Bengal Elections 2026: ममता के 'कोर' वोट बैंक में सेंधमारी की तैयारी? ओवैसी और हुमायूं कबीर ने हाथ मिलाकर बदला बंगाल का समीकरण
पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 से पहले एक नया 'तीसरा मोर्चा' उभरकर सामने आया है। असदुद्दीन ओवैसी (AIMIM) और टीएमसी के पूर्व नेता हुमायूं कबीर की 'आम जनता उन्नयन पार्टी' ने गठबंधन का ऐलान कर दिया है, जो सत्तारूढ़ टीएमसी के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।
News Tv India हिंदी Official | Verified Expert • 27 Mar, 2026Editor
Mar 24, 2026 • 7:38 AM
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29 days ago
Bengal Elections 2026: ममता के 'कोर' वोट बैंक में सेंधमारी की तैयारी? ओवैसी और हुमायूं कबीर ने हाथ मिलाकर बदला बंगाल का समीकरण
पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 से पहले एक नया 'तीसरा मोर्चा' उभरकर सामने आया है। असदुद्दीन ओवैसी (AIMIM) और टीएमसी के पूर्व नेता हुमायूं कबीर की 'आम जनता उन्नयन पार्टी' ने गठबंधन का ऐलान कर दिया है, जो सत्तारूढ़ टीएमसी के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।
Full Story: https://www.newstvindia.in/bengal-elections-2026-mamata-banerjee-s-core-vote-bank-set-to-be-torn-apart-owaisi-and-humayun-kabir-shake-hands-and-change-bengal-s-equation
Bengal Elections 2026: ममता के 'कोर' वोट बैंक में सेंधमारी की तैयारी? ओवैसी और हुमायूं कबीर ने हाथ मिलाकर बदला बंगाल का समीकरण
कोलकाता/मुर्शिदाबाद: पश्चिम बंगाल में जैसे-जैसे 2026 के विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं, सियासी बिसात पर नई चालें चली जाने लगी हैं। अब तक मुख्य मुकाबला ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच माना जा रहा था, लेकिन एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी और हुमायूं कबीर के गठबंधन ने राज्य में 'तीसरे मोर्चे' की सुगबुगाहट तेज कर दी है। यह नया समीकरण विशेष रूप से मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में टीएमसी के समीकरण बिगाड़ सकता है।
ममता के खिलाफ ओवैसी-हुमायूं कबीर का 'मास्टरस्ट्रोक'
ममता बनर्जी के कभी बेहद करीबी रहे हुमायूं कबीर अब उनके सबसे मुखर विरोधियों में से एक बनकर उभरे हैं। अपनी नई पार्टी 'आम जनता उन्नयन पार्टी' के जरिए उन्होंने ओवैसी की एआईएमआईएम के साथ चुनावी तालमेल बिठाया है। मुर्शिदाबाद और मालदा जैसे क्षेत्रों में हुमायूं कबीर का अच्छा प्रभाव माना जाता है, जहाँ उन्होंने हाल ही में एक बड़ी मस्जिद की नींव रखकर अपनी सियासी जमीन मजबूत करने की कोशिश की है। दूसरी ओर, ओवैसी की पहचान देश भर में अल्पसंख्यक समुदाय के प्रखर नेता के रूप में है। इन दोनों का साथ आना टीएमसी के उस वोट बैंक पर सीधा हमला है, जो सालों से ममता बनर्जी की जीत की नींव रहा है।
किसे फायदा और किसे नुकसान: क्या बीजेपी की राह होगी आसान?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह तीसरा मोर्चा प्रभावी साबित होता है, तो इसका सीधा नुकसान तृणमूल कांग्रेस को उठाना पड़ सकता है क्योंकि अल्पसंख्यक वोटों के बंटने से टीएमसी के उम्मीदवारों की जीत का अंतर कम हो सकता है। विपक्षी दलों के बीच वोटों का बिखराव अक्सर मुख्य विपक्षी दल, इस मामले में बीजेपी के पक्ष में जाता है। मुर्शिदाबाद, हावड़ा और कोलकाता के कुछ हिस्सों में अब मुकाबला द्विपक्षीय न रहकर त्रिकोणीय होने की संभावना है, जिससे चुनावी नतीजे काफी अप्रत्याशित हो सकते हैं।
बंगाल की राजनीति में कांग्रेस और वाम दल पहले से ही अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं, ऐसे में ओवैसी और हुमायूं कबीर का मोर्चा खुद को एक मजबूत विकल्प के रूप में पेश कर रहा है। हालांकि, सत्तारूढ़ टीएमसी और बीजेपी दोनों ही इस मोर्चे को गंभीरता से ले रहे हैं। टीएमसी इसे बीजेपी की 'बी-टीम' बताकर हमलावर है, तो वहीं बीजेपी इसे बंगाल की जनता का ममता सरकार से मोहभंग होने का संकेत मान रही है।
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अभी चुनाव में समय शेष है और ऊंट किस करवट बैठेगा, यह कहना जल्दबाजी होगी। लेकिन इतना तय है कि ओवैसी और हुमायूं कबीर की जुगलबंदी ने बंगाल चुनाव 2026 को और भी दिलचस्प बना दिया है। सबकी नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह तीसरा मोर्चा केवल वोट काटने तक सीमित रहेगा या वाकई बंगाल की सत्ता का किंगमेकर बनकर उभरेगा।