मालेरकोटला में गूंजी नामधारी शहीदों की गाथा: कैबिनेट मंत्री मुंडियां ने दी श्रद्धांजलि, कहा- 'कुर्बानियों से मिली आजादी की नींव'
पंजाब के कैबिनेट मंत्री हरदीप सिंह मुंडियां ने मालेरकोटला में 66 नामधारी शहीदों को नमन किया। जानें कैसे नामधारी संप्रदाय ने देश की आजादी और मानवीय मूल्यों के लिए दिया सर्वोच्च बलिदान।
मालेरकोटला: भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में नामधारी संप्रदाय के अतुलनीय योगदान को याद करते हुए पंजाब सरकार द्वारा मालेरकोटला स्थित शहीदी स्मारक में राज्य स्तरीय शहीदी समागम का आयोजन किया गया। इस गौरवमयी समारोह में पंजाब के कैबिनेट मंत्री हरदीप सिंह मुंडियां ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की और 66 नामधारी शहीद सिंहों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
आजादी की लड़ाई में नामधारी संप्रदाय का स्वर्ण युग
श्री सतगुरु उदय सिंह जी की रहनुमाई में आयोजित इस समागम को संबोधित करते हुए मंत्री मुंडियां ने कहा कि देश की आजादी, धर्म और मानवीय मूल्यों की रक्षा के लिए नामधारी संप्रदाय द्वारा दी गई कुर्बानियां इतिहास के पन्नों में हमेशा सुनहरे अक्षरों में चमकती रहेंगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि श्री सतगुरु राम सिंह जी द्वारा शुरू किया गया अहिंसा और असहयोग आंदोलन ही वह चिंगारी थी, जिसने अंग्रेजी हुकूमत की जड़ों को हिला दिया था।
सादगी और त्याग की मिसाल है यह संप्रदाय
कैबिनेट मंत्री ने कहा, "नामधारी संप्रदाय सादगी, सच्चाई और विनम्रता का प्रतीक है। मालेरकोटला की यह पवित्र धरती गवाह है कि कैसे निहत्थे सिंहों ने तोपों के सामने खड़े होकर शहादत दी, लेकिन झुकना स्वीकार नहीं किया।" उन्होंने आगे कहा कि आज की युवा पीढ़ी को इन महान शहीदों के जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए ताकि एक ईमानदार और सेवाभावी समाज का निर्माण हो सके।
'रंगला पंजाब' बनाने का आह्वान
मुंडियां ने संगत से अपील की कि वे गुरुओं के दिखाए मार्ग पर चलते हुए पंजाब को फिर से 'रंगला पंजाब' बनाने में अपना सक्रिय योगदान दें। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि पंजाब सरकार नामधारी संप्रदाय की सेवा के लिए सदैव तत्पर है।
प्रमुख हस्तियों की उपस्थिति
इस अवसर पर अमरगढ़ के विधायक प्रो. जसवंत सिंह गज्जनमाजरा, विधायक डॉ. जमील उर रहमान, और समराला के विधायक जगतार सिंह दियालपुर सहित प्रशासन के आला अधिकारी मौजूद रहे। डिप्टी कमिश्नर विराज एस. तिडक़े और जिला पुलिस प्रमुख गगन अजीत सिंह ने भी शहीदों को नमन किया। अंत में समूह संगत ने शहीदों के पदचिह्नों पर चलने का सामूहिक संकल्प लिया।