Brij भूषण का दावा- एलन के इशारे पर CJP आंदोलन, जानें पूरा मामला
Brij Bhushan News: बृजभूषण शरण सिंह ने CJP के तिरंगा मार्च को एलन मस्क से जोड़ा। जानें आंदोलन, चुनाव आयोग विवाद और दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था की पूरी जानकारी।
Niharika Gupta Verified Public Figure • 11 Oct, 2026Journalist
Oct 16, 2026 • 5:02 PM
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Niharika Gupta
6 hours ago
Brij भूषण का दावा- एलन के इशारे पर CJP आंदोलन, जानें पूरा मामला
Brij Bhushan News: बृजभूषण शरण सिंह ने CJP के तिरंगा मार्च को एलन मस्क से जोड़ा। जानें आंदोलन, चुनाव आयोग विवाद और दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था की पूरी जानकारी।
“Brij भूषण का दावा- एलन के इशारे पर CