'लोकतंत्र अनुशासित हो तो सबसे बड़ी चीज है': सभापति राधाकृष्णन ने सांसदों को याद दिलाई गांधीजी की सीख, बजट सत्र को सार्थक बनाने का आह्वान
संसद के बजट सत्र की शुरुआत के साथ ही राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने सदन के सदस्यों के नाम एक विशेष संदेश जारी किया है। उन्होंने सांसदों से हर मिनट का सदुपयोग करने और लोकतंत्र के उच्चतम मानकों को स्थापित करने का आग्रह किया।
News Tv India हिंदी Official | Verified Expert • 27 Mar, 2026Editor
Jan 29, 2026 • 8:20 PM
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'लोकतंत्र अनुशासित हो तो सबसे बड़ी चीज है': सभापति राधाकृष्णन ने सांसदों को याद दिलाई गांधीजी की सीख, बजट सत्र को सार्थक बनाने का आह्वान
संसद के बजट सत्र की शुरुआत के साथ ही राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने सदन के सदस्यों के नाम एक विशेष संदेश जारी किया है। उन्होंने सांसदों से हर मिनट का सदुपयोग करने और लोकतंत्र के उच्चतम मानकों को स्थापित करने का आग्रह किया।
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'लोकतंत्र अनुशासित हो तो सबसे बड़ी चीज है': सभापति राधाकृष्णन ने सांसदों को याद दिलाई गांधीजी की सीख, बजट सत्र को सार्थक बनाने का आह्वान
नई दिल्ली : राज्यसभा सभापति सीपी. राधाकृष्णन ने गुरुवार को सभी सांसदों से अपील की है कि वे इस बजट सत्र को उत्पादक और सार्थक बनाने में पूरा सहयोग दें। यह सत्र हमारे देश को समृद्ध, आत्मनिर्भर और विकसित भारत की दिशा में आगे बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण अवसर है।
उन्होंने सत्र की शुरुआत में कहा, "आइए मिलकर इस बजट सत्र को सफल बनाएं और संसद की उच्चतम मानकों को प्रतिबिंबित करें।"
उन्होंने बताया कि इस सत्र में कुल 30 बैठकों के दौरान 2026-27 के केंद्रीय बजट और सरकार के कई कानूनों का विस्तार से अध्ययन किया जाएगा। इसके अलावा, विभागीय संबंधित स्थायी समितियां भी अवकाश के दौरान मंत्रालयों और विभागों की मांगों की गहन जांच करेंगी।
उपराष्ट्रपति ने देश की हाल की आर्थिक उपलब्धियों की ओर इशारा करते हुए कहा कि यह देखकर बहुत खुशी होती है कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बना हुआ है और जल्द ही यह तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा। उन्होंने सभी सांसदों को याद दिलाया कि देश की बढ़ती वैश्विक ताकत और अर्थव्यवस्था में योगदान के कारण हमारे तौर-तरीके और जिम्मेदारियां बेहद अहम हैं।
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उन्होंने सभी सांसदों से अनुरोध किया कि वे न केवल सदन की बहसों में, बल्कि समितियों में भी सार्थक और प्रभावशाली योगदान दें। उन्होंने कहा कि सदन में हमारे व्यवहार में लोकतंत्र के मूल्यों, अनुशासन और विवेक की झलक होनी चाहिए, जैसा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने दिखाया।
उन्होंने गांधीजी का जिक्र करते हुए कहा, "गांधीजी कहते थे कि लोकतंत्र अनुशासित और विवेकी हो तो यह दुनिया की सबसे बड़ी चीज है। हमें अपने व्यवहार में यही दिखाना है।”
राधाकृष्णन ने यह भी कहा कि इस सत्र में बजट के अलावा कई महत्वपूर्ण विधेयक भी हैं, जिन पर चर्चा और निर्णय करना होगा। इस बड़े काम को देखते हुए हमें हर मिनट का सदुपयोग करना चाहिए और जनता की उम्मीदों पर खरा उतरना चाहिए।
उन्होंने सभी सांसदों से आग्रह किया कि वे संसद में सख्त लेकिन सम्मानजनक बहस करें, पारदर्शिता और कड़े अनुशासन के साथ काम करें ताकि सभी प्रस्तावों पर सही ढंग से विचार हो सके। लोकतंत्र में विविध विचार और खुली बहस जरूरी हैं, लेकिन हमेशा आदर और सम्मान के साथ।
उपराष्ट्रपति ने कहा, "आइए, हम एक ऐसे सत्र के लिए प्रतिबद्ध हों जो मर्यादा, अनुशासन और गरिमापूर्ण आचरण से परिपूर्ण हो।"