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रायपुर: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने 'बस्तर पंडुम 2025' के लोगो का किया अनावरण, बस्तर की संस्कृति को मिलेगा वैश्विक मंच
छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान और लोकजीवन को बढ़ावा देने के लिए बस्तर पंडुम 2025 का आयोजन किया जा रहा है। इस महोत्सव के लिए आधिकारिक लोगो का अनावरण मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने विधानसभा परिसर में किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि बस्तर के लोगों की खुशी और उत्सवधर्मिता को सहेजने के लिए यह आयोजन एक महत्वपूर्ण कदम है।
News Tv India हिंदी Official | Verified Expert • 27 Mar, 2026Editor
Mar 13, 2025 • 7:23 AM
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रायपुर: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने 'बस्तर पंडुम 2025' के लोगो का किया अनावरण, बस्तर की संस्कृति को मिलेगा वैश्विक मंच
छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान और लोकजीवन को बढ़ावा देने के लिए बस्तर पंडुम 2025 का आयोजन किया जा रहा है। इस महोत्सव के लिए आधिकारिक लोगो का अनावरण मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने विधानसभा परिसर में किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि बस्तर के लोगों की खुशी और उत्सवधर्मिता को सहेजने के लिए यह आयोजन एक महत्वपूर्ण कदम है।
Full Story: https://www.newstvindia.in/raipur-chief-minister-vishnu-dev-sai-unveils-the-logo-of-bastar-pandum-2025-bastar-s-culture-will-get-a-global-platform
रायपुर: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने 'बस्तर पंडुम 2025' के लोगो का किया अनावरण, बस्तर की संस्कृति को मिलेगा वैश्विक मंच
छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान और लोकजीवन को बढ़ावा देने के लिएबस्तर पंडुम 2025का आयोजन किया जा रहा है। इस महोत्सव के लिए आधिकारिक लोगो का अनावरण मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने विधानसभा परिसर में किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि बस्तर के लोगों की खुशी और उत्सवधर्मिता को सहेजने के लिए यह आयोजन एक महत्वपूर्ण कदम है।
बस्तर पंडुम 2025: सांस्कृतिक विरासत को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का प्रयास
बस्तर के लोगो अपने जीवन को उत्सव की तरह जीते हैं। उनकी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और लोकसंस्कृति को बढ़ावा देने के लिएबस्तर पंडुम 2025का आयोजन किया जा रहा है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि यह आयोजन न केवल बस्तर की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करेगा, बल्कि युवा पीढ़ी को इससे जोड़ने का भी काम करेगा।
बस्तर पंडुम का लोगो: बस्तर की सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक
बस्तर पंडुमके लोगो में बस्तर के लोकजीवन को जीवंत रूप में प्रदर्शित किया गया है। इसमें इंद्रावती नदी, चित्रकूट जलप्रपात, वनभैंसा, पहाड़ी मैना, बायसन हॉर्न मुकुट, तुरही, ढोल, सल्फी और ताड़ी के पेड़ जैसे प्रतीकों को शामिल किया गया है। यह लोगो बस्तर की सादगी, सहजता और उम्मीदों को दर्शाता है।
बस्तर पंडुम 2025: नृत्य, गीत और लोककला का अनूठा संगम
बस्तर पंडुम 2025में नृत्य, गीत, लोककला, नाट्य, शिल्प, रीति-रिवाज और पारंपरिक व्यंजनों से जुड़ी प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। यह आयोजन तीन चरणों में होगा:
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संभाग स्तरीय प्रतियोगिता: 1 से 3 अप्रैल (दंतेवाड़ा)
प्रत्येक स्तर पर विजेताओं को पुरस्कार और प्रमाण पत्र प्रदान किए जाएंगे।
बस्तर का विकास: सरकार की प्राथमिकता
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि बस्तर का विकास और वहां के लोगों को मुख्य धारा से जोड़ना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि बस्तर को माओवाद से मुक्त करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ाए गए हैं। हाल ही में आयोजितबस्तर ओलंपिकऔरअबूझमाड़ पीस हॉफ मैराथनमें बस्तर वासियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, जो क्षेत्र में शांति और विकास की ओर बढ़ते कदमों को दर्शाता है।
बस्तर पंडुम 2025: लोकजीवन और परंपराओं का प्रदर्शन
इस आयोजन में बस्तर की पारंपरिक नृत्य-शैली, गीत, वेशभूषा, आभूषण और व्यंजनों का शानदार प्रदर्शन होगा। प्रतियोगिताओं में प्रतिभागियों को मौलिकता, पारंपरिकता और प्रस्तुति के आधार पर अंक दिए जाएंगे। आयोजन में समाज प्रमुखों, जनप्रतिनिधियों और वरिष्ठ नागरिकों को विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित किया जाएगा।
बस्तर पंडुम 2025: पारदर्शिता और न्याय सुनिश्चित करने के लिए विशेष समिति
प्रतियोगिता के विजेताओं के चयन के लिए एक विशेष समिति बनाई गई है, जिसमें प्रशासनिक अधिकारियों के साथ-साथ आदिवासी समाज के वरिष्ठ मुखिया, पुजारी और अनुभवी कलाकार शामिल हैं। इससे प्रतियोगिता में पारदर्शिता बनी रहेगी और पारंपरिक लोककला को न्याय मिलेगा।
बस्तर पंडुम 2025बस्तर की सांस्कृतिक विरासत और लोकजीवन को एक नई पहचान देने का प्रयास है। यह आयोजन न केवल बस्तर के प्रतिभाशाली कलाकारों को एक मंच प्रदान करेगा, बल्कि इस क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दुनिया के सामने लाने का भी काम करेगा।
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