मध्य प्रदेश में 351 बसों के साथ शुरू होगी ‘मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा’, जानिए किस शहर को कितनी बसें मिलीं
मध्य प्रदेश में ‘मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा’ की शुरुआत 351 बसों के साथ होगी. पहले चरण में 7 शहरों को शामिल किया गया है और 2031 तक 15 हजार बसों का लक्ष्य है.
Minaxi Rathore Verified Public Figure • 11 Jul, 2026Journalist
मध्य प्रदेश में 351 बसों के साथ शुरू होगी ‘मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा’, जानिए किस शहर को कितनी बसें मिलीं
मध्य प्रदेश में ‘मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा’ की शुरुआत 351 बसों के साथ होगी. पहले चरण में 7 शहरों को शामिल किया गया है और 2031 तक 15 हजार बसों का लक्ष्य है.
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Date
25 September 2026
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मध्य प्रदेश में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को विस्तार देने के उद्देश्य से ‘मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा’ की शुरुआत की जा रही है. भोपाल के भेल दशहरा मैदान में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी 7 शहरों के लिए 351 इंटरसिटी और इंट्रासिटी बसों को हरी झंडी दिखाएंगे.
सरकार के मुताबिक इस योजना का उद्देश्य शहरी क्षेत्रों के साथ-साथ सुदूर ग्रामीण इलाकों तक बस कनेक्टिविटी बढ़ाना है. प्रस्तावित योजना के तहत राज्य की 75 प्रतिशत ग्राम पंचायतों तक सार्वजनिक बस नेटवर्क पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है.
इंदौर को सबसे ज्यादा 145 बसें
योजना के शुरुआती चरण में सात शहरों को 351 बसें दी गई हैं. इनमें इंदौर को सबसे ज्यादा 145 बसें मिलेंगी. इनमें 50 इंटरसिटी और 95 इंट्रासिटी बसें शामिल हैं.
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भोपाल में कुल 106 बसें संचालित होंगी. इनमें 23 इंटरसिटी और 83 इंट्रासिटी बसें हैं. जबलपुर को 67 बसें मिली हैं, जिनमें 14 इंटरसिटी और 53 इंट्रासिटी बसें शामिल हैं.
रीवा को 18, देवास को 10, कटनी को 3 और भिंड को 2 इंटरसिटी बसें आवंटित की गई हैं.
परिवहन विभाग के मुताबिक योजना के पहले साल में करीब 1,500 बसों के संचालन का लक्ष्य रखा गया है. इसके बाद हर साल 2,500 से 3,000 बसें जोड़ने की योजना है.
इस विस्तार के जरिए 2031 तक पूरे मध्य प्रदेश में करीब 15,000 बसों का नेटवर्क तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है.
योजना को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप यानी PPP मॉडल पर लागू किया जा रहा है. इसके तहत निजी ऑपरेटरों को बस संचालन के साथ डिपो सुविधाओं और विज्ञापन तथा कार्गो जैसे गैर-किराया राजस्व के अवसर दिए जाने की बात कही गई है.
कमांड सेंटर से होगी बसों की निगरानी
‘मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा’ के तहत बसों की निगरानी के लिए आधुनिक कमांड-कंट्रोल सेंटर की व्यवस्था की गई है. उपलब्ध जानकारी के मुताबिक मध्यप्रदेश यात्री परिवहन इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड और उसकी सात सहायक कंपनियों के स्तर पर स्थापित केंद्रों से बसों की रियल-टाइम लोकेशन और संचालन की निगरानी की जाएगी.
इस व्यवस्था का उद्देश्य बसों की समयबद्धता और उनके संचालन पर नज़र रखना है।
CCTV और पैनिक बटन की सुविधा
यात्रियों, खासकर महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के लिए बसों में हाई-डेफिनिशन CCTV कैमरे और पैनिक बटन लगाए गए हैं.
बसों में व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस यानी VLTD के साथ पैसेंजर इंफॉर्मेशन सिस्टम भी उपलब्ध कराया गया है. इससे बसों की डिजिटल ट्रैकिंग और यात्रियों को यात्रा से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है.
ड्राइवरों को दिया गया विशेष प्रशिक्षण
योजना के तहत बस चालकों को तकनीकी प्रशिक्षण देने की बात कही गई है. इसके अलावा यात्रियों की शिकायतों और समस्याओं के समाधान के लिए शिकायत निवारण तंत्र तैयार किया गया है.
नई बस सेवा के जरिए सरकार का फोकस शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के बीच सार्वजनिक परिवहन की कनेक्टिविटी बढ़ाने पर है. शुरुआती 351 बसों के बाद सेवा का विस्तार किस गति से होता है, यह योजना के अगले चरणों में स्पष्ट होगा.