झारखंड पेसा नियमावली पर सियासी घमासान: चंपई सोरेन ने बताया 'धोखा', कांग्रेस ने कहा- ऐतिहासिक कदम
झारखंड में 25 साल बाद लागू हुए पेसा (PESA) कानून पर बीजेपी और कांग्रेस आमने-सामने हैं। चंपई सोरेन ने इसे आदिवासियों के अधिकारों पर चोट बताया है, तो वहीं कांग्रेस ने इसे स्वशासन की दिशा में एक बड़ी जीत करार दिया है। जानें क्या है पूरा विवाद।
रांची : झारखंड में 25 वर्षों बाद लागू की गई पेसा (पंचायत एक्सटेंशन टू शेड्यूल्ड एरिया एक्ट) नियमावली को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला तेज हो गया है। एक ओर भाजपा नेता और पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन ने इसे आदिवासी समाज के साथ धोखा करार दिया है, वहीं कांग्रेस ने आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए इसे आदिवासी स्वशासन की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया है। दोनों दलों के नेताओं ने मंगलवार को अलग-अलग संवाददाता सम्मेलनों में एक-दूसरे पर तीखे आरोप लगाए।
भाजपा नेता चंपई सोरेन ने कहा कि पेसा कानून का उद्देश्य अनुसूचित क्षेत्रों में आदिवासी समाज के पारंपरिक अधिकारों और स्वशासन की रक्षा करना था, लेकिन राज्य सरकार ने नियमावली बनाते समय उसकी मूल भावना को ही कमजोर कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि नियमावली के पहले पन्ने से ही रूढ़ि प्रथा को हटाकर आदिवासी समाज की परंपरागत व्यवस्था और अधिकारों पर चोट पहुंचाई गई है।