वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिमों की भूमिका: अमित शाह ने दी सफाई, विपक्ष पर लगाए गलतफहमी फैलाने के आरोप
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को वक्फ (संशोधन) विधेयक पर चर्चा के दौरान वक्फ बोर्ड (Waqf Board) में गैर-मुस्लिमों को शामिल करने के मुद्दे पर स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि इस विधेयक को लेकर विपक्ष द्वारा भ्रांतियां फैलाई जा रही हैं, जिसका मकसद अल्पसंख्यकों में डर पैदा करना और वोट बैंक की राजनीति करना है।
नई दिल्ली : केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को वक्फ (संशोधन) विधेयक पर चर्चा के दौरान वक्फ बोर्ड (Waqf Board) में गैर-मुस्लिमों को शामिल करने के मुद्दे पर स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि इस विधेयक को लेकर विपक्ष द्वारा भ्रांतियां फैलाई जा रही हैं, जिसका मकसद अल्पसंख्यकों में डर पैदा करना और वोट बैंक की राजनीति करना है। शाह ने जोर देकर कहा कि गैर-मुस्लिम सदस्यों की धार्मिक मामलों में कोई भूमिका नहीं होगी।
वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम क्यों शामिल?
अमित शाह ने वक्फ बोर्ड (Waqf Board) के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह व्यवस्था 1995 में अस्तित्व में आई थी। उन्होंने कहा, "गैर-मुस्लिमों को शामिल करने का फैसला वक्फ के प्रशासन को पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए लिया गया है। यह धार्मिक हस्तक्षेप का सवाल ही नहीं है।" शाह ने स्पष्ट किया कि गैर-मुस्लिम सदस्य काउंसिल और बोर्ड का हिस्सा होंगे, लेकिन उनका काम केवल प्रशासनिक निगरानी तक सीमित रहेगा।