पश्चिम एशिया संकट: पीएम मोदी ने बुलाई हाई-लेवल मीटिंग, ईंधन और गैस आपूर्ति की तैयारियों की समीक्षा
पश्चिम एशिया में गहराते तनाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। बैठक का मुख्य एजेंडा देश में कच्चे तेल, एलपीजी और प्राकृतिक गैस की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना और जमाखोरी को रोकना रहा।
News Tv India हिंदी Official | Verified Expert • 27 Mar, 2026Editor
Mar 23, 2026 • 7:41 AM
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पश्चिम एशिया संकट: पीएम मोदी ने बुलाई हाई-लेवल मीटिंग, ईंधन और गैस आपूर्ति की तैयारियों की समीक्षा
पश्चिम एशिया में गहराते तनाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। बैठक का मुख्य एजेंडा देश में कच्चे तेल, एलपीजी और प्राकृतिक गैस की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना और जमाखोरी को रोकना रहा।
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पश्चिम एशिया संकट: पीएम मोदी ने बुलाई हाई-लेवल मीटिंग, ईंधन और गैस आपूर्ति की तैयारियों की समीक्षा
नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और भू-राजनीतिक अस्थिरता के बीच भारत सरकार पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को एक महत्वपूर्ण उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें देश की ईंधन, ऊर्जा और आवश्यक संसाधनों की वर्तमान स्थिति की गहन समीक्षा की गई। इस बैठक में पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, बिजली और उर्वरक जैसे प्रमुख मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
रणनीतिक समीक्षा: आपूर्ति श्रृंखला को बनाए रखना प्राथमिकता
बैठक का प्राथमिक उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि वैश्विक तनाव के बावजूद भारत की 'सप्लाई चेन' में कोई रुकावट न आए। प्रधानमंत्री को वर्तमान स्टॉक, आयात पर निर्भरता और संभावित संकट से निपटने के लिए तैयार किए गए 'कंटेंसी प्लान' के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। अधिकारियों ने बताया कि हालांकि कच्चे तेल का पर्याप्त भंडार मौजूद है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती कीमतों और लॉजिस्टिक्स की चुनौतियों पर कड़ी नजर रखने की जरूरत है।
ईंधन की कीमतें और प्राकृतिक गैस का बढ़ता दबाव
फिलहाल देश के बड़े शहरों में पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं। दिल्ली और मुंबई जैसे महानगरों में कीमतें नियंत्रण में हैं, हालांकि कच्चे तेल की वैश्विक उछाल के कारण प्रीमियम पेट्रोल की कीमतों में 2 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सबसे बड़ी चिंता प्राकृतिक गैस (CNG) और एलपीजी (LPG) को लेकर है। भारत अपनी एलपीजी और प्राकृतिक गैस की जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है। होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास बढ़ते सैन्य तनाव के कारण टैंकरों की आवाजाही प्रभावित हुई है, जिससे जहाजों के पहुंचने में देरी हो रही है।
जमीनी हकीकत: सीएनजी स्टेशनों और गैस एजेंसियों पर कतारें
पश्चिम एशिया के इस संकट का असर अब भारतीय शहरों की सड़कों पर भी दिखने लगा है। विजयवाड़ा से लेकर महाराष्ट्र के कई हिस्सों में सीएनजी स्टेशनों के बाहर ऑटो और कमर्शियल वाहनों की लंबी कतारें देखी जा रही हैं। सरकार ने निर्देश दिए हैं कि घरेलू रसोई गैस की आपूर्ति में कोई कमी न आए, जिसके कारण व्यावसायिक उपयोग पर कुछ पाबंदियां लगाई गई हैं। कुछ इलाकों में गैस की कमी की अफवाहों के चलते लोग पैनिक खरीदारी और जमाखोरी कर रहे हैं, जिससे वितरण केंद्रों पर तनाव की स्थिति बन रही है।
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प्रधानमंत्री ने मंत्रालयों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर जोर दिया ताकि आम जनता को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि कीमतों को नियंत्रित रखा जाए और जमाखोरी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। पीएम मोदी ने अधिकारियों से कहा कि यदि पश्चिम एशिया में संघर्ष और अधिक फैलता है, तो आकस्मिक योजनाओं को तुरंत लागू करने के लिए तैयार रहें। हालांकि सरकार का कहना है कि वर्तमान में कोई बड़ा संकट नहीं है, लेकिन गैस आपूर्ति श्रृंखला पर दिख रहा शुरुआती दबाव भविष्य की चुनौतियों का संकेत दे रहा है।