Wind Energy India: देश में पवन ऊर्जा क्षमता 57,443 मेगावाट पहुंची, 2025-26 में 106 अरब यूनिट बिजली का उत्पादन
Wind Energy India: केंद्र सरकार ने लोकसभा में बताया कि देश की पवन ऊर्जा क्षमता 57,443 मेगावाट तक पहुंच गई है। वित्त वर्ष 2025-26 में विंड एनर्जी से 106 अरब यूनिट बिजली का उत्पादन हुआ।
Shivranjani Purohit Verified Public Figure • 11 Jul, 2026Journalist
Wind Energy India: देश में पवन ऊर्जा क्षमता 57,443 मेगावाट पहुंची, 2025-26 में 106 अरब यूनिट बिजली का उत्पादन
Wind Energy India: केंद्र सरकार ने लोकसभा में बताया कि देश की पवन ऊर्जा क्षमता 57,443 मेगावाट तक पहुंच गई है। वित्त वर्ष 2025-26 में विंड एनर्जी से 106 अरब यूनिट बिजली का उत्पादन हुआ।
“Wind Energy India: देश में पवन ऊर्जा क्षमता 57,443 मेगावाट पहुंची, 2025-26 में 106 अरब यूनिट बिजली का उत्पादन”
News TV India
https://www.newstvindia.in/s/a15d40
Date
22 July 2026
QR Code
https://www.newstvindia.in/s/a15d40
Wind Energy India: देश में पवन ऊर्जा क्षमता 57,443 मेगावाट पहुंची, 2025-26 में 106 अरब यूनिट बिजली का उत्पादन
भारत में पवन ऊर्जा (Wind Energy) के क्षेत्र में लगातार विस्तार हो रहा है। केंद्र सरकार ने लोकसभा में जानकारी दी कि देश में स्थापित विंड एनर्जी परियोजनाओं की कुल क्षमता 57,443 मेगावाट तक पहुंच गई है। सरकार के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान इन परियोजनाओं से 106 अरब यूनिट (बिलियन यूनिट) बिजली का उत्पादन किया गया।
सरकार का कहना है कि नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में लगातार निवेश, नई नीतियों और ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार से पवन ऊर्जा उत्पादन में वृद्धि दर्ज की जा रही है।
Wind Energy India: दुनिया में चौथे स्थान पर भारत
लोकसभा में लिखित उत्तर में नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री श्रीपद येसो नाइक ने बताया कि ग्लोबल विंड एनर्जी काउंसिल (GWEC) रिपोर्ट 2026 के अनुसार, 31 दिसंबर 2025 तक स्थापित पवन ऊर्जा क्षमता के मामले में भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा देश रहा।
क्या आप WhatsApp पर न्यूज़ अपडेट पाना चाहते हैं?
WhatsApp पर ताज़ा और भरोसेमंद न्यूज़ अपडेट तुरंत पाएं। अभी जुड़ें और हर खबर सबसे पहले पढ़ें।
उन्होंने कहा कि पिछले तीन वित्त वर्षों में विंड एनर्जी से बिजली उत्पादन में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिली है।
पवन ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए सरकार के कदम
सरकार के अनुसार, पवन और अन्य नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के विकास के लिए कई नीतिगत फैसले लागू किए गए हैं। इनमें ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर योजना के तहत नई ट्रांसमिशन लाइनें और सब-स्टेशन विकसित किए जा रहे हैं, ताकि नवीकरणीय ऊर्जा का बेहतर तरीके से राष्ट्रीय ग्रिड में प्रसारण हो सके।
इसके अलावा, 30 जून 2025 तक चालू हुई सौर और पवन ऊर्जा परियोजनाओं को अंतरराज्यीय ट्रांसमिशन सिस्टम (ISTS) शुल्क में छूट दी गई है। इसके बाद शुरू होने वाली परियोजनाओं के लिए चरणबद्ध शुल्क व्यवस्था लागू की गई है।
2030 के लक्ष्य को ध्यान में रखकर तैयार हो रहा इंफ्रास्ट्रक्चर
सरकार ने बताया कि वर्ष 2030 तक निर्धारित नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्यों को हासिल करने के लिए ट्रांसमिशन नेटवर्क के विस्तार की व्यापक योजना तैयार की गई है। साथ ही, इस क्षेत्र में 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) को ऑटोमैटिक रूट के तहत अनुमति दी गई है, ताकि निवेश को बढ़ावा मिल सके।
बिजली उपभोक्ताओं और उद्योगों के लिए भी नई व्यवस्था
सरकार ने वर्ष 2029-30 तक रिन्यूएबल परचेज ऑब्लिगेशन (RPO) और रिन्यूएबल कंजम्प्शन ऑब्लिगेशन (RCO) के लक्ष्य तय किए हैं। ऊर्जा संरक्षण अधिनियम, 2001 के तहत आने वाले निर्धारित उपभोक्ताओं के लिए इनका पालन अनिवार्य होगा। नियमों का उल्लंघन करने पर जुर्माने का भी प्रावधान किया गया है।
इसके अलावा, सरकार ने ग्रिड से जुड़ी सौर, पवन, विंड-सोलर हाइब्रिड और फर्म एंड डिस्पैचेबल रिन्यूएबल एनर्जी (FDRE) परियोजनाओं से बिजली खरीद के लिए संशोधित मानक बोली दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
ऑफशोर विंड और पुरानी परियोजनाओं के आधुनिकीकरण पर भी जोर
सरकार के अनुसार, ऑफशोर विंड एनर्जी परियोजनाओं के लिए वायबिलिटी गैप फंडिंग (VGF) योजना लागू की गई है। वहीं, बिजली (उपभोक्ताओं के अधिकार) नियम, 2020 के तहत 500 किलोवाट तक की क्षमता वाले उपभोक्ताओं के लिए नेट मीटरिंग की सुविधा उपलब्ध कराई गई है।
इसके साथ ही राष्ट्रीय विंड पावर प्रोजेक्ट्स रिपावरिंग एंड लाइफ एक्सटेंशन पॉलिसी, 2023 भी लागू की गई है। इसका उद्देश्य पुरानी पवन ऊर्जा परियोजनाओं का आधुनिकीकरण करना और उनकी संचालन अवधि बढ़ाना है।
सरकार का कहना है कि इन पहलों के जरिए देश में स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने, जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में काम किया जा रहा है।