कानपुर में बड़ा एक्शन! फिजिक्स वाला समेत 22 कोचिंग संस्थान सील, छात्रों की सुरक्षा पर प्रशासन सख्त
कानपुर कोचिंग सील (Kanpur Coaching Seal) अभियान के तहत केडीए ने काकादेव क्षेत्र में बड़ी कार्रवाई करते हुए फिजिक्स वाला समेत 22 कोचिंग संस्थानों को सील कर दिया। भवन और सुरक्षा मानकों में खामियां मिलने के बाद यह कदम उठाया गया है।
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ का पॉश इलाका अलीगंज एक दर्दनाक हादसे के बाद शोक में डूबा हुआ है। यहां एक इमारत में लगी भीषण आग में 15 बच्चों की मौत हो गई। हादसे के बाद जब राहत और बचाव दल ने अंदर पहुंचकर हालात का जायजा लिया, तो कई ऐसी बातें सामने आईं, जिन्होंने सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्रारंभिक जांच में पता चला है कि आवासीय उपयोग के लिए बनी इस इमारत का इस्तेमाल व्यावसायिक गतिविधियों के लिए किया जा रहा था। भवन में गेमिंग जोन, एनीमेशन सेंटर, पेट शॉप और अन्य प्रतिष्ठान संचालित किए जा रहे थे।
2016 में जारी हुआ था ध्वस्तीकरण आदेश
Lucknow Aliganj Fire के बाद सामने आए दस्तावेजों के अनुसार, वर्ष 2016 में अवैध निर्माण के आरोपों के चलते इस इमारत के खिलाफ ध्वस्तीकरण का आदेश जारी किया गया था। हालांकि, दो महीने के भीतर ही यह आदेश निरस्त कर दिया गया।
अब हादसे के बाद यह सवाल उठ रहे हैं कि जब भवन में अनियमितताओं की जानकारी पहले से थी, तो उसके बाद क्या कार्रवाई हुई और आदेश वापस लेने के पीछे क्या वजह थी।
बायोमेट्रिक लॉक सिस्टम ने बढ़ाई मुश्किलें
पीड़ित परिवारों के अनुसार, भवन के मुख्य प्रवेश द्वार पर ऑटोमैटिक बायोमेट्रिक लॉक सिस्टम लगा हुआ था। यह गेट अंगूठे के निशान के जरिए खुलता और बंद होता था।
बताया जा रहा है कि आग लगने के बाद बिजली आपूर्ति बाधित हो गई, जिससे लॉकिंग सिस्टम ने काम करना बंद कर दिया। ऐसे में अंदर मौजूद लोगों के लिए बाहर निकलना बेहद मुश्किल हो गया।
परिजनों ने यह भी आरोप लगाया है कि सूचना दिए जाने के काफी देर बाद दमकल की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। हालांकि, इस पूरे मामले की जांच जारी है।
बाहर निकलने का दूसरा रास्ता नहीं था
इमारत के चारों ओर अन्य मकान होने के कारण बाहर निकलने के वैकल्पिक रास्ते सीमित थे। आग सामने के हिस्से में फैलने के बाद कई लोग पीछे की ओर भागे और जान बचाने की कोशिश करने लगे।
कुछ लोगों ने पाइप और तारों के सहारे नीचे उतरने की कोशिश की। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, एक युवक ने खिड़की का शीशा तोड़कर बाहर निकलने का प्रयास किया, लेकिन गंभीर रूप से घायल हो गया।
धुएं से दम घुटने से गई कई जानें
जैसे-जैसे आग और धुआं बढ़ता गया, कई बच्चे खुद को बचाने के लिए बाथरूम में चले गए। उन्होंने पानी चलाकर गर्मी से बचने की कोशिश की, लेकिन पर्याप्त वेंटिलेशन नहीं होने के कारण धुआं तेजी से अंदर भर गया।
जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि मौतों की प्रमुख वजह आग थी या धुएं के कारण दम घुटना।
फायर सेफ्टी के इंतजाम नहीं मिले
अग्निशमन विभाग की शुरुआती जांच में सामने आया है कि भवन में स्मोक डिटेक्टर और आग बुझाने वाले उपकरण पर्याप्त संख्या में मौजूद नहीं थे। इसके अलावा आपातकालीन निकास व्यवस्था को लेकर भी गंभीर सवाल उठे हैं।
दमकल कर्मियों को अंदर पहुंचने के लिए पड़ोसी भवनों की दीवारें तोड़नी पड़ीं। काफी मशक्कत के बाद राहत और बचाव अभियान चलाया गया।
सरकार का बड़ा एक्शन
Lucknow Aliganj Fire मामले में उत्तर प्रदेश सरकार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए चार अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। वहीं, भवन के मालिक को गिरफ्तार कर लिया गया है।
सरकार ने पूरे मामले की विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं। माना जा रहा है कि जांच के दौरान भवन की स्वीकृतियों, सुरक्षा मानकों और पूर्व में हुई प्रशासनिक कार्रवाइयों से जुड़े सभी रिकॉर्ड की भी समीक्षा की जाएगी।
यह हादसा एक बार फिर इस बात की याद दिलाता है कि भवन सुरक्षा मानकों और नियमित निरीक्षण में किसी भी तरह की लापरवाही कितनी बड़ी त्रासदी का कारण बन सकती है।
कानपुर : लखनऊ में हाल ही में सामने आए कोचिंग संस्थान से जुड़े हादसे के बाद उत्तर प्रदेश में प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में है। इसी कड़ी में कानपुर विकास प्राधिकरण (केडीए) ने शहर के सबसे बड़े कोचिंग हब काकादेव में व्यापक जांच अभियान चलाते हुए बड़ा कदम उठाया है। जांच के दौरान नियमों के उल्लंघन पाए जाने पर फिजिक्स वाला समेत 22 कोचिंग संस्थानों को सील कर दिया गया।
इस कार्रवाई के बाद शहर के शिक्षा जगत में हलचल तेज हो गई है। छात्रों और अभिभावकों के बीच भी इस फैसले को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।