पंजाब की धरती उगलेगी 'खजाना'! फाजिल्का और मुक्तसर में पोटाश की खोज तेज; भारत की 99% विदेशी निर्भरता होगी खत्म
पंजाब सरकार और भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) ने फाजिल्का और श्री मुक्तसर साहिब में पोटाश खोज के लिए समयबद्ध योजना बनाई है। अप्रैल तक अंतिम रिपोर्ट आने की उम्मीद है, जिससे किसानों को सीधा लाभ मिलेगा और देश उर्वरक क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनेगा।
चंडीगढ़। पंजाब में धरती के नीचे पोटाश भंडार की खोज को तेज़ करने और भारत की पोटाश आयात पर भारी निर्भरता कम करने के उद्देश्य से पंजाब सरकार ने प्रयास तेज कर दिए हैं। कृषि के लिए अहम इस खनिज के घरेलू स्रोत मज़बूत करने को लेकर खनन एवं भू-विज्ञान विभाग ने समयबद्ध कार्ययोजना पर काम शुरू किया है।
इसी क्रम में खनन एवं भू-विज्ञान मंत्री बरिंदर कुमार गोयल की अध्यक्षता में पंजाब सिविल सचिवालय में एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक हुई। बैठक में पोटाश संभावित क्षेत्रों में खोज कार्यों की प्रगति की समीक्षा की गई और आगामी चरणों के लिए स्पष्ट समय-सीमाएं तय की गईं।
फाजिल्का और श्री मुक्तसर साहिब पर विशेष ध्यान
बैठक में भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) के वरिष्ठ अधिकारियों ने फील्ड सीजन 2025-26 में पूरे किए गए खोज ब्लॉकों और जारी ड्रिलिंग कार्यों की जानकारी दी। साथ ही फील्ड सीजन 2026-27 के लिए प्रस्तावित खोज और प्रारंभिक सर्वे कार्यक्रमों का खाका प्रस्तुत किया गया। फाजिल्का और श्री मुक्तसर साहिब जिलों को पोटाश की बड़ी संभावनाओं वाले प्रमुख क्षेत्र के रूप में चिन्हित किया गया है।
जी-4 चरण की खोज पूरी, मेमोरेंडम सौंपे गए
GSI अधिकारियों ने बताया कि कबरवाला ब्लॉक और शेरगढ़–दलमीरखेड़ा ब्लॉक में जी-4 चरण की खोज पूरी हो चुकी है और संबंधित भू-वैज्ञानिक मेमोरेंडम राज्य सरकार को सौंपे जा चुके हैं। राज्य की सहमति के बाद शेरगढ़–शेरावाला–रामसरा–दलमीरखेड़ा संयुक्त ब्लॉक को छठे चरण में कम्पोजिट लाइसेंस की नीलामी के लिए रखा गया है, जिसके परिणामों की प्रतीक्षा है।
राजपुरा–राजावाली और गिदड़ांवाली–अज़ीमगढ़ ब्लॉकों में छह स्थानों पर ड्रिलिंग चल रही है, जिनमें से पांच स्थानों पर काम पूरा हो चुका है। रासायनिक विश्लेषण के बाद अंतिम रिपोर्टें अप्रैल तक आने की उम्मीद है।
2026-27 के लिए नई खोज योजनाएं
फील्ड सीजन 2026-27 के लिए फाजिल्का जिले के केरा-खेड़ा और सईदवाला ब्लॉकों में खोज सर्वेक्षण तथा कंधवाला–रामसरा ब्लॉक में प्रारंभिक खोज का प्रस्ताव रखा गया है, जिसमें 15 ड्रिलिंग साइटें शामिल हैं। पूरे बेसिन को कवर करने के लिए भू-भौतिक सर्वे के आधार पर लगभग 50 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र की पहचान की जा चुकी है।
ड्रिलिंग और मैपिंग में तेजी के निर्देश
कैबिनेट मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने ड्रिलिंग और मैपिंग कार्यों में तेजी लाने, प्रस्तावित ब्लॉकों को समय पर पूरा करने और विभाग व GSI के बीच मासिक समीक्षा बैठकें आयोजित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इससे भविष्य की खनन संभावनाओं की स्पष्ट योजना बन सकेगी।
99% पोटाश आयात करता है भारत
मंत्री ने कहा कि पोटाश कृषि के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण खनिज है और भारत अपनी आवश्यकता का करीब 99 प्रतिशत आयात करता है। पंजाब में पोटाश की खोज और संभावित उत्पादन से किसानों को सीधा लाभ मिलेगा, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मज़बूत होगी और राज्य व देश की अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी।
उन्होंने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब सरकार वैज्ञानिक तरीके से किए जा रहे हर प्रयास को पूरा समर्थन देगी, ताकि देश को इस अहम खनिज में आत्मनिर्भर बनाया जा सके।