'स्मारक तो बहुत बने, पर भगत सिंह की सोच को किया गया नजरअंदाज': शहीदी दिवस पर CM भगवंत मान का बड़ा बयान
शहीदी दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री भगवंत मान ने महान क्रांतिकारियों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने पिछली सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि नेताओं ने अपने नाम पर तो स्मारक बनाए, लेकिन शहीदों के सपनों के पंजाब को भुला दिया। मुख्यमंत्री ने शिक्षा को गरीबी मिटाने का एकमात्र जरिया बताया और शहीदों को 'भारत रत्न' देने की मांग दोहराई।
खटकड़ कलां/चंडीगढ़: शहीद-ए-आजम भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव के शहीदी दिवस पर मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पंजाब और देश की सेवा के अपने संकल्प को दोहराया। एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि 23 मार्च का दिन केवल एक तारीख नहीं, बल्कि अन्याय और अत्याचार के खिलाफ खड़े होने की प्रेरणा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार शहीदों के 'रंगला पंजाब' के सपने को साकार करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
नेताओं के स्मारकों पर निशाना और 'भारत रत्न' की मांग
मुख्यमंत्री ने पिछली राजनीति पर तीखा हमला करते हुए कहा कि दशकों तक राज करने वाले राजनेताओं ने अपने और अपने आकाओं के नाम पर तो भव्य स्मारक खड़े किए, लेकिन भगत सिंह जैसे नायकों की विरासत को हाशिए पर रखा। उन्होंने सवाल उठाया कि आजादी के इतने वर्षों बाद भी इन महान क्रांतिकारियों को 'भारत रत्न' जैसे सर्वोच्च सम्मान से क्यों नहीं नवाजा गया? मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि देश की बागडोर शुरुआत से ही भगत सिंह जैसे प्रगतिशील युवाओं के हाथ में होती, तो आज भारत की तस्वीर कुछ और ही होती।
शिक्षा: गरीबी और बेबसी के चक्र को तोड़ने का एकमात्र समाधान
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में शिक्षा के महत्व को सबसे ऊपर रखा। उन्होंने कहा कि कोई भी मुफ्त सुविधा या रियायत गरीबी को जड़ से खत्म नहीं कर सकती, केवल उच्च स्तरीय शिक्षा ही लोगों के जीवन स्तर को ऊंचा उठा सकती है। पंजाब सरकार ने शिक्षा क्षेत्र को अपनी पहली प्राथमिकता बनाया है ताकि आम आदमी का बच्चा सशक्त होकर मजबूरी के चक्र से बाहर निकल सके। शिक्षा वह प्रकाश है जो अज्ञानता और सामाजिक बुराइयों के अंधकार को दूर कर वास्तविक बदलाव लाता है।
वोट की शक्ति और शहीदों की 'महक'
लोकतांत्रिक अधिकारों पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने एक भावुक अपील की। उन्होंने कहा कि आज हमें जो वोट डालने का अधिकार मिला है, वह इन शहीदों की निस्वार्थ कुर्बानी का परिणाम है। उन्होंने कहा कि जब आप अपने वोटर आईडी कार्ड को देखते हैं, तो उसमें अपनी तस्वीर के साथ इन शहीदों की कुर्बानियों की महक महसूस करें। यह अधिकार अनमोल है, इसे पैसे, प्रभाव या लालच में आकर कभी न बेचें। उन्होंने याद दिलाया कि अंग्रेजों ने भव्य इमारतें यह सोचकर बनाई थीं कि वे हमेशा राज करेंगे, लेकिन वे भगत सिंह जैसे नौजवानों के जज्बे को भांपने में असफल रहे।
आजादी के संघर्ष में पंजाब का अद्वितीय योगदान
मुख्यमंत्री ने गौरव के साथ पंजाब के ऐतिहासिक योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि देश की कुल आबादी का केवल 2 प्रतिशत होने के बावजूद, आजादी की लड़ाई में फांसी चढ़ने वाले या कालापानी की सजा काटने वाले 80 प्रतिशत शहीद पंजाब से थे। उन्होंने विभाजन की उस भयावहता को भी याद किया जिसमें पंजाब ने लाखों जानों और संपत्तियों की कुर्बानी दी थी।
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अंत में विश्वास जताया कि वह दिन दूर नहीं जब पंजाब देश का अग्रणी राज्य बनेगा। उन्होंने कहा कि 'आप' सरकार शहीदों के पदचिह्नों पर चलते हुए जन-हितैषी योजनाएं लागू कर रही है और एक ऐसे समाज के निर्माण के लिए वचनबद्ध है जहाँ समानता और खुशहाली हो।