AI पर भारत का 'ग्लोबल विजन': मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार बोले 'सिर्फ नियम नहीं, भरोसे से चलेगी डिजिटल दुनिया'; इंडियाएआई मिशन से बदलेगी देश की सूरत!
भारत के मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार (PSA) अजय कुमार सूद ने थिंक-टैंक समुदाय CSIS (Center for Strategic and International Studies) को संबोधित करते हुए कहा कि भारत एआई के संचालन के लिए एक ऐसा ढांचा तैयार कर रहा है जो सुरक्षा और नवाचार (Innovation) के बीच सेतु का काम करेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत की नीति केवल तकनीकी नहीं, बल्कि एक 'आर्थिक रणनीति' है।
News Tv India हिंदी Official | Verified Expert • 27 Mar, 2026Editor
Jan 31, 2026 • 9:45 AM
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AI पर भारत का 'ग्लोबल विजन': मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार बोले 'सिर्फ नियम नहीं, भरोसे से चलेगी डिजिटल दुनिया'; इंडियाएआई मिशन से बदलेगी देश की सूरत!
भारत के मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार (PSA) अजय कुमार सूद ने थिंक-टैंक समुदाय CSIS (Center for Strategic and International Studies) को संबोधित करते हुए कहा कि भारत एआई के संचालन के लिए एक ऐसा ढांचा तैयार कर रहा है जो सुरक्षा और नवाचार (Innovation) के बीच सेतु का काम करेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत की नीति केवल तकनीकी नहीं, बल्कि एक 'आर्थिक रणनीति' है।
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AI पर भारत का 'ग्लोबल विजन': मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार बोले— 'सिर्फ नियम नहीं, भरोसे से चलेगी डिजिटल दुनिया'; इंडियाएआई मिशन से बदलेगी देश की सूरत!
वाशिंगटन : भारत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के संचालन के लिए भरोसे पर आधारित नीति अपना रहा है। इस नीति में सख्त नियमों के बजाय समावेश, नवाचार और सुरक्षा पर ज्यादा जोर दिया जा रहा है। यह बात देश के प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार ने थिंक-टैंक समुदाय से बातचीत में कही।
नई दिल्ली से वर्चुअली बोलते हुए, मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार अजय कुमार सूद ने सीएसआईएस के सम्मेलन में कहा कि एआई का संचालन अब देश की आर्थिक और रणनीतिक नीति का अहम हिस्सा बन गया है।
उन्होंने कहा कि एआई अब केवल कुछ कंपनियों या सीमित प्रयोगों तक नहीं रह गया है, बल्कि यह हर क्षेत्र में शामिल हो चुका है और अर्थव्यवस्था की डिजिटल रीढ़ बन गया है।
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अजय कुमार सूद ने बताया कि दुनिया भर में एआई के इस्तेमाल में तेजी आई है, जेनरेटिव एआई में निवेश बढ़ रहा है और डाटा केंद्रों की ऊर्जा जरूरतें भी लगातार बढ़ रही हैं। इन बदलावों से यह साफ हो गया है कि एआई का संचालन अब कोई सीमित नीति विषय नहीं, बल्कि आर्थिक रणनीति, जनविश्वास और सतत विकास से सीधे जुड़ा मामला है।
उन्होंने कहा कि भारत की एआई नीति में सुरक्षा, जवाबदेही, पारदर्शिता और सभी को साथ लेने पर ध्यान दिया गया है, साथ ही नवाचार को बढ़ावा देने के लिए जरूरी लचीलापन भी रखा गया है।
भारत में एआई नीति को वर्ष 2024 में शुरू की गई इंडियाएआई मिशन के माध्यम से लागू किया जा रहा है। इस मिशन के तहत साझा कंप्यूटिंग सुविधा, एकीकृत डाटा मंच, स्वदेशी एआई मॉडल का विकास और लोगों को कौशल प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि स्टार्टअप, शोधकर्ताओं और विश्वविद्यालयों को रियायती दरों पर उच्च क्षमता वाली कंप्यूटिंग सुविधा दी जा रही है, जिससे उनकी लागत काफी कम हुई है। राष्ट्रीय एआई डाटा मंच पर कई क्षेत्रों से जुड़े हजारों डाटा सेट और मॉडल उपलब्ध हैं, जो देश में नवाचार को आगे बढ़ा रहे हैं।
भारत एआई शिक्षा और वैश्विक मानक तय करने की प्रक्रिया में भी निवेश कर रहा है और अंतरराष्ट्रीय एआई संस्थाओं में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। हाल ही में भारत ने राष्ट्रीय एआई संचालन रिपोर्ट जारी की है, जिसमें कानूनी निगरानी और तकनीकी उपायों को साथ जोड़ने वाला तरीका बताया गया है। इससे जोखिम कम करते हुए बड़े स्तर पर नवाचार संभव हो सकेगा।
एआई इम्पैक्ट समिट को देखते हुए, सूद ने कहा कि भारत एक साझा ग्लोबल विजन को बढ़ावा देना चाहता है जिसमें एआई डेवलपमेंट के लिए एक यूनिवर्सल इनेबलर के रूप में काम करे। सूद ने कहा, "फोकस कंप्यूट, डेटा और फाउंडेशनल मॉडल जैसे मुख्य एआई संसाधनों तक पहुंच को लोकतांत्रिक बनाने पर होगा, ताकि ये संसाधन कुछ ही जगहों या कंपनियों तक सीमित न रहें, और देश अपने समाज, भाषाओं और सार्वजनिक प्रणालियों के लिए संदर्भ-विशिष्ट समाधान बना सकें।"
अजय कुमार सूद के अनुसार, सफलता का पैमाना केवल एआई की क्षमता नहीं होगा, बल्कि यह देखा जाएगा कि वह क्षमता कितनी व्यापक जनहित और सामाजिक लाभ में बदलती है।