“Israel Election 2026: बहुमत से दूर नेतन्याहू, पार्टियों पर बयान”
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30 October 2026
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Israel Election 2026: बहुमत से दूर नेतन्याहू, अरब पार्टियों के साथ सरकार बनाने से किया इनकार, जानें पूरा मामला
Israel Election 2026: इजरायल की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व वाले गठबंधन को चुनाव में बहुमत नहीं मिला है। इसके बाद सरकार बनाने को लेकर राजनीतिक बातचीत तेज हो गई है। इसी बीच नेतन्याहू ने अरब पार्टियों को लेकर सख्त बयान दिया है। उन्होंने साफ कहा है कि अरब दलों के साथ मिलकर सरकार बनाना स्वीकार नहीं किया जा सकता।
इजरायल के चुनाव में नेतन्याहू के गठबंधन को 53 सीटें मिली हैं। जबकि सरकार बनाने के लिए 120 सदस्यों वाली संसद में कम से कम 61 सीटों की जरूरत होती है। ऐसे में नेतन्याहू के सामने सरकार बनाने की चुनौती है। दूसरी तरफ विपक्षी दलों और अरब पार्टियों के पास भी सरकार बनाने की संभावनाओं को लेकर बातचीत का रास्ता खुला है।
नेतन्याहू ने अरब पार्टियों को लेकर क्या कहा?
30 अक्टूबर को नेतन्याहू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो साझा किया। इस वीडियो में कई अरब नेताओं और सांसदों के पुराने भाषणों और बयानों के अंश दिखाए गए थे।
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वीडियो साझा करते हुए नेतन्याहू ने अरब पार्टियों के साथ सरकार बनाने का विरोध किया। उन्होंने कहा कि इन पार्टियों के साथ मिलकर सरकार बनाना वर्जित है।
इस वीडियो में अहमद तिबी, मंसूर अब्बास, अयमान ओदेह और दूसरे अरब नेताओं के बयान भी शामिल थे। इन नेताओं के बयानों में फलस्तीन के मुद्दे से जुड़ी बातें दिखाई गई थीं।
नेतन्याहू का यह बयान ऐसे समय आया है, जब चुनाव में उनके गठबंधन को बहुमत नहीं मिला है और सरकार बनाने के लिए दूसरी पार्टियों के समर्थन की जरूरत पड़ सकती है।
Israel: नेतन्याहू के गठबंधन को मिलीं सिर्फ 53 सीटें
इजरायल की केंद्रीय चुनाव समिति ने 30 अक्टूबर को चुनाव के अंतिम नतीजे जारी किए। इन नतीजों के मुताबिक, नेतन्याहू के नेतृत्व वाले गठबंधन को 53 सीटें मिली हैं।
इजरायल की संसद को नेसेट कहा जाता है। इसमें कुल 120 सदस्य होते हैं। सरकार बनाने के लिए किसी भी गठबंधन को कम से कम 61 सांसदों का समर्थन चाहिए।
चुनाव में नेतन्याहू की लिकुड पार्टी 27 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर सामने आई। वहीं, विपक्षी गठबंधन को 48 सीटें मिलीं। अरब पार्टियों ने मिलकर 19 सीटें हासिल कीं।
इन नतीजों के बाद किसी भी बड़े राजनीतिक गठबंधन के पास अपने दम पर सरकार बनाने लायक सीटें नहीं हैं।
अरब पार्टियों के पास हैं 19 सीटें
इस चुनाव में अरब पार्टियों का प्रदर्शन भी चर्चा में है। इन दलों ने कुल 19 सीटें जीती हैं।
इनमें जॉइंट लिस्ट और रा'अम जैसी पार्टियां शामिल हैं। इन सीटों की वजह से सरकार बनाने की बातचीत में अरब पार्टियों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।
विपक्षी नेता गादी आइजेनकोट के सामने भी सरकार बनाने की चुनौती है। अगर विपक्षी दल अरब पार्टियों का समर्थन हासिल करते हैं, तो संसद में बहुमत के आंकड़े तक पहुंचने की संभावना बन सकती है।
हालांकि, अरब पार्टियों के साथ मिलकर सरकार बनाना इजरायल की राजनीति में संवेदनशील मुद्दा है। इसलिए इस दिशा में बातचीत आसान नहीं होगी।
