DUSU Election 2026: ABVP ने जीती 3 सीटें, NSUI का खाता नहीं खुला; दीपांशु शौकीन की जीत ने चौंकाया
DUSU Election 2026 में ABVP ने चार में से तीन प्रमुख पद जीते। NSUI एक भी सीट नहीं जीत सकी, जबकि पूर्व NSUI सदस्य दीपांशु शौकीन ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर उपाध्यक्ष पद जीता।
Nitesh Kumar Jha Verified Public Figure • 23 Jul, 2026Editor
DUSU Election 2026: ABVP ने जीती 3 सीटें, NSUI का खाता नहीं खुला; दीपांशु शौकीन की जीत ने चौंकाया
DUSU Election 2026 में ABVP ने चार में से तीन प्रमुख पद जीते। NSUI एक भी सीट नहीं जीत सकी, जबकि पूर्व NSUI सदस्य दीपांशु शौकीन ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर उपाध्यक्ष पद जीता।
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20 September 2026
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DUSU Election 2026: ABVP ने जीती 3 सीटें, NSUI का खाता नहीं खुला; दीपांशु शौकीन की जीत ने चौंकाया
नई दिल्ली: दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ यानी DUSU Election 2026 के नतीजों ने छात्र राजनीति में कई संकेत दिए हैं। ABVP ने चार केंद्रीय पदों में से तीन पर जीत दर्ज की, जबकि NSUI एक भी पद हासिल नहीं कर सकी। अध्यक्ष पद पर ABVP के यश डबास, सचिव पद पर रिया छाबड़ी और संयुक्त सचिव पद पर लक्ष्य राज सिंह विजयी रहे।
लेकिन इस चुनाव की सबसे बड़ी कहानी उपाध्यक्ष पद का नतीजा रहा। यहां पूर्व NSUI सदस्य और निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन ने 30,615 वोट हासिल कर जीत दर्ज की। उन्होंने ABVP के इशु मौर्य को 13,705 वोटों से पीछे छोड़ा।
इसलिए इस चुनाव को केवल ABVP बनाम NSUI की कहानी मानना पूरी तस्वीर नहीं बताता। नतीजों में ABVP की तीन सीटों पर जीत के साथ NSUI के सामने संगठन और उम्मीदवार चयन से जुड़े सवाल भी दिखाई देते हैं।
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संयुक्त सचिव पद पर भी मुकाबला अपेक्षाकृत करीबी रहा। ABVP के लक्ष्य राज सिंह को 16,615 वोट मिले, जबकि निर्दलीय उम्मीदवार विशेष यादव को 15,778 और NSUI के गोपाल चौधरी को 15,206 वोट मिले।
इन नतीजों के साथ NSUI चारों केंद्रीय पदों में से कोई भी सीट नहीं जीत सकी।
दीपांशु शौकीन की जीत ने बदली तस्वीर
उपाध्यक्ष पद का नतीजा इस चुनाव का अलग पहलू रहा। पूर्व NSUI सदस्य दीपांशु शौकीन ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा और 30,615 वोट हासिल किए।
ABVP के इशु मौर्य को 16,910 वोट मिले, जबकि NSUI के वीर चतरथ को सिर्फ 4,313 वोट मिले। शौकीन की जीत का अंतर 13,705 वोट रहा।
यह परिणाम इस बात की ओर भी ध्यान खींचता है कि बड़े छात्र संगठनों के उम्मीदवारों के अलावा निर्दलीय उम्मीदवार भी DUSU चुनाव में महत्वपूर्ण समर्थन हासिल कर सकता है।
NSUI के उम्मीदवारों का प्रदर्शन कैसा रहा?
अध्यक्ष पद के लिए NSUI ने विजय शंकर मीना को मैदान में उतारा। उन्हें 22,523 वोट मिले और वह दूसरे स्थान पर रहे।
सचिव पद पर नम्रता चौधरी 14,869 वोट के साथ दूसरे स्थान पर रहीं। संयुक्त सचिव पद पर गोपाल चौधरी को 15,206 वोट मिले।
उपाध्यक्ष पद पर NSUI के वीर चतरथ का प्रदर्शन अपेक्षाकृत कमजोर रहा और उन्हें 4,313 वोट मिले।
NOTA को भी मिले हजारों वोट
DUSU 2026 के आंकड़ों में NOTA भी उल्लेखनीय रहा। उपलब्ध चुनावी आंकड़ों के मुताबिक चारों केंद्रीय पदों को मिलाकर 23,942 वोट NOTA को मिले।
हालांकि इसे सीधे किसी संगठन के खिलाफ वोट या किसी खास राजनीतिक रुझान का प्रमाण मानना उचित नहीं होगा। NOTA चुनने के पीछे अलग-अलग कारण हो सकते हैं।
क्या राहुल गांधी की छात्र मुहिम का असर नहीं दिखा?
राहुल गांधी की ओर से छात्रों के बीच ‘छात्रों की गूंज’ अभियान चलाया गया था। चुनाव के दौरान इस अभियान का जिक्र NSUI के संदर्भ में भी हुआ।
लेकिन DUSU के नतीजों से केवल यह निष्कर्ष निकालना कि अभियान पूरी तरह सफल या विफल रहा, आंकड़ों से सीधे साबित नहीं होता। छात्र संघ चुनाव में स्थानीय संगठन, उम्मीदवार की व्यक्तिगत पकड़, कैंपस के मुद्दे और अलग-अलग छात्र समूहों की लामबंदी जैसे कई कारक असर डाल सकते हैं।
दिलचस्प यह है कि दीपांशु शौकीन ने जीत के बाद राहुल गांधी की ‘छात्रों की गूंज’ मुहिम का भी जिक्र किया और साथ ही NSUI की चुनावी रणनीति पर विचार करने की बात कही।
कैंपस के मुद्दे भी रहे अहम
2026 के DUSU चुनाव में छात्र सुरक्षा, हॉस्टल, कैंपस इंफ्रास्ट्रक्चर और आवास जैसे मुद्दे भी चर्चा में रहे। चुनाव में कुल मतदान प्रतिशत 40.46 फीसदी रहा।
ऐसे में नतीजों को केवल जातीय समीकरण या राष्ट्रीय नेताओं की छात्र राजनीति से जोड़कर देखना पूरी तस्वीर नहीं देता। स्थानीय मुद्दों और उम्मीदवारों की व्यक्तिगत स्वीकार्यता ने भी चुनावी मुकाबले को प्रभावित किया हो सकता है।
अब NSUI के सामने क्या सवाल?
DUSU में एक भी केंद्रीय पद नहीं जीत पाने के बाद NSUI के सामने संगठन और उम्मीदवार चयन की रणनीति पर सवाल उठना स्वाभाविक है। खास तौर पर तब, जब उसके पूर्व सदस्य दीपांशु शौकीन ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर उपाध्यक्ष पद पर बड़ी जीत हासिल की है।
वहीं ABVP ने अध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव पद जीतकर केंद्रीय पैनल में बहुमत हासिल कर लिया है। अब निर्वाचित छात्र प्रतिनिधियों के सामने कैंपस सुरक्षा, हॉस्टल, बुनियादी सुविधाओं और छात्रों से जुड़े दूसरे मुद्दों पर अपने चुनावी वादों को आगे बढ़ाने की चुनौती होगी।
DUSU के इस चुनाव का सबसे स्पष्ट तथ्य यही है कि ABVP ने चार में से तीन प्रमुख पद जीते, NSUI कोई सीट नहीं जीत सकी और उपाध्यक्ष पद निर्दलीय दीपांशु शौकीन के खाते में गया। इस परिणाम की राजनीतिक व्याख्या अलग-अलग संगठन अपने नजरिए से कर सकते हैं, लेकिन अंतिम चुनावी आंकड़े इसी तस्वीर को दिखाते हैं।
पत्रकारिता के क्षेत्र में करीब 5 वर्षों का अनुभव। अपनी बीट से जुड़ी खबरों और बदलते घटनाक्रम पर गहरी नजर रखते हैं। सटीक, तथ्यात्मक और आसान भाषा में खबरें पाठकों तक पहुंचाने में माहिर हैं।