सुप्रीम कोर्ट का फैसला: धर्म परिवर्तन के बाद SC स्टेटस पर बोले विवेक तन्खा; UCC और पश्चिम एशिया संकट पर भी रखी राय
कांग्रेस सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा ने स्पष्ट किया है कि धर्म परिवर्तन के बाद अनुसूचित जाति (SC) का दर्जा खोने का नियम पुराना है और यह केवल SC वर्ग पर लागू होता है, ST पर नहीं। इसके साथ ही उन्होंने समान नागरिक संहिता (UCC) को राष्ट्रीय स्तर पर लागू करने की वकालत की और प्रधानमंत्री के हालिया संबोधन की सराहना की।
नई दिल्ली: धर्म परिवर्तन और उससे जुड़े संवैधानिक अधिकारों को लेकर आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर कांग्रेस सांसद विवेक तन्खा ने महत्वपूर्ण कानूनी स्पष्टीकरण दिया है। उन्होंने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि यह कोई नया कानून नहीं है, बल्कि देश की उच्च न्यायपालिका लंबे समय से इस सिद्धांत को मानती आई है।
धर्म परिवर्तन और आरक्षण: SC बनाम ST का अंतर
विवेक तन्खा ने कानूनी स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि यदि अनुसूचित जाति (SC) वर्ग का कोई व्यक्ति धर्म परिवर्तन करता है, तो उसे अपना आरक्षण का दर्जा खोना पड़ता है। उन्होंने इस मुद्दे पर विशेष ध्यान दिलाया: यह नियम केवल अनुसूचित जाति (SC) पर लागू होता है, अनुसूचित जनजाति (ST) पर नहीं। तन्खा ने पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के पुराने मामले का उदाहरण देते हुए समझाया कि विवाद इसी बात पर था कि वे स्वयं को एसटी (ST) बताते थे ताकि ईसाई होने के बावजूद उनका दर्जा बरकरार रहे, जबकि विरोधियों का तर्क उन्हें एससी (SC) श्रेणी में रखने का था। उनके अनुसार आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के एक हालिया मामले में सुप्रीम कोर्ट ने इसी कानूनी स्थिति को दोबारा स्पष्ट और सुधारा है।