नशों के खिलाफ पंजाब का 'सॉफ्ट पावर' एक्शन: सिर्फ गिरफ्तारी नहीं, अब रोजगार और सम्मान के साथ मुख्यधारा में लौट रहे हैं युवा
मुख्यमंत्री भगवंत मान के ‘युद्ध नशों विरुद्ध’ अभियान ने अब एक नया रूप ले लिया है। सरकार केवल तस्करी के नेटवर्क को ही नहीं तोड़ रही, बल्कि नशे की गिरफ्त में फंसे युवाओं को काउंसलिंग, उपचार और सरकारी सहायता से रोजगार दिलाकर उनके जीवन में स्थिरता और नया उद्देश्य वापस ला रही है।
चंडीगढ़: पंजाब में नशों के खिलाफ जारी जंग अब एक निर्णायक और सकारात्मक मोड़ पर पहुंच गई है। राज्य की 'आप' सरकार ने अपनी रणनीति को बदलते हुए अब पुनर्वास और पुनः एकीकरण पर विशेष ध्यान केंद्रित किया है। सरकार का मानना है कि नशे के जाल को पूरी तरह खत्म करने के लिए पीड़ितों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना और उन्हें आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनाना अनिवार्य है।
बदलाव की कहानियाँ और 'स्वाद' से बर्बादी तक का सफर
कॉलेज के दिनों में शौक के तौर पर नशा शुरू करने वाले जुगराज सिंह (बदला हुआ नाम) की कहानी उन हजारों युवाओं का प्रतिनिधित्व करती है जो साथियों के दबाव में भटक गए थे। जुगराज बताते हैं कि जो शुरुआत केवल एक 'स्वाद' के लिए हुई थी, वह कब जानलेवा निर्भरता में बदल गई, पता ही नहीं चला। आज, पंजाब सरकार की काउंसलिंग और पुनर्वास सेवाओं के समर्थन से जुगराज न केवल नशे से मुक्त हैं, बल्कि अपनी अधूरी पढ़ाई पूरी कर एक बेहतर भविष्य की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। उनका कहना है कि अब उन्हें महसूस होता है कि वे एक नए और बेहतर इंसान बन गए हैं।
आर्थिक तबाही से उबरने का सहारा और आनंद की वापसी
नशा न केवल स्वास्थ्य बल्कि व्यक्ति की निर्णय लेने की क्षमता और आर्थिक स्थिति को भी पूरी तरह नष्ट कर देता है। आनंद कुमार (बदला हुआ नाम) इसका जीता-जागता उदाहरण हैं, जिनका फलता-फूलता छोटा व्यवसाय नशे की लत के कारण बंद हो गया था। आनंद के लिए सरकारी पुनर्वास केंद्र का उपचार और उसके बाद मिला रोजगार का अवसर गेमचेंजर साबित हुआ। उनका कहना है कि काम मिलने से न केवल वित्तीय स्थिरता आई, बल्कि जीवन जीने का उद्देश्य भी बहाल हुआ।
सामाजिक गरिमा की बहाली और बलविंदर का संघर्ष
इसी तरह, एक पूर्व व्यापारी बलविंदर सिंह (बदला हुआ नाम) ने अपनी सामाजिक स्थिति और स्वास्थ्य दोनों खो दिए थे। शुरुआत में जो नशा आनंददायक लगता था, उसने धीरे-धीरे उनके परिवार और व्यापार को तबाह कर दिया। लेकिन आज, सुधार के रास्ते पर चलते हुए वे अपने भविष्य को फिर से संवारने में जुटे हैं। भगवंत मान सरकार की इस मुहिम की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह उपचार, काउंसलिंग, पारिवारिक सहायता और रोजगार जैसे मजबूत स्तंभों पर टिकी है।
स्थिर नौकरी और नशे को रोकने का अचूक हथियार
अनुभव बताते हैं कि नशे की लत को दोबारा लगने से रोकने में वित्तीय स्वतंत्रता सबसे बड़ी भूमिका निभाती है। एक स्थिर नौकरी न केवल व्यक्ति को व्यस्त रखती है, बल्कि उसके भीतर अनुशासन, गौरव और सामाजिक स्वीकृति की भावना को दोबारा जगाती है। आनंद का अनुभव है कि काम मन को केंद्रित रखता है और यह आगे बढ़ने में मदद करता है। पंजाब सरकार का यह ढांचागत बदलाव इस बात का प्रमाण है कि यदि सही दिशा और समर्थन मिले, तो अंधेरे रास्तों पर भटके युवा भी समाज के लिए प्रेरणा बन सकते हैं।