16वां भारत-ईयू शिखर सम्मेलन: 'सभी समझौतों की जननी' की होगी घोषणा, भारतीय बाजार में आएगा व्यापारिक सैलाब
16वें भारत-ईयू शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी और यूरोपीय नेताओं के बीच ऐतिहासिक FTA डील। आयात शुल्क 110% से घटकर 40% होने की उम्मीद, जानें आम आदमी और व्यापार पर क्या होगा असर।
News Tv India हिंदी Official | Verified Expert • 27 Mar, 2026Editor
Jan 27, 2026 • 10:44 AM
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16वां भारत-ईयू शिखर सम्मेलन: 'सभी समझौतों की जननी' की होगी घोषणा, भारतीय बाजार में आएगा व्यापारिक सैलाब
16वें भारत-ईयू शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी और यूरोपीय नेताओं के बीच ऐतिहासिक FTA डील। आयात शुल्क 110% से घटकर 40% होने की उम्मीद, जानें आम आदमी और व्यापार पर क्या होगा असर।
Full Story: https://www.newstvindia.in/16th-india-eu-summit-mother-of-all-agreements-to-be-announced-business-to-enter-indian-market
16वां भारत-ईयू शिखर सम्मेलन: 'सभी समझौतों की जननी' की होगी घोषणा, भारतीय बाजार में आएगा व्यापारिक सैलाब
नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार को राष्ट्रीय राजधानी में 16वें भारत-यूरोपीय संघ (ईयू) शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेंगे, जिसमें यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा भारत और ईयू के बीच अब तक के सबसे बड़े व्यापार समझौते की घोषणा करेंगे, जिसे 'सभी समझौतों की जननी' कहा जा रहा है।
वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल के अनुसार, भारत और यूरोपीय संघ के बीच लंबे समय से चल रही मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) की बातचीत पूरी हो चुकी है। इस समझौते के पूरा होने की आधिकारिक घोषणा 16वें भारत-ईयू शिखर सम्मेलन में की जाएगी।
यह शिखर सम्मेलन भारत और ईयू की रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने का मौका देगा। इसके तहत व्यापार, सुरक्षा और रक्षा, स्वच्छ ऊर्जा और लोगों के आपसी सहयोग जैसे अहम क्षेत्रों में सहयोग मजबूत किया जाएगा।
अधिकारियों के मुताबिक, समझौते पर कानूनी जांच (लीगल स्क्रबिंग) के बाद करीब छह महीने में हस्ताक्षर किए जाएंगे। इसके बाद यह समझौता अगले साल से लागू होने की उम्मीद है।
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राजेश अग्रवाल ने इस समझौते को संतुलित और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखने वाला बताया। उन्होंने कहा कि इससे भारत और ईयू के बीच आर्थिक सहयोग बढ़ेगा और व्यापार व निवेश को नई गति मिलेगी।
भारत-ईयू फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को भारत के वैश्विक व्यापार को बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। यह समझौता अमेरिका के ऊंचे टैरिफ के असर को कम करने में भी मदद कर सकता है, क्योंकि इससे यूरोपीय बाजार में भारतीय उत्पादों को ज्यादा अवसर मिलेंगे। खासकर कपड़ा और आभूषण जैसे उत्पादों को फायदा हो सकता है।
इस समझौते का एक बड़ा असर ऑटोमोबाइल सेक्टर पर पड़ेगा। इसके तहत यूरोप की कार कंपनियों के लिए भारतीय बाजार खोला जाएगा। अभी यूरोपीय कारों पर 110 प्रतिशत आयात शुल्क लगता है, जिसे घटाकर करीब 40 प्रतिशत किया जा सकता है। इससे फॉक्सवैगन, मर्सिडीज-बेंज और बीएमडब्ल्यू जैसी कंपनियों की कारें भारत में सस्ती हो सकती हैं।
फिलहाल, भारत में हर साल बिकने वाली 44 लाख कारों में से यूरोपीय कंपनियों की हिस्सेदारी केवल 4 प्रतिशत है।
यूरोपीय संघ पहले से ही भारत का एक बड़ा व्यापारिक साझेदार है। भारत के कुल निर्यात में ईयू की हिस्सेदारी करीब 17 प्रतिशत है, जबकि ईयू के कुल विदेशी निर्यात में भारत की हिस्सेदारी लगभग 9 प्रतिशत है।
वित्त वर्ष 2024-25 में भारत और ईयू के बीच वस्तुओं का कुल व्यापार 136.53 अरब डॉलर रहा। इसमें भारत का निर्यात 75.85 अरब डॉलर और आयात 60.68 अरब डॉलर रहा। इस तरह ईयू भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बन गया।
इसके अलावा, सेवाओं का व्यापार भी दोनों के बीच 2024 में 83.10 अरब डॉलर तक पहुंच गया।