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LIVE NOWUP Politics: NDA की अहम बैठक आज, सीट शेयरिंग पर शुरू होगी शुरुआती चर्चा; सहयोगी दलों के नेता पहुंचे होटल ताज
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच भारतीय जनता पार्टी ने संगठनात्मक गतिविधियां तेज कर दी हैं। इसी क्रम में शनिवार को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन एनडीए के सहयोगी दलों के नेताओं के साथ अहम बैठक करेंगे। सूत्रों के अनुसार, इस बैठक में आगामी विधानसभा चुनाव के लिए सीट शेयरिंग के प्रारंभिक फार्मूले पर चर्चा हो सकती है।
हालांकि, सीटों के अंतिम बंटवारे पर कोई औपचारिक फैसला होने की संभावना नहीं है, लेकिन सहयोगी दलों की राय और उनके चुनावी दावों को लेकर प्रारंभिक मंथन किया जाएगा।
इन सहयोगी दलों के साथ होगी चर्चा
बैठक में भाजपा नेतृत्व राष्ट्रीय लोकदल (रालोद), सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा), निषाद पार्टी और अपना दल (एस) के नेताओं के साथ अलग-अलग और संयुक्त रूप से बातचीत करेगा।
सूत्रों के मुताबिक, सहयोगी दल अपने-अपने प्रभाव वाले क्षेत्रों, संगठनात्मक स्थिति और संभावित सीटों को लेकर अपना पक्ष भाजपा नेतृत्व के सामने रखेंगे।
चुनावी फीडबैक भी देंगे सहयोगी दल
बैठक के दौरान सहयोगी दलों के नेता अपने-अपने क्षेत्रों की राजनीतिक स्थिति, जातीय समीकरण, संगठन की मजबूती और चुनावी संभावनाओं से जुड़ी विस्तृत जानकारी भी भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन को देंगे। इस फीडबैक के आधार पर आगामी चुनावी रणनीति तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ा जाएगा।
होटल ताज पहुंचे सहयोगी दलों के नेता
बैठक में शामिल होने के लिए एनडीए के प्रमुख सहयोगी दलों के नेता लखनऊ स्थित होटल ताज पहुंच चुके हैं।
बैठक में शामिल होने वालों में निषाद पार्टी के अध्यक्ष डॉ. संजय निषाद, सुभासपा प्रमुख ओम प्रकाश राजभर, अपना दल (एस) के कार्यकारी अध्यक्ष आशीष पटेल तथा राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) की ओर से त्रिलोक त्यागी शामिल हैं।
2027 चुनाव की रणनीति पर रहेगा फोकस
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह बैठक केवल सीट शेयरिंग तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि बूथ स्तर पर समन्वय, संयुक्त चुनाव अभियान और एनडीए के साझा एजेंडे पर भी चर्चा हो सकती है। उत्तर प्रदेश में लगातार तीसरी बार सरकार बनाने के लक्ष्य के साथ भाजपा और उसके सहयोगी दल अभी से चुनावी तैयारियों को धार देने में जुटे हैं।
अलीगंज अग्निकांड में सामने आई बड़ी लापरवाही, बायोमेट्रिक लॉक बना जानलेवा, 4 अधिकारी सस्पेंड
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ का पॉश इलाका अलीगंज एक दर्दनाक हादसे के बाद शोक में डूबा हुआ है। यहां एक इमारत में लगी भीषण आग में 15 बच्चों की मौत हो गई। हादसे के बाद जब राहत और बचाव दल ने अंदर पहुंचकर हालात का जायजा लिया, तो कई ऐसी बातें सामने आईं, जिन्होंने सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्रारंभिक जांच में पता चला है कि आवासीय उपयोग के लिए बनी इस इमारत का इस्तेमाल व्यावसायिक गतिविधियों के लिए किया जा रहा था। भवन में गेमिंग जोन, एनीमेशन सेंटर, पेट शॉप और अन्य प्रतिष्ठान संचालित किए जा रहे थे।