चुनाव के बाद नेतन्याहू की पार्टी ने लगाए आरोप
चुनाव के नतीजे सामने आने के बाद नेतन्याहू की पार्टी लिकुड ने चुनाव में गड़बड़ी के आरोप भी लगाए।
पार्टी ने दावा किया कि अरब पार्टियों की ओर से चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश हुई। इसके साथ ही विदेशी मदद से वोट प्रभावित करने के आरोप भी लगाए गए।
हालांकि, इन आरोपों के समर्थन में सार्वजनिक रूप से ठोस सबूत पेश नहीं किए गए थे।
इजरायल की केंद्रीय चुनाव समिति ने भी कहा कि चुनाव की निष्पक्षता को बड़े स्तर पर प्रभावित करने वाली गड़बड़ी के आरोपों का कोई आधार सामने नहीं आया है। मामले की जांच के लिए सुरक्षा एजेंसी शिन बेट से जानकारी मांगी गई थी।
राष्ट्रपति इसाक हर्जोग ने भी पूरे मामले की जांच की जरूरत बताई। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि किसी पूरे समुदाय की छवि खराब नहीं की जानी चाहिए।
हरेदी पार्टियां भी नेतन्याहू से बना रही हैं दूरी
नेतन्याहू के लिए परेशानी सिर्फ सीटों की कमी तक सीमित नहीं है। उनके पुराने सहयोगियों के रुख को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
इजरायल की हरेदी यानी रूढ़िवादी यहूदी पार्टियां खुद को नेतन्याहू के गठबंधन से अलग इकाई के रूप में देखना चाहती हैं।
यूनाइटेड तोराह जुडाइज्म और शस जैसी पार्टियों को लेकर भी राजनीतिक बातचीत जारी है। रिपोर्ट के मुताबिक, इन पार्टियों के नेताओं ने संकेत दिया है कि वे किसी एक राजनीतिक गुट का हिस्सा बनने के बजाय अपने हितों के आधार पर फैसला लेना चाहते हैं।
ऐसे में नेतन्याहू को सरकार बनाने के लिए अपने पुराने सहयोगियों के साथ भी बातचीत करनी होगी।
Israel में सरकार बनाने के लिए क्या है नियम?
इजरायल की संसद में कुल 120 सीटें हैं। किसी भी पार्टी या गठबंधन को सरकार बनाने के लिए कम से कम 61 सांसदों का समर्थन चाहिए।
चुनाव के बाद राष्ट्रपति इसाक हर्जोग अलग-अलग पार्टियों के नेताओं से बातचीत करेंगे। इसके बाद किसी एक नेता को सरकार बनाने का मौका दिया जाएगा।
जिस नेता को यह जिम्मेदारी मिलेगी, उसे तय समय के भीतर संसद में बहुमत का समर्थन जुटाना होगा।
अगर कोई नेता बहुमत साबित नहीं कर पाता है, तो सरकार बनाने की प्रक्रिया और मुश्किल हो सकती है। ऐसी स्थिति में नए चुनाव की संभावना भी बन सकती है।
अब किस दिशा में जाएगी इजरायल की राजनीति?
चुनाव के नतीजों के बाद इजरायल में सरकार बनाने को लेकर राजनीतिक बातचीत शुरू हो गई है। नेतन्याहू का गठबंधन 53 सीटों पर है, जबकि विपक्ष के पास 48 सीटें हैं।
अरब पार्टियों के पास 19 सीटें हैं। ऐसे में इन दलों की भूमिका सरकार बनाने की बातचीत में अहम हो सकती है।
नेतन्याहू ने अरब पार्टियों के साथ गठबंधन का विरोध किया है। वहीं विपक्ष के सामने भी अलग-अलग दलों को साथ लाने की चुनौती है।
अब सभी की नजर इस बात पर है कि राष्ट्रपति किस नेता को सरकार बनाने के लिए बुलाते हैं और कौन संसद में 61 सांसदों का समर्थन जुटा पाता है।
Niharika Gupta Verified Public Figure • 11 Oct, 2026Senior Sub Editor
पत्रकारिता में करीब 2 वर्ष का अनुभव, newstvindia.in में बतौर सीनियर सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। रियलटाइम के साथ साथ क्राइम और हेल्थ से संबंधित समाचार लिखने में विशेष रुचि है। इनसे niharika@newstvindia.in पर संपर्क किया जा सकता है।