नेपाल सरकार का ऐतिहासिक फैसला: अब नेताओं और अफसरों की संपत्तियों की होगी जांच!
नेपाल की नई सरकार ने भ्रष्टाचार पर लगाम कसने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है. प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह के नेतृत्व वाली सरकार ने 1990 से 2026 तक सार्वजनिक पदों पर रहे नेताओं और अधिकारियों की संपत्तियों की जांच कराने का फैसला किया है.
News Tv India हिंदी Official | Verified Expert • 27 Mar, 2026Editor
Mar 29, 2026 • 2:24 AM | New Delhi
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नेपाल सरकार का ऐतिहासिक फैसला: अब नेताओं और अफसरों की संपत्तियों की होगी जांच!
नेपाल की नई सरकार ने भ्रष्टाचार पर लगाम कसने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है. प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह के नेतृत्व वाली सरकार ने 1990 से 2026 तक सार्वजनिक पदों पर रहे नेताओं और अधिकारियों की संपत्तियों की जांच कराने का फैसला किया है.
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29 March 2026
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नेपाल सरकार का ऐतिहासिक फैसला: अब नेताओं और अफसरों की संपत्तियों की होगी जांच!
नेपाल सरकार का ऐतिहासिक फैसला: अब नेताओं और अफसरों की संपत्तियों की होगी जांच!
नेपाल की नई सरकार ने भ्रष्टाचार पर लगाम कसने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है. प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह के नेतृत्व वाली सरकार ने 1990 से 2026 तक सार्वजनिक पदों पर रहे नेताओं और अधिकारियों की संपत्तियों की जांच कराने का फैसला किया है.
नेपाल में अब नहीं चलेगी भ्रष्टाचार की मनमानी!
नेपाल की नई सरकार ने देश में फैले भ्रष्टाचार पर लगाम कसने के लिए एक ऐतिहासिक और बड़ा फैसला लिया है. प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह के नेतृत्व वाली सरकार ने राजनीतिक नेताओं और उच्च पदस्थ अधिकारियों की संपत्तियों की जांच कराने का ऐलान किया है. शनिवार, 28 मार्च को जारी किए गए 100 बिंदुओं वाले सुशासन सुधार एजेंडा में इस महत्वपूर्ण घोषणा को शामिल किया गया है.
क्या है सरकार का प्लान?
सरकार ने बताया है कि अगले 15 दिनों के भीतर एक सशक्त समिति का गठन किया जाएगा. इस समिति का मुख्य काम 1990 से 2026 तक सार्वजनिक पदों पर रहे सभी प्रमुख नेताओं और अधिकारियों की संपत्तियों की गहराई से जांच करना होगा.
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यह फैसला ऐसे समय में आया है जब पिछले तीन दशकों से सत्ता में रहे कई नेताओं पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगते रहे हैं और उनकी जांच की मांग लगातार उठ रही थी. सरकार का साफ मकसद है कि देश में व्याप्त भ्रष्टाचार, संपत्तियों को छिपाने की प्रवृत्ति और 'दंडमुक्ति की संस्कृति' को जड़ से खत्म किया जाए.
पहला चरण: इसमें 2006 से 2026 तक सार्वजनिक पदों पर रहे प्रमुख नेताओं और वरिष्ठ नौकरशाहों की संपत्तियों का संग्रह, सत्यापन और जांच की जाएगी.
दूसरा चरण: इस चरण में 1990 से 2005 के बीच पद पर रहे प्रमुख लोगों की संपत्तियों की जांच की जाएगी.
पिछले साल के आंदोलन का असर!
आपको याद होगा, पिछले साल सितंबर में हुए जेन-जी आंदोलन के पीछे नेताओं में कथित भ्रष्टाचार एक बड़ी वजह मानी गई थी. उसी आंदोलन के चलते तत्कालीन प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की सरकार को सत्ता छोड़नी पड़ी थी. यह नया फैसला उसी जनाक्रोश का परिणाम भी हो सकता है.
डिजिटल एसेट रजिस्ट्री और जोखिम-आधारित प्रणाली
भ्रष्टाचार के खिलाफ इस लड़ाई को और मजबूत बनाने के लिए नेपाल राष्ट्र बैंक भी कमर कस रहा है. अगले 100 दिनों के भीतर एक डिजिटल एसेट रजिस्ट्री तैयार की जाएगी. इसमें बैंक खाते, डिजिटल वॉलेट, शेयर निवेश और अन्य सभी वित्तीय गतिविधियों को शामिल किया जाएगा.
इसके अलावा, सरकार एक 'जोखिम-आधारित संकेतक प्रणाली' भी लागू करेगी. यह प्रणाली संदिग्ध लेन-देन की स्वतः पहचान कर संबंधित जांच एजेंसियों को तुरंत सूचित करेगी, जिससे भ्रष्टाचार पर त्वरित कार्रवाई हो सकेगी.
पारदर्शिता और जवाबदेही की नई सुबह
कुल मिलाकर, इस फैसले को नेपाल में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में एक बहुत ही अहम और क्रांतिकारी कदम माना जा रहा है. उम्मीद है कि यह कदम देश को भ्रष्टाचार मुक्त बनाने में मील का पत्थर साबित होगा.