साबरमती के आसमान में दिखी भारत-जर्मनी की दोस्ती, PM मोदी और चांसलर मर्ज़ ने उड़ाई पतंग; जानें कैसे यह उत्सव बना 'ग्लोबल'
अहमदाबाद का साबरमती रिवरफ्रंट एक ऐतिहासिक पल का गवाह बना जब पीएम मोदी और जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ ने साथ मिलकर पतंग उड़ाई। 'मोदी स्टोरी' ने साझा किया कि कैसे एक स्थानीय परंपरा पीएम मोदी की दूरदृष्टि से वैश्विक मंच पर पहुँची और आज भारत की 'सॉफ्ट पावर' का प्रतीक बन गई है। देखें इस उत्सव की खास तस्वीरें और इतिहास।
News Tv India हिंदी Official | Verified Expert • 27 Mar, 2026Editor
Jan 12, 2026 • 6:14 PM
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साबरमती के आसमान में दिखी भारत-जर्मनी की दोस्ती, PM मोदी और चांसलर मर्ज़ ने उड़ाई पतंग; जानें कैसे यह उत्सव बना 'ग्लोबल'
अहमदाबाद का साबरमती रिवरफ्रंट एक ऐतिहासिक पल का गवाह बना जब पीएम मोदी और जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ ने साथ मिलकर पतंग उड़ाई। 'मोदी स्टोरी' ने साझा किया कि कैसे एक स्थानीय परंपरा पीएम मोदी की दूरदृष्टि से वैश्विक मंच पर पहुँची और आज भारत की 'सॉफ्ट पावर' का प्रतीक बन गई है। देखें इस उत्सव की खास तस्वीरें और इतिहास।
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साबरमती के आसमान में दिखी भारत-जर्मनी की दोस्ती, PM मोदी और चांसलर मर्ज़ ने उड़ाई पतंग; जानें कैसे यह उत्सव बना 'ग्लोबल'
अहमदाबाद, 12 जनवरी (आईएएनएस)। गुजरात का अहमदाबाद शहर आज एक ऐतिहासिक क्षण का गवाह बना। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने सोमवार को यहां 'अंतर्राष्ट्रीय पतंग महोत्सव' में हिस्सा लिया। साबरमती रिवरफ्रंट पर दोनों राष्ट्राध्यक्षों ने पतंग उड़ाकर आपसी प्रेम, सद्भाव और एकता का संदेश दिया।
वहीं, मोदी स्टोरी नाम के सोशल मीडिया एक्स हैंडल ने 'गुजरात पतंग महोत्सव' का एक वीडियो शेयर किया। वीडियो में न सिर्फ मकर संक्रांति और पतंग महोत्सव के महत्व को दिखाया गया, बल्कि यह बताया गया कि कैसे नरेंद्र मोदी के मुख्यमंत्री रहते गुजरात का यह स्थानीय उत्सव एक वैश्विक पतंग महोत्सव में तब्दील हो गया।
मोदी स्टोरी ने वीडियो के माध्यम से बताया कि गुजरात में पतंग उड़ाना सदियों पुरानी परंपरा रही है। मकर संक्रांति पर हर छत, हर आंगन और हर गली उत्सव में बदल जाती है। पूरा गुजरात मानों आकाश से संवाद करने लगता है, लेकिन इस परंपरा को स्थानीय उत्सव से निकालकर वैश्विक मंच तक पहुंचाने की दूर दृष्टि पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में साकार हुई। मुख्यमंत्री रहते हुए नरेंद्र मोदी ने यह समझा कि गुजरात की सांस्कृतिक पहचान को विश्व के सामने प्रदर्शित करना सिर्फ पर्यटन नहीं, बल्कि भारत की सॉफ्ट पावर को सशक्त करने का माध्यम है।
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उनकी पहल और दृष्टि से गुजरात इंटरनेशनल पतंग महोत्सव को एक नया स्वरूप मिला। देश से नहीं, बल्कि विदेशों से पतंगबाज, कलाकार और संस्कृति प्रेमी गुजरात आने लगे। अहमदाबाद, वडोदरा और सूरत जैसे शहर अंतरराष्ट्रीय संवाद के बड़े केंद्र बन गए, जहां भाषा नहीं, बल्कि पतंगें बोलती थीं, और जहां सीमाएं नहीं, सांझी खुशियां उड़ान भरती थीं। पीएम नरेंद्र मोदी ने इस उत्सव को केवल आयोजन नहीं, बल्कि सांस्कृतिक कूटनीति का माध्यम बनाया।
आज गुजरात का पतंग महोत्सव विश्व के अनेक देशों में भारत की पहचान बन चुका है। गुजरात का पतंग महोत्सव आकाश में उड़ती पतंगों के माध्यम से भारत की संस्कृति, परंपरा और उत्सवधर्मिता को विश्व तक पहुंचाता है। हर पतंग अपने साथ सकारात्मकता, एकता और आनंद का संदेश लेकर उड़ती है। मकर संक्रांति और पतंग महोत्सव सिर्फ एक राज्य या एक देश तक सीमित नहीं रहे। नरेंद्र मोदी की दूरदृष्टि ने गुजरात की इस परंपरा को एक वैश्विक पहचान दी और स्थानीय उत्सव को विश्व के आकाश में भारत की सांस्कृतिक उड़ान बना दिया।
वहीं, इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर इस सुखद और ऐतिहासिक पल की कुछ तस्वीरें साझा कीं। उन्होंने लिखा कि अंतर्राष्ट्रीय पतंग महोत्सव के दौरान गुजरात के अहमदाबाद का आकाश रंगों और जीवंतता से जगमगा उठा। जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज को इस विशेष अवसर पर लाकर मुझे बेहद खुशी हुई। उन्हें पतंग उड़ाने का प्रयास करते देखना भी बहुत सुखद रहा।
उन्होंने लिखा कि मकर संक्रांति के दौरान पतंग महोत्सव आकाश को रंगों, आनंद और उत्सव से भर देता है। जैसे ही पतंगें आसमान में ऊंची उड़ती हैं, वे नई शुरुआत और साझा खुशी का प्रतीक बन जाती हैं। छतों पर शुरू हुआ यह उत्सव एक सामूहिक अनुभव बन जाता है, जो लोगों को परंपरा और उत्सव की भावना से एकजुट करता है। नरेंद्र मोदी द्वारा मुख्यमंत्री रहते हुए परिकल्पित यह महोत्सव एक अंतरराष्ट्रीय आयोजन में तब्दील हो गया है, जिसमें दुनिया भर से पतंग उड़ाने वाले शामिल होते हैं।
उन्होंने लिखा कि आज, पतंग महोत्सव एकता और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का प्रतीक है, जहां आकाश सभी के लिए एक साझा उत्सव बन जाता है।