अशांत क्षेत्रों में अधिकार संरक्षण विधेयक-2026 को विहिप का समर्थन : एडवोकेट मोती सिंह राजपुरोहित
अशांत क्षेत्रों में स्थायी निवासियों व किरायेदारों के अधिकारों के संरक्षण हेतु विधेयक-2026 पर विहिप का समर्थन। एडवोकेट मोती सिंह राजपुरोहित ने बताया कानून व्यवस्था और सामाजिक संतुलन के लिए निर्णायक कदम।
News Tv India हिंदी Official | Verified Expert • 27 Mar, 2026Editor
Jan 28, 2026 • 12:18 PM
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अशांत क्षेत्रों में अधिकार संरक्षण विधेयक-2026 को विहिप का समर्थन : एडवोकेट मोती सिंह राजपुरोहित
अशांत क्षेत्रों में स्थायी निवासियों व किरायेदारों के अधिकारों के संरक्षण हेतु विधेयक-2026 पर विहिप का समर्थन। एडवोकेट मोती सिंह राजपुरोहित ने बताया कानून व्यवस्था और सामाजिक संतुलन के लिए निर्णायक कदम।
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अशांत क्षेत्रों में अधिकार संरक्षण विधेयक-2026 को विहिप का समर्थन : एडवोकेट मोती सिंह राजपुरोहित
जोधपुर: राजस्थान सरकार द्वारा अशांत क्षेत्रों में स्थायी निवासियों व किरायेदारों के अधिकारों के संरक्षण हेतु विधेयक-2026 के प्रारूप को मंजूरी दिए जाने पर विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने इसे प्रदेश की सामाजिक स्थिरता और कानून व्यवस्था को मजबूत करने वाला दूरगामी निर्णय बताया है।
जोधपुर में आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए विहिप राजस्थान क्षेत्र के विधि प्रमुख एवं राजस्थान उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता एडवोकेट मोती सिंह राजपुरोहित ने कहा कि यह विधेयक उन क्षेत्रों में बढ़ते जनसांख्यिकीय असंतुलन, अवैध कब्जों, जबरन संपत्ति बिक्री और सामाजिक तनाव जैसी गंभीर समस्याओं पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करेगा।
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एडवोकेट मोती सिंह राजपुरोहित ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा एवं राज्य मंत्रिमंडल का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार का यह निर्णय आम नागरिकों, विशेषकर स्थायी निवासियों और किरायेदारों के संवैधानिक एवं वैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक था।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में कई ऐसे क्षेत्र विकसित हुए हैं, जहां सुनियोजित तरीके से अवैध कब्जे, संपत्तियों की जबरन खरीद-फरोख्त और सामाजिक दबाव के कारण लोगों को अपने ही घर छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा। ऐसे हालात न केवल कानून व्यवस्था को चुनौती देते हैं, बल्कि सामाजिक सौहार्द को भी गंभीर रूप से प्रभावित करते हैं।
एडवोकेट मोती सिंह राजपुरोहित ने बताया कि प्रस्तावित विधेयक के तहत अशांत घोषित क्षेत्रों में किसी भी संपत्ति की खरीद-बिक्री से पहले जिला कलेक्टर से अनुमति लेना अनिवार्य होगा। जिला प्रशासन यह सुनिश्चित करेगा कि संपत्ति का विक्रय वास्तविक बाजार मूल्य पर हो और किसी भी नागरिक को भय, दबाव या अवैध गतिविधियों के चलते अपनी संपत्ति बेचने या क्षेत्र छोड़ने के लिए मजबूर न किया जाए।
उन्होंने जानकारी दी कि प्रदेश में वर्तमान में 86 से अधिक ऐसे क्षेत्र चिन्हित किए जा चुके हैं, जहां बीते वर्षों में सामाजिक असंतुलन, अवैध गतिविधियों और कानून-व्यवस्था से जुड़े मामले सामने आए हैं। एडवोकेट मोती सिंह राजपुरोहित ने कहा कि विधेयक के कानून बनने के बाद इन क्षेत्रों में राष्ट्रविरोधी और असामाजिक गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगेगा।
एडवोकेट मोती सिंह राजपुरोहित ने स्पष्ट किया कि विधेयक के प्रावधानों के अनुसार बेनामी लेन-देन, जबरन संपत्ति बिक्री, तथा बिना प्रशासनिक अनुमति आवासीय संपत्तियों के व्यावसायिक या औद्योगिक उपयोग पर सख्त रोक रहेगी। इससे अवैध गतिविधियों में संलिप्त तत्वों पर प्रभावी नियंत्रण संभव होगा।
उन्होंने यह भी कहा कि अशांत क्षेत्रों में महिलाओं और आम नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। पर्याप्त पुलिस चौकियों की स्थापना, अवैध गतिविधियों की सतत निगरानी और सार्वजनिक व सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई इस कानून का अहम हिस्सा होगी।
प्रेस वार्ता के दौरान एडवोकेट मोती सिंह राजपुरोहित ने कहा कि यह विधेयक किसी समुदाय विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि सभी नागरिकों की सुरक्षा, शांति और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के उद्देश्य से लाया गया है। इसका मुख्य लक्ष्य प्रदेश में स्थायी शांति, सामाजिक संतुलन और सुरक्षित वातावरण स्थापित करना है।
एडवोकेट मोती सिंह राजपुरोहित ने कहा कि विश्व हिंदू परिषद लंबे समय से इस प्रकार के सख्त और स्पष्ट कानून की मांग कर रही थी। संगठन इस विधेयक को पूर्ण समर्थन देता है और विश्वास करता है कि इसके लागू होने से राजस्थान में कानून व्यवस्था सुदृढ़ होगी तथा सामाजिक सौहार्द को मजबूती मिलेगी।