Economic Survey 2026: देश में 'पेंशन और बीमा' की लहर, स्वास्थ्य बीमा ने मोटर इंश्योरेंस को पछाड़ा; जानें NPS और APY में कितनी हुई बढ़ोतरी!
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा संसद में पेश किए गए आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 ने देश में मजबूत होती सामाजिक सुरक्षा की पुष्टि की है। सर्वेक्षण के अनुसार, पिछले एक दशक में पेंशन योजनाओं (NPS/APY) और बीमा क्षेत्र में न केवल ग्राहकों की संख्या बढ़ी है, बल्कि मैनेज्ड एसेट्स (AUM) में भी जबरदस्त वृद्धि देखी गई है।
News Tv India हिंदी Official | Verified Expert • 27 Mar, 2026Editor
Jan 29, 2026 • 4:54 PM
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Economic Survey 2026: देश में 'पेंशन और बीमा' की लहर, स्वास्थ्य बीमा ने मोटर इंश्योरेंस को पछाड़ा; जानें NPS और APY में कितनी हुई बढ़ोतरी!
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा संसद में पेश किए गए आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 ने देश में मजबूत होती सामाजिक सुरक्षा की पुष्टि की है। सर्वेक्षण के अनुसार, पिछले एक दशक में पेंशन योजनाओं (NPS/APY) और बीमा क्षेत्र में न केवल ग्राहकों की संख्या बढ़ी है, बल्कि मैनेज्ड एसेट्स (AUM) में भी जबरदस्त वृद्धि देखी गई है।
Full Story: https://www.newstvindia.in/economic-survey-2026-wave-of-pension-and-insurance-in-the-country-health-insurance-overtakes-motor-insurance-find-out-how-much-nps-and-apy-have-increased
Economic Survey 2026: देश में 'पेंशन और बीमा' की लहर, स्वास्थ्य बीमा ने मोटर इंश्योरेंस को पछाड़ा; जानें NPS और APY में कितनी हुई बढ़ोतरी!
नई दिल्ली : देश में पिछले कुछ वर्षों में पेंशन और बीमा कवर तेजी से बढ़ा है और इससे सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। यह जानकारी वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की ओर से गुरुवार को संसद में जारी किए गए आर्थिक सर्वेक्षण में दी गई।
आर्थिक सर्वेक्षण में सरकार ने कहा कि देश के बीमा और पेंशन नियामक निकायों आईआरडीएआई और पीएफआरडीए ने वित्तीय समावेशन को गहरा करने और वंचित वर्गों को सुरक्षा देने के लिए सुधारों को आगे बढ़ाया है।
पेंशन फंड रेगुलेटरी डेवलपमेंट अथॉरिटी (पीएफआरडीए) ने एक मजबूत पेंशन व्यवस्था की नींव रखी है, जो अपने उपभोक्ताओं को कई तरह के विकल्प देता है और इस व्यवस्था में बड़ी आबादी को शामिल करता है। देश की पेंशन व्यवस्था बहु-स्तरीय व्यवस्था है जिसमें मार्केट से जुड़ा नेशनल पेंशन सिस्टम (एनपीएस), 2025 में शुरू की गई सरकार समर्थित यूनिफाइड पेंशन स्कीम (यूपीएल), और ज्यादा कवरेज के लिए कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) और अटल पेंशन योजना (एपीवाई) जैसी दूसरी योजनाएं शामिल हैं।
सर्वेक्षण में बताया गया है कि पिछले दशक (वित्त वर्ष 15 से वित्त वर्ष 25) में, एनपीएस ग्राहक 9.5 प्रतिशत की सीएजीआर से बढ़े हैं और एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (एयूएम) में 37.3 प्रतिशत की सीएजीआर से तेज बढ़ोतरी हुई है। इसी तरह, 2016 में शुरू होने के बाद से, एपीवाई ग्राहकों में 43.7 प्रतिशत की मजबूत सीएजीआर से बढ़ोतरी हुई है और एयूएम ने 64.5 प्रतिशत की सीएजीआर से शानदार वृद्धि दिखाई है।
इसके साथ आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया कि भारतीय बीमा क्षेत्र '2047 तक सभी के लिए बीमा' की सोच से प्रेरित होकर एक महत्वपूर्ण बदलाव से गुजर रहा है। भारतीय बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई) एक सिद्धांत-आधारित फ्रेमवर्क की ओर बढ़ा है जो नियमों को मजबूत करता है, अनुपालन का बोझ कम करता है, और बीमा कंपनियों को नवाचार के लिए अधिक लचीलापन देता है। इस बीच, सबका बीमा सबकी रक्षा (बीमा कानूनों में संशोधन) बीमा व्यवस्था को डिजिटल करने और कवरेज को लोकतांत्रिक बनाने की अपनी प्रतिबद्धता को दिखाता है।
सर्वेक्षण में आगे कहा गया है कि 'गैर-जीवन' बीमा खंड में संरचनात्मक बदलाव साफ दिख रहे हैं, जहां स्वास्थ्य बीमा, जो कुल घरेलू प्रीमियम का 41 प्रतिशत है, ने मोटर बीमा को पीछे छोड़कर सबसे बड़ा बिजनेस बन गया है। 'गैर-जीवन' क्षेत्र में नेट इनकर्ड क्लेम वित्त वर्ष 2021 से वित्त वर्ष 2025 में 70 प्रतिशत से अधिक बढ़कर 1.9 लाख करोड़ रुपए हो गए। इसका मुख्य कारण स्वास्थ्य और मोटर खंड हैं। जबकि, जीवन बीमा खंड इस क्षेत्र पर हावी है, जिसके पास कुल एयूएम का 91 प्रतिशत है और प्रीमियम इनकम में लगभग 75 प्रतिशत का योगदान है। समीक्षा में बताया गया है कि जीवन बीमा कंपनियों ने वित्त वर्ष 2025 में कुल 6.3 लाख करोड़ रुपए के बेनिफिट्स का भुगतान किया।
आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया कि जीवन बीमा और व्यक्तिगत स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी पर जीएसटी में छूट से पॉलिसीधारकों को काफी राहत मिली है और बीमा सेवाएं अधिक किफायती हो गई हैं। ‘सबका बीमा, सबकी सुरक्षा एक्ट, 2025’ के लागू होने से बीमा क्षेत्र में लंबे समय से इंतजार किए जा रहे सुधार होंगे। इसमें यह भी कहा गया है कि एफडीआई सीमा को 100 प्रतिशत तक बढ़ाने के साथ-साथ दूसरे संशोधनों से बिजनेस करने में आसानी होगी और बीमा क्षेत्र के विस्तार का रास्ता खुलेगा।