असम चुनाव से पहले कांग्रेस को बड़ा झटका: दिग्गज सांसद प्रद्युत बोरदोलोई ने छोड़ी पार्टी; BJP में शामिल होने की अटकलें

असम विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को झटका। डिब्रूगढ़ सांसद प्रद्युत बोरदोलोई ने मल्लिकार्जुन खड़गे को भेजा इस्तीफा। जानें भाजपा में शामिल होने की अटकलें और चुनाव शेड्यूल।

Mar 17, 2026 - 23:25
असम चुनाव से पहले कांग्रेस को बड़ा झटका: दिग्गज सांसद प्रद्युत बोरदोलोई ने छोड़ी पार्टी; BJP में शामिल होने की अटकलें
असम चुनाव से पहले कांग्रेस को बड़ा झटका: दिग्गज सांसद प्रद्युत बोरदोलोई ने छोड़ी पार्टी; BJP में शामिल होने की अटकलें

नई दिल्ली/डिब्रूगढ़ : असम विधानसभा चुनाव से राज्य में कांग्रेस को बड़ा झटका लगा। असम के कांग्रेस सांसद और पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई के करीबी सहयोगी रहे प्रद्युत बोरदोलोई ने मंगलवार को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया है।

प्रद्युत बोरदोलोई ने पार्टी के सभी पदों, विशेषाधिकारों और प्राइमरी सदस्यता से इस्तीफा देते हुए अपना पत्र कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को भेजा। उन्होंने इस्तीफे में लिखा, "आज बहुत दुख के साथ मैं इंडियन नेशनल कांग्रेस के सभी पदों, खास अधिकारों और प्राइमरी मेंबरशिप से अपना इस्तीफा दे रहा हूं।" पत्र में शुभकामनाएं देते हुए उन्होंने पार्टी से अलविदा कहा।

बोरदोलोई असम के डिब्रूगढ़ लोकसभा क्षेत्र से सांसद हैं। उन्होंने 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस के टिकट पर जीत हासिल की थी। डिब्रूगढ़ एक महत्वपूर्ण औद्योगिक और चाय उत्पादन क्षेत्र है, जहां भाजपा की मजबूत पकड़ रही है। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, बोरदोलोई के भाजपा में शामिल होने की संभावना काफी मजबूत है।

वे जल्द ही भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर सकते हैं और पार्टी की असम इकाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। यह घटना कांग्रेस के लिए असम में बड़ा झटका मानी जा रही है, जहां पार्टी पहले से ही संगठनात्मक कमजोरी और आंतरिक कलह से जूझ रही है।

प्रद्युत बोरदोलोई लंबे समय से कांग्रेस के वफादार नेता रहे हैं। वे असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष भी रह चुके हैं और 2016 के विधानसभा चुनाव में पार्टी के अभियान में अहम भूमिका निभाई थी।

हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में असम में कांग्रेस की लगातार हार और 2021 विधानसभा चुनाव में महज 29 सीटों पर सिमटने से पार्टी के कई नेताओं में असंतोष बढ़ा था। बोरदोलोई ने भी पार्टी की रणनीति, संगठनात्मक ढांचे और केंद्रीय नेतृत्व के फैसलों पर असहमति जताई थी। इस्तीफे के पीछे व्यक्तिगत असंतोष के अलावा असम की बदलती राजनीतिक हवा और भाजपा की बढ़ती ताकत को भी कारण माना जा रहा है।

भाजपा 2016 से लगातार असम की सत्ता में है और 2024 लोकसभा चुनाव में राज्य की 14 में से 9 सीटें जीती थीं। कांग्रेस को महज 3 सीटें मिली थीं। ऐसे में बोरदोलोई जैसे प्रभावशाली नेता का भाजपा में जाना पार्टी को डिब्रूगढ़ और ऊपरी असम में और मजबूती दे सकता है।

बता दें कि असम की कुल 126 विधानसभा सीटों के लिए एक ही चरण में 9 अप्रैल को मतदान होगा, जबकि नतीजे 4 मई को सामने आएंगे।

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