US-Iran War Update: बैक-चैनल कूटनीति में भारत की बड़ी भूमिका, ओमान और तुर्की के साथ मिलकर ट्रंप के '5-दिवसीय संघर्ष विराम' की बनाई राह
अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध के चौथे सप्ताह में कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है। ओमान, तुर्की और भारत जैसे देशों की मध्यस्थता के बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के ऊर्जा ढांचे पर हमले को 5 दिनों के लिए टालने का ऐलान किया है। भारत ने अपने संतुलित संबंधों का इस्तेमाल कर क्षेत्र में स्थिरता लाने के लिए पर्दे के पीछे अहम संदेश साझा किए हैं।
नई दिल्ली: मध्य-पूर्व में जारी महायुद्ध के बीच शांति की एक धुंधली उम्मीद जागी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा 5 दिनों के लिए हमलों को स्थगित करने की घोषणा के पीछे एक बड़ा कूटनीतिक नेटवर्क काम कर रहा है। सूत्रों और अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस 'सिक्योरिटी वाल्व' कूटनीति में भारत, ओमान और तुर्की जैसे देशों ने वाशिंगटन और तेहरान के बीच संवाद की कड़ियाँ जोड़ने में सफलता पाई है।
ओमान और तुर्की के जरिए कूटनीति के मुख्य केंद्र
मध्यस्थता के इस दौर में ओमान एक बार फिर सबसे विश्वसनीय कड़ी साबित हुआ है क्योंकि मस्कट में हुई गुप्त वार्ताओं ने दोनों कट्टर प्रतिद्वंद्वियों को बातचीत की मेज पर लाने का आधार तैयार किया है। ऐतिहासिक रूप से भी ओमान अमेरिका और ईरान के बीच एक मजबूत सेतु का काम करता रहा है। इसके साथ ही तुर्की के जरिए भी लगातार संदेशों का आदान-प्रदान हुआ है और तुर्की के विदेश मंत्री की सक्रियता ने क्षेत्रीय तनाव को कम करने में मदद की है।
भारत की संतुलित और प्रभावी भूमिका
इस संकट में भारत की भूमिका सबसे अहम मानी जा रही है क्योंकि नई दिल्ली के संबंध वाशिंगटन और तेहरान, दोनों के साथ काफी मजबूत हैं। भारत ने न केवल अपनी ऊर्जा सुरक्षा और होर्मुज जलडमरूमध्य को बचाने के लिए बल्कि क्षेत्रीय शांति के लिए सऊदी अरब और मिस्र जैसे देशों के साथ मिलकर कूटनीतिक दबाव बनाया है। प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री के ईरानी नेतृत्व के साथ सीधे संपर्क ने शुरुआती कूटनीतिक जड़ता को तोड़ने में मदद की जिससे भारतीय हितों की रक्षा सुनिश्चित हो सकी।
ट्रंप का 5-दिवसीय अल्टीमेटम और शांति की उम्मीद
राष्ट्रपति ट्रंप ने स्वीकार किया है कि पिछले दो दिनों में बहुत अच्छी और उत्पादक बातचीत हुई है। ट्रंप ने 5 दिनों के लिए ऊर्जा ढांचे पर हमलों को टाल दिया है लेकिन यह पूरी तरह से चल रही वार्ताओं की सफलता पर निर्भर है। ट्रंप का दावा है कि ईरान परमाणु हथियार न बनाने पर सहमत हो सकता है, हालांकि ईरान के भीतर से अभी इन दावों पर मिली-जुली प्रतिक्रिया आ रही है। फिर भी इस पहल ने युद्ध को और अधिक फैलने से रोकने में मदद की है।
भविष्य की रणनीति और शांति शिखर सम्मेलन
रिपोर्ट्स के अनुसार कूटनीति का अगला चरण पाकिस्तान के इस्लामाबाद में देखने को मिल सकता है जहाँ संभावित शांति सम्मेलन में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरानी नेतृत्व शामिल हो सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत, ओमान और तुर्की जैसे देशों की यह सक्रियता एक ब्रेक की तरह काम कर रही है जिसने इस संघर्ष को बड़े युद्ध में बदलने से रोक रखा है। आने वाले 5 दिन वैश्विक बाजार और विश्व शांति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण होने वाले हैं।