Delhi Water Crisis: प्रचंड गर्मी से पहले डरा रही CAG की रिपोर्ट, दिल्ली का 55% ग्राउंड वाटर पीने लायक नहीं

नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की हालिया रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि दिल्ली के भूजल के 55 प्रतिशत नमूने पीने योग्य नहीं पाए गए हैं। चिलचिलाती धूप और मार्च के बढ़ते तापमान के बीच यह रिपोर्ट राजधानी में गहरे पेयजल संकट और स्वास्थ्य संबंधी खतरों की ओर इशारा कर रही है।

Mar 24, 2026 - 12:50
Delhi Water Crisis: प्रचंड गर्मी से पहले डरा रही CAG की रिपोर्ट, दिल्ली का 55% ग्राउंड वाटर पीने लायक नहीं
Delhi Water Crisis: प्रचंड गर्मी से पहले डरा रही CAG की रिपोर्ट, दिल्ली का 55% ग्राउंड वाटर पीने लायक नहीं

नई दिल्ली: दिल्ली में मार्च के अंतिम सप्ताह से ही गर्मी ने अपने तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। ऐसे समय में जब लोग पानी की बढ़ती खपत के लिए तैयारी कर रहे हैं, 'दिल्ली जल बोर्ड के कामकाज' पर आई सीएजी की रिपोर्ट ने सनसनी मचा दी है। रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली का आधे से अधिक भूजल (Ground Water) मानव उपभोग के लिए असुरक्षित है।

CAG की रिपोर्ट के चौंकाने वाले आंकड़े और गुणवत्ता जांच

हिंदुस्तान टाइम्स में प्रकाशित सीएजी की रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली जल बोर्ड की आठ क्षेत्रीय प्रयोगशालाओं ने वर्ष 2017-18 से 2021-22 के बीच भूजल की गुणवत्ता की जांच की। इस अवधि के दौरान कुल 16,234 नमूनों का परीक्षण किया गया जिसमें पाया गया कि 8,933 नमूने यानी करीब 55 प्रतिशत पानी पीने योग्य नहीं है। रिपोर्ट में स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि जिन इलाकों में भूजल के सैंपल फेल हुए हैं, वहां से पानी की आपूर्ति करना जनता के स्वास्थ्य के साथ गंभीर खिलवाड़ है।

प्रदूषित पानी और जहरीले पदार्थों का गंभीर मिश्रण

सीएजी ने अपनी रिपोर्ट में पानी में हानिकारक पदार्थों और रसायनों के मिश्रण पर गहरी चिंता व्यक्त की है। दिल्ली के कई हिस्सों में भूजल में फ्लोराइड, नाइट्रेट और भारी धातुओं की मात्रा मानक स्तर से कहीं अधिक पाई गई है। ऐसे पानी के सेवन से पेट की बीमारियों के अलावा किडनी और हड्डियों से जुड़ी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। यह रिपोर्ट सीधे तौर पर जल बोर्ड की कार्यप्रणाली और शुद्धिकरण संयंत्रों की क्षमता पर बड़े सवाल उठाती है।

भीषण गर्मी से पहले गहराता जल संकट और जनता की चिंता

दिल्लीवासी पहले ही गर्मी के मौसम में टैंकरों के पीछे लगने वाली लंबी कतारों और पानी की किल्लत से जूझते रहे हैं। अब इस रिपोर्ट ने डर पैदा कर दिया है कि यदि उपलब्ध भूजल का 55% हिस्सा दूषित है, तो आने वाले महीनों में पेयजल की भारी मांग कैसे पूरी होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति राजधानी में 'वॉटर इमरजेंसी' जैसी है जिस पर तुरंत ध्यान देने की जरूरत है।

जिम्मेदारों से उचित कदम उठाने की अपील और भविष्य की राह

मार्च के महीने में ही पारा चढ़ने के साथ लोग पेयजल के लिए परेशान होने लगे हैं। सीएजी की इस रिपोर्ट के बाद सामाजिक कार्यकर्ताओं और विशेषज्ञों ने सरकार से अपील की है कि दूषित भूजल वाले क्षेत्रों की पहचान कर वहां तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था की जाए। साथ ही जल बोर्ड को अपनी प्रयोगशालाओं और शुद्धिकरण की प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने की हिदायत दी गई है ताकि राजधानी के लोगों को बीमारियों से बचाया जा सके।

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