बार फिर प्रदेश की राजनीति को गरमा दिया है। रैली में बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता, ग्रामीण मजदूर, किसान और स्थानीय नेता शामिल हुए। प्रदर्शन के दौरान केंद्र और राज्य सरकार पर महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) को कमजोर करने के आरोप लगाए गए।
रैली को संबोधित करते हुए कांग्रेस नेताओं ने कहा कि मनरेगा गरीब, मजदूर और ग्रामीण परिवारों के लिए जीवनरेखा है। इस योजना के जरिए हर साल करोड़ों लोगों को न्यूनतम रोजगार मिलता है, जिससे उनकी आजीविका चलती है और ग्रामीण इलाकों से पलायन पर भी रोक लगती है।
कांग्रेस का आरोप है कि मौजूदा सरकार मनरेगा के बजट में कटौती कर रही है और काम के दिनों में कमी लाई जा रही है। कई जिलों में मजदूरों को समय पर मजदूरी नहीं मिल रही, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति और खराब हो रही है।
एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने कहा कि मनरेगा केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि गरीबों की उम्मीद है। यदि इसे कमजोर किया गया तो लाखों परिवार बेरोजगारी और भुखमरी की ओर धकेल दिए जाएंगे। उन्होंने यह भी दावा किया कि कागजों में रोजगार दिखाया जा रहा है, जबकि जमीनी स्तर पर कई गांवों में काम उपलब्ध नहीं है।
रैली में दिखा आक्रोश
प्रदर्शन में शामिल लोगों ने हाथों में पोस्टर और बैनर लेकर “मनरेगा बचाओ”, “गरीबों का हक मत छीनो” और “रोजगार दो, राजनीति नहीं” जैसे नारे लगाए। ग्रामीण महिलाओं और मजदूरों ने कहा कि मनरेगा से मिलने वाली मजदूरी उनके परिवार का मुख्य सहारा है, जिससे बच्चों की पढ़ाई, इलाज और रोजमर्रा की जरूरतें पूरी होती हैं।
चुनावी रणनीति या जनहित का मुद्दा
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि रैली का समय आगामी चुनावों से जुड़ा हुआ है। कांग्रेस मनरेगा जैसे जनसरोकार के मुद्दे को उठाकर ग्रामीण वोट बैंक को साधने की कोशिश कर रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह योजना सीधे आम जनता से जुड़ी है, इसलिए इसे लेकर राजनीति प्रभावी मानी जाती है।
सरकार ने आरोपों को किया खारिज
वहीं राज्य सरकार ने कांग्रेस के आरोपों को नकारते हुए कहा कि मनरेगा में किसी तरह की कटौती नहीं की जा रही है। सरकार का दावा है कि योजना को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाया जा रहा है।
सरकारी प्रवक्ता के अनुसार, मनरेगा को डिजिटल किया गया है ताकि भ्रष्टाचार रुके और मजदूरी सीधे मजदूरों के खातों में पहुंचे। सरकार ने यह भी कहा कि इस वर्ष लाखों परिवारों को योजना के तहत रोजगार दिया गया है और आगे और काम उपलब्ध कराया जाएगा।
जमीनी हकीकत पर सवाल
हालांकि, ग्रामीण इलाकों से आ रही रिपोर्टें मिली-जुली तस्वीर पेश कर रही हैं। कुछ जगहों पर मजदूरों को काम न मिलने और भुगतान में देरी की शिकायतें सामने आ रही हैं, जिससे सरकार और विपक्ष के दावों के बीच अंतर साफ नजर आता है।
मनरेगा को लेकर यह विवाद आने वाले दिनों में और तेज हो सकता है। कांग्रेस जहां इसे जनआंदोलन का रूप देने की तैयारी में है, वहीं सरकार अपनी नीतियों और दावों को सही ठहराने में जुटी हुई है।