चीन की ओर बढ़ा रूसी तेल का टैंकर मुड़ा भारत की तरफ: 'एक्वा टाइटन' की न्यू मंगलौर पोर्ट पर एंट्री, ऊर्जा संकट में बड़ी राहत

वैश्विक भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बीच भारत के लिए एक बड़ी राहत की खबर आई है। रूस से चीन जा रहा तेल टैंकर 'एक्वा टाइटन' अपना रास्ता बदलकर कर्नाटक के न्यू मंगलौर पोर्ट पहुंच गया है। होर्मुज जलडमरूमध्य में जारी तनाव के बीच रूसी तेल की यह खेप भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए 'गेमचेंजर' साबित हो रही है।

Mar 23, 2026 - 00:26
चीन की ओर बढ़ा रूसी तेल का टैंकर मुड़ा भारत की तरफ: 'एक्वा टाइटन' की न्यू मंगलौर पोर्ट पर एंट्री, ऊर्जा संकट में बड़ी राहत
चीन की ओर बढ़ा रूसी तेल का टैंकर मुड़ा भारत की तरफ: 'एक्वा टाइटन' की न्यू मंगलौर पोर्ट पर एंट्री, ऊर्जा संकट में बड़ी राहत

नई दिल्ली/मंगलौर: दुनिया भर में जारी ऊर्जा संकट और लाल सागर से लेकर होर्मुज जलडमरूमध्य तक फैले तनाव के बीच भारत ने अपनी कूटनीतिक और व्यापारिक सूझबूझ का परिचय दिया है। रूसी कच्चे तेल से लदा एक विशाल टैंकर 'एक्वा टाइटन' (Aqua Titan), जिसे मूल रूप से चीन के रिजाओ पोर्ट पहुंचना था, अब भारत के न्यू मंगलौर पोर्ट पर लंगर डाल चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह भारत की ऊर्जा नीति की एक बड़ी सफलता है।

यू-टर्न की कहानी: चीन के बजाय भारत को प्राथमिकता

शिप ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, 'एक्वा टाइटन' जनवरी के अंत में रूस के बाल्टिक सागर स्थित प्रिमोर्स्क पोर्ट से रवाना हुआ था। मार्च के मध्य तक यह जहाज दक्षिण चीन सागर में था, लेकिन अचानक इसने यू-टर्न लिया और भारत की ओर रुख कर लिया।

इस बड़े बदलाव के पीछे मुख्य कारण 6 मार्च को अमेरिका द्वारा दिया गया 30 दिनों का अस्थायी वेवर (Waiver) बताया जा रहा है। इस छूट ने भारतीय रिफाइनरियों को समुद्र में फंसे रूसी तेल को खरीदने का कानूनी रास्ता साफ कर दिया। परिणाम स्वरूप, भारतीय कंपनियों ने फुर्ती दिखाते हुए एक ही हफ्ते में करीब 3 करोड़ बैरल रूसी क्रूड की बुकिंग कर ली।

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होर्मुज संकट और भारत की मजबूरी

पश्चिम एशिया में ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को असुरक्षित बना दिया है। भारत के लिए यह मार्ग जीवन रेखा के समान है क्योंकि:

  • भारत की 40-50% कच्चा तेल आपूर्ति इसी रास्ते से होती है।

  • एलएनजी (LNG) और एलपीजी (LPG) का बड़ा हिस्सा भी यहीं से गुजरता है। जहाजों की आवाजाही में देरी और बढ़ते 'फ्रेट चार्ज' के कारण भारत पर ऊर्जा संकट मंडरा रहा था। ऐसे में रूसी 'उराल्स क्रूड' न केवल एक सुरक्षित विकल्प बनकर उभरा है, बल्कि यह भारतीय रिफाइनरियों के लिए रियायती (Discounted) दरों पर भी उपलब्ध है।

7 टैंकरों ने मोड़ा रुख: भारत की ओर बढ़ रहा तेल का कारवां

'एक्वा टाइटन' अकेला ऐसा जहाज नहीं है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कम से कम सात बड़े टैंकरों ने चीन का रास्ता छोड़कर भारत की ओर रुख किया है।

  • एक्वा टाइटन: इसमें लगभग 7.7 लाख बैरल (1.1 लाख टन) उराल्स क्रूड है, जिसे मंगलौर रिफाइनरी (MRPL) के लिए चार्टर किया गया है।

  • जुजु एन (Zouzou N): यह सूजमैक्स टैंकर भी मार्च के अंत तक गुजरात के सिक्का पोर्ट पहुंचने की उम्मीद है।

अनुमान है कि मार्च के अंत तक भारत का रूसी तेल आयात 1.5 से 2.2 मिलियन बैरल प्रतिदिन के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच सकता है।

जब पारंपरिक तेल मार्ग युद्ध और तनाव की भेंट चढ़ रहे हैं, तब रूस से सस्ता और प्रचुर मात्रा में तेल प्राप्त करना भारत की अर्थव्यवस्था के लिए बूस्टर डोज की तरह है। विशेषज्ञों का कहना है कि चीन के हिस्से का तेल भारत की ओर मुड़ना यह दर्शाता है कि वैश्विक बाजार में भारत की क्रय शक्ति और कूटनीतिक स्थिति कितनी मजबूत हो चुकी है।

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