2016 में जारी हुआ था ध्वस्तीकरण आदेश
Lucknow Aliganj Fire के बाद सामने आए दस्तावेजों के अनुसार, वर्ष 2016 में अवैध निर्माण के आरोपों के चलते इस इमारत के खिलाफ ध्वस्तीकरण का आदेश जारी किया गया था। हालांकि, दो महीने के भीतर ही यह आदेश निरस्त कर दिया गया।
अब हादसे के बाद यह सवाल उठ रहे हैं कि जब भवन में अनियमितताओं की जानकारी पहले से थी, तो उसके बाद क्या कार्रवाई हुई और आदेश वापस लेने के पीछे क्या वजह थी।
बायोमेट्रिक लॉक सिस्टम ने बढ़ाई मुश्किलें
पीड़ित परिवारों के अनुसार, भवन के मुख्य प्रवेश द्वार पर ऑटोमैटिक बायोमेट्रिक लॉक सिस्टम लगा हुआ था। यह गेट अंगूठे के निशान के जरिए खुलता और बंद होता था।
बताया जा रहा है कि आग लगने के बाद बिजली आपूर्ति बाधित हो गई, जिससे लॉकिंग सिस्टम ने काम करना बंद कर दिया। ऐसे में अंदर मौजूद लोगों के लिए बाहर निकलना बेहद मुश्किल हो गया।
परिजनों ने यह भी आरोप लगाया है कि सूचना दिए जाने के काफी देर बाद दमकल की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। हालांकि, इस पूरे मामले की जांच जारी है।
बाहर निकलने का दूसरा रास्ता नहीं था
इमारत के चारों ओर अन्य मकान होने के कारण बाहर निकलने के वैकल्पिक रास्ते सीमित थे। आग सामने के हिस्से में फैलने के बाद कई लोग पीछे की ओर भागे और जान बचाने की कोशिश करने लगे।
कुछ लोगों ने पाइप और तारों के सहारे नीचे उतरने की कोशिश की। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, एक युवक ने खिड़की का शीशा तोड़कर बाहर निकलने का प्रयास किया, लेकिन गंभीर रूप से घायल हो गया।
धुएं से दम घुटने से गई कई जानें
जैसे-जैसे आग और धुआं बढ़ता गया, कई बच्चे खुद को बचाने के लिए बाथरूम में चले गए। उन्होंने पानी चलाकर गर्मी से बचने की कोशिश की, लेकिन पर्याप्त वेंटिलेशन नहीं होने के कारण धुआं तेजी से अंदर भर गया।
जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि मौतों की प्रमुख वजह आग थी या धुएं के कारण दम घुटना।
फायर सेफ्टी के इंतजाम नहीं मिले
अग्निशमन विभाग की शुरुआती जांच में सामने आया है कि भवन में स्मोक डिटेक्टर और आग बुझाने वाले उपकरण पर्याप्त संख्या में मौजूद नहीं थे। इसके अलावा आपातकालीन निकास व्यवस्था को लेकर भी गंभीर सवाल उठे हैं।
दमकल कर्मियों को अंदर पहुंचने के लिए पड़ोसी भवनों की दीवारें तोड़नी पड़ीं। काफी मशक्कत के बाद राहत और बचाव अभियान चलाया गया।
सरकार का बड़ा एक्शन
Lucknow Aliganj Fire मामले में उत्तर प्रदेश सरकार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए चार अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। वहीं, भवन के मालिक को गिरफ्तार कर लिया गया है।
सरकार ने पूरे मामले की विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं। माना जा रहा है कि जांच के दौरान भवन की स्वीकृतियों, सुरक्षा मानकों और पूर्व में हुई प्रशासनिक कार्रवाइयों से जुड़े सभी रिकॉर्ड की भी समीक्षा की जाएगी।
यह हादसा एक बार फिर इस बात की याद दिलाता है कि भवन सुरक्षा मानकों और नियमित निरीक्षण में किसी भी तरह की लापरवाही कितनी बड़ी त्रासदी का कारण बन सकती है।
जिस भवन में लगी आग, उसे गिराने का आदेश 2016 में हुआ था जारी, फिर क्यों बदल गया फैसला?
लखनऊ के अलीगंज इलाके में हुए दर्दनाक अग्निकांड के बाद अब उस भवन से जुड़े पुराने दस्तावेज और प्रशासनिक फैसले चर्चा के केंद्र में आ गए हैं। जांच के दौरान सामने आया है कि जिस इमारत में यह हादसा हुआ, उसके खिलाफ वर्ष 2016 में अवैध निर्माण को लेकर ध्वस्तीकरण का आदेश जारी किया गया था। लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि यह आदेश दो महीने से भी कम समय के भीतर वापस ले लिया गया था।
इस खुलासे के बाद लखनऊ अलीगंज अग्निकांड (Lucknow Aliganj Fire) से जुड़े कई नए सवाल खड़े हो गए हैं। लोग यह जानना चाहते हैं कि आखिर जब भवन में अनधिकृत निर्माण पाया गया था, तो ध्वस्तीकरण की कार्रवाई आगे क्यों नहीं बढ़ सकी।
1980 में हुआ था भवन का आवंटन
उपलब्ध दस्तावेजों के मुताबिक, अलीगंज योजना के सेक्टर-डी स्थित भवन संख्या एमएस/102/डी का आवंटन 11 जुलाई 1980 को लॉटरी प्रणाली के तहत विजय कुमार, पुत्र रामेश्वर सहाय, के नाम किया गया था।
यह आवंटन किराया-क्रय पद्धति के आधार पर किया गया था। बाद में 4 नवंबर 1980 को आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद भवन का कब्जा आवंटी को सौंप दिया गया।
समय के साथ बदलता रहा स्वामित्व
करीब 25 साल बाद वर्ष 2005 में इस संपत्ति का स्वामित्व विक्रय विलेख के माध्यम से विजय कुमार और उनकी पत्नी उषा के नाम दर्ज किया गया। इसके बाद 19 जनवरी 2013 को दोनों ने यह भवन वीरेन्द्र प्रताप शुक्ला और सुरेन्द्र प्रताप शुक्ला को बेच दिया।
नए स्वामित्व के बाद 7 अगस्त 2014 को लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) ने दोनों खरीदारों के पक्ष में नामांतरण की प्रक्रिया पूरी कर दी।
2014 में मिला था मानचित्र का अनुमोदन
करीब 1992 वर्गफीट क्षेत्रफल वाले इस भवन का नक्शा 20 अगस्त 2014 को स्वतः मानचित्र योजना के तहत आवासीय उपयोग के लिए स्वीकृत किया गया था।
हालांकि, कुछ समय बाद भवन में अनधिकृत निर्माण की शिकायतें सामने आने लगीं। शिकायतों के आधार पर लखनऊ विकास प्राधिकरण ने वीरेन्द्र प्रताप शुक्ला के खिलाफ मुकदमा संख्या 08/2016 दर्ज किया।
जांच के बाद जारी हुआ था ध्वस्तीकरण आदेश
मामले की जांच के बाद विहित प्राधिकारी ने 10 मई 2016 को भवन में पाए गए अवैध निर्माण के खिलाफ ध्वस्तीकरण का आदेश पारित किया। इस आदेश का उद्देश्य अनधिकृत हिस्सों को हटाना था।
लेकिन इसके बाद घटनाक्रम ने अप्रत्याशित मोड़ ले लिया। महज दो महीने के भीतर, 5 जुलाई 2016 को यह आदेश निरस्त कर दिया गया। इसके पीछे क्या कारण थे, इसे लेकर अब कई तरह के सवाल उठ रहे हैं।
अग्निकांड के बाद फिर चर्चा में आया पुराना फैसला
लखनऊ अलीगंज अग्निकांड (Lucknow Aliganj Fire) के बाद यह पुराना मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। स्थानीय लोगों और कई जानकारों का कहना है कि यदि अवैध निर्माण को लेकर कार्रवाई की गई थी, तो ध्वस्तीकरण आदेश वापस लेने की वजह सार्वजनिक होनी चाहिए।
लोग यह भी सवाल उठा रहे हैं कि उस समय प्रशासन ने किन तथ्यों के आधार पर अपना फैसला बदला और क्या सभी प्रक्रियाओं का पालन किया गया था।
पुराने रिकॉर्ड खंगाल सकती हैं जांच एजेंसियां
माना जा रहा है कि हादसे के बाद जांच एजेंसियां भवन से जुड़े सभी पुराने दस्तावेज, स्वीकृत मानचित्र, स्वामित्व परिवर्तन और वर्ष 2016 में लिए गए फैसलों की विस्तार से समीक्षा कर सकती हैं।
लखनऊ अलीगंज अग्निकांड (Lucknow Aliganj Fire) ने न सिर्फ भवन सुरक्षा बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता और अवैध निर्माण के मामलों में कार्रवाई की प्रक्रिया को लेकर भी कई अहम सवाल खड़े कर दिए हैं। आने वाले दिनों में जांच आगे बढ़ने के साथ इस मामले से जुड़े और भी तथ्य सामने आ सकते हैं।
लखनऊ अग्निकांड में बड़ी कार्रवाई, चार अधिकारी निलंबित; तीन आरोपी गिरफ्तार, बिल्डिंग मालिक फरार
लखनऊ : राजधानी लखनऊ के अलीगंज इलाके में हुए भीषण अग्निकांड (Lucknow Fire Incident) के बाद प्रशासन ने जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर चार अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है, जबकि पुलिस ने मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। दूसरी ओर, जिस इमारत में यह दर्दनाक हादसा हुआ, उसका मालिक घटना के बाद से फरार बताया जा रहा है।
मुख्यमंत्री के निर्देश पर चार अधिकारियों पर गिरी गाज
अग्निकांड के बाद सामने आई शुरुआती लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार ने चार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की है। निलंबित अधिकारियों में एक्सईएन कलेक्शन जानकीपुरम गौरव कुमार, एफएसएसओ इंदिरा नगर कमलेन्द्र कुमार सिंह, सहायक अभियंता अनिल कुमार और जूनियर इंजीनियर प्रमोद पांडे शामिल हैं।
सरकार का मानना है कि इस मामले में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और जांच में जो भी अधिकारी या व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि इस हादसे के जिम्मेदार लोगों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
छह नामजद आरोपियों समेत कई लोगों के खिलाफ दर्ज हुआ मामला
अलीगंज थाना क्षेत्र में हुई इस घटना के संबंध में पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस के मुताबिक, अपराध संख्या 115/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के साथ-साथ उत्तर प्रदेश अग्निशमन सेवा अधिनियम की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।
इस एफआईआर में छह नामजद आरोपियों के अलावा अन्य जिम्मेदार लोगों को भी शामिल किया गया है। जांच एजेंसियां अब पूरे मामले में आग लगने के कारणों और सुरक्षा मानकों में हुई कथित अनियमितताओं की गहराई से पड़ताल कर रही हैं।
तीन आरोपियों को पुलिस ने किया गिरफ्तार
मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में रामकृष्ण उपाध्याय, वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला और तुषॉक कृष्णा जायसवाल शामिल हैं। पुलिस इन तीनों से पूछताछ कर रही है और यह जानने की कोशिश की जा रही है कि हादसे में उनकी भूमिका क्या रही।
अधिकारियों का कहना है कि मामले से जुड़े अन्य लोगों की तलाश भी जारी है और जांच के आधार पर आगे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। पुलिस की विभिन्न टीमें लगातार कार्रवाई में जुटी हुई हैं।
हादसे के बाद फरार हुआ बिल्डिंग मालिक
अग्निकांड के बाद इमारत के मालिक के फरार होने की खबर ने मामले को और गंभीर बना दिया है। स्थानीय लोगों और गार्ड के अनुसार, जिस भवन में आग लगी थी उसके मालिक बीपी शुक्ला और उनका परिवार घटना के बाद से अपने निजी आवास से गायब हैं।
बताया जा रहा है कि उनके घर पर ताला लगा हुआ है और परिवार के सदस्य कहीं बाहर चले गए हैं। घर की निगरानी कर रहे गार्ड ने बताया कि वह पिछले एक सप्ताह से वहां काम कर रहा है और उसे केवल मकान की देखभाल के लिए रखा गया था। घटना की जानकारी उसे ड्यूटी पर पहुंचने के बाद मिली।
अब पुलिस बिल्डिंग मालिक की तलाश में जुटी हुई है और उसके संभावित ठिकानों का पता लगाया जा रहा है।
हादसे के कारणों की हर पहलू से जांच जारी
लखनऊ अग्निकांड ने एक बार फिर शहरों में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था और भवन मानकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन की ओर से पहले ही विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया जा चुका है, जो पूरे मामले की विस्तृत जांच कर सात दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपेगा।
फिलहाल पुलिस और प्रशासन दोनों स्तरों पर कार्रवाई जारी है। सरकार का कहना है कि इस हादसे के पीछे जो भी लोग जिम्मेदार पाए जाएंगे, उनके खिलाफ कानून के तहत कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। वहीं, पीड़ित परिवारों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने के लिए भी प्रशासन लगातार प्रयास कर रहा है।
बंगाल में सियासी हलचल: अभिषेक बनर्जी दूसरे अस्पताल में भर्ती, ममता ने लगाए 'इलाज में बाधा' के गंभीर आरोप
कोलकाता : तृणमूल कांग्रेस के महासचिव और पार्टी के लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी को सोनारपुर में हुए हमले में लगी चोटों के बाद कोलकाता के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। यह कदम पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के आग्रह पर उठाया गया, जिन्होंने बाद में उन्हें दूसरे अस्पताल में स्थानांतरित करवा दिया।
शुरुआती भर्ती और त्वरित स्थानांतरण
सोनारपुर से बाहर निकाले जाने के बाद, अभिषेक बनर्जी को पहले पूर्वी महानगर बाईपास के पास स्थित एक निजी अस्पताल के आपातकालीन विभाग में लाया गया। कुछ ही देर में, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अपनी मां लता बनर्जी के साथ अस्पताल पहुंचीं और सीधे आपातकालीन विभाग में गईं, जहां अभिषेक बनर्जी का प्रारंभिक परीक्षण और इलाज चल रहा था।
हालांकि, सभी को आश्चर्यचकित करते हुए, ममता बनर्जी अस्पताल पहुंचने के 30 मिनट के भीतर ही अपने भतीजे के साथ अस्पताल परिसर से निकल गईं। उस समय अभिषेक बनर्जी अस्पताल का मरीज एप्रन पहने व्हीलचेयर पर थे।
ममता बनर्जी के गंभीर आरोप
अस्पताल परिसर छोड़ने से पहले, ममता बनर्जी ने मीडियाकर्मियों से बात की। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने भतीजे को दूसरे अस्पताल में स्थानांतरित करने का फैसला किया है, क्योंकि उन्हें वहां 'उचित इलाज' नहीं मिल रहा था।
मुख्यमंत्री ने अप्रत्यक्ष रूप से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने मीडियाकर्मियों से कहा, 'हम अभिषेक को यहां से स्थानांतरित कर रहे हैं। उन्हें यहां उचित इलाज नहीं मिल रहा है। शायद यह किसी उच्च अधिकारी के निर्देश के कारण है।'
बाद में, अभिषेक बनर्जी को मध्य कोलकाता के मिंटो पार्क स्थित एक अन्य निजी अस्पताल में स्थानांतरित कर दिया गया और वहां भर्ती कराया गया। जिस पहले अस्पताल में उन्हें भर्ती कराया गया था, उसके अधिकारियों ने ममता बनर्जी द्वारा लगाए गए आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।
सोनारपुर में हमला और सार्वजनिक विरोध
यह पूरा घटनाक्रम तब सामने आया जब अभिषेक बनर्जी को दिन में सोनारपुर में स्थानीय लोगों के भारी विरोध का सामना करना पड़ा। वे कथित तौर पर चुनाव के बाद हुई हिंसा के शिकार तृणमूल कांग्रेस कार्यकर्ताओं के परिवार वालों से मिलने पहुंचे थे।
प्रदर्शनकारियों ने उन पर हमला किया, थप्पड़ मारे और अंडे फेंके। भीड़ के बीच, अभिषेक बनर्जी को अपने सिर की सुरक्षा के लिए क्रिकेट हेलमेट पहनना पड़ा, क्योंकि कुछ अंडे उन्हें लग चुके थे। वे शहीद पार्टी कार्यकर्ता के घर पहुंचे और उनके परिवार वालों से बातचीत की।
सुरक्षा के बीच वापसी और प्रदर्शनकारियों का आक्रोश
बाद में, पश्चिम बंगाल पुलिस और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) के जवानों ने अभिषेक बनर्जी को सोनारपुर से सुरक्षित बाहर निकाला। जब उन्हें बाहर ले जाया जा रहा था, तब भी सड़क के दोनों ओर खड़ी प्रदर्शनकारी महिलाएं लगातार नारे लगा रही थीं और अभिषेक बनर्जी को 'चोर' कहकर संबोधित कर रही थीं, जो क्षेत्र में व्याप्त आक्रोश को दर्शाता है।
ममता बनर्जी ने इस पूरी घटना पर अपनी प्रतिक्रिया सोशल मीडिया पर दी। उन्होंने एक पोस्ट जारी कर इस घटना के लिए सीधे तौर पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और राज्य सरकार को दोषी ठहराया है।
सीएम योगी ने अपर्णा यादव के घर प्रतीक यादव को दी श्रद्धांजलि, सामने आई निधन की वजह
मुख्य बातें
- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपर्णा यादव के आवास पर प्रतीक यादव को दी श्रद्धांजलि।
- प्रतीक यादव का बुधवार सुबह लखनऊ के सिविल अस्पताल में निधन हो गया था।
- पोस्टमार्टम रिपोर्ट में शरीर में रक्त का थक्का जमने से हुई मौत की पुष्टि हुई।
लखनऊ, 13 मई। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को भाजपा नेता और राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव के लखनऊ स्थित आवास पर पहुंचकर उनके दिवंगत पति प्रतीक यादव को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दुखद घड़ी में मुख्यमंत्री ने शोकाकुल परिवार को ढांढस बंधाया। उनके साथ वित्त मंत्री सुरेश खन्ना भी मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर इस संबंध में जानकारी साझा की। उन्होंने लिखा, ''उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव के लखनऊ स्थित आवास पर पहुंचकर उनके दिवंगत पति प्रतीक यादव के पार्थिव शरीर पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी एवं शोकाकुल परिवार को ढांढस बंधाया।'' यह भावुक क्षण परिवार के लिए सांत्वना का एक महत्वपूर्ण पल था।
इससे पहले, मुख्यमंत्री योगी ने प्रतीक यादव के आकस्मिक निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए 'एक्स' पर एक पोस्ट किया था। उन्होंने लिखा था, ''उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री, 'पद्म विभूषण', स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव के पुत्र एवं उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव के पति प्रतीक यादव का आकस्मिक निधन अत्यंत दुखद है। विनम्र श्रद्धांजलि। मेरी संवेदनाएं शोक संतप्त परिजनों के साथ हैं। प्रभु श्रीराम से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्मा को सद्गति एवं शोकाकुल परिजनों को यह अथाह दु:ख सहन करने की शक्ति प्रदान करें।''
समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव के छोटे भाई प्रतीक यादव का बुधवार की सुबह अचानक निधन हो गया था। उन्होंने लखनऊ के सिविल अस्पताल में अपनी अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर से राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर दौड़ गई। समाजवादी पार्टी (सपा) की सांसद डिंपल यादव भी प्रतीक यादव को अंतिम विदाई देने के लिए अपर्णा यादव के आवास पहुंची थीं।
प्रतीक यादव के निधन के बाद उनकी पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आई है, जिसने उनकी मौत का कारण स्पष्ट किया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, शरीर में खून का थक्का बनने के बाद प्रतीक की हालत बिगड़ी थी। शरीर के निचले हिस्से से यह खून का थक्का ऊपरी हिस्से तक पहुंच गया, जिससे उनकी आर्टरी और फेफड़ों में गंभीर संक्रमण हो गया। इसके परिणामस्वरूप, कार्डियक अरेस्ट से उनकी मौत हो गई। यह जानकारी परिवार और शुभचिंतकों के लिए बेहद पीड़ादायक रही।
सपा कुनबे से बड़ी और दुखद खबर: अखिलेश यादव के भाई प्रतीक यादव का निधन, शोक में डूबा राजनीतिक जगत
उत्तर प्रदेश की राजनीति के दिग्गज रहे स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव के छोटे पुत्र और भाजपा नेत्री अपर्णा यादव के पति प्रतीक यादव का बुधवार को निधन हो गया। महज 38 वर्ष की आयु में उनके निधन की खबर ने पूरे प्रदेश को स्तब्ध कर दिया है।
चेन्नई में 'थलपति' का राजतिलक: जोसेफ विजय बने मुख्यमंत्री; मां शोभा और तृषा कृष्णन की केमिस्ट्री ने लूटी महफ़िल
चेन्नई : अभिनेता से राजनेता बने सी. जोसेफ विजय रविवार को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। इस ऐतिहासिक मौके के लिए चेन्नई के जवाहरलाल नेहरू इंडोर स्टेडियम में भव्य तैयारियां की गई। पूरे शहर में इस समारोह को लेकर जबरदस्त उत्साह देखने को मिला।

विजय के समर्थकों के साथ-साथ फिल्म और राजनीतिक जगत की कई बड़ी हस्तियां भी इस कार्यक्रम में शामिल हुए, जिससे चलते चेन्नई पुलिस और प्रशासन ने सुरक्षा के बेहद कड़े इंतजाम किए हैं।
स्टेडियम और उसके आसपास भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है। आने-जाने वाले वाहनों की सख्ती से जांच की जा रही है।
शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने वाले खास मेहमानों के लिए स्टेडियम में बैठने की खास व्यवस्था की गई थी।
सबसे आगे की लाइन में विजय के माता-पिता, मशहूर फिल्म निर्देशक एस. ए. चंद्रशेखर और शोभा चंद्रशेखर के लिए सीटें आरक्षित की गई। इसके अलावा, अभिनेत्री तृषा कृष्णन और उनकी मां को भी उसी लाइन में सीटें दी गई।
समारोह शुरू होने से पहले एक ऐसा दृश्य देखने को मिला जिसने वहां मौजूद लोगों और टीवी चैनलों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। अभिनेत्री तृषा कृष्णन को विजय की मां शोभा चंद्रशेखर से प्यार से बात करते देखा गया। दोनों के बीच हुई यह मुलाकात सोशल मीडिया पर अब चर्चा का विषय बन गई।
कार्यक्रम के दौरान तृषा कई अन्य कलाकारों और फिल्मी हस्तियों से भी मिलती-जुलती दिखाई दीं। कई मेहमान अभिनेत्री के साथ तस्वीरें खिंचवाते दिखे। विजय के शपथ ग्रहण से पहले पूरे स्टेडियम में जश्न जैसा माहौल दिखाई दिया।
विजय का मुख्यमंत्री बनना तमिलनाडु की राजनीति में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। उनकी पार्टी तमिलागा वेत्री कझगम (टीवीके) ने हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में शानदार प्रदर्शन करते हुए 234 सदस्यीय विधानसभा में 108 सीटें जीतीं। हालांकि बहुमत के लिए 118 सीटों की जरूरत थी, इसलिए पार्टी अपने दम पर सरकार नहीं बना सकी थी।
इसके बाद कांग्रेस, सीपीआई, सीपीआई-एम, वीसीके और आईयूएमएल पार्टियों ने विजय की पार्टी को समर्थन देने का फैसला किया। इन दलों के सहयोग से विजय के नेतृत्व वाले गठबंधन के पास कुल 120 विधायकों का समर्थन हो गया, जिससे सरकार बनाने का रास्ता साफ हो गया।
West Bengal Election Result LIVE: भबानीपुर में ममता 7 हजार वोटों से आगे
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Kerala Result LIVE: केरल चुनाव: कांग्रेस के चांडी ओमन को मिली जीत
केरल की पुथुपल्ली विधानसभा सीट से कांग्रेस के विधायक चांडी ओमन ने सोमवार को इसी सीट पर 52,907 मतों के बड़े अंतर से जीत हासिल की. वह केरल के पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत ओमान चांडी के बेटे हैं. केरल में नौ अप्रैल को विधानसभा चुनाव के लिए मतदान हुआ था. निर्वाचन आयोग के अनुसार चांडी को मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के उम्मीदवार के.एम. राधाकृष्णन के खिलाफ कुल 84,031 वोट मिले. राधाकृष्णन को कुल 31,124 वोट हासिल हुए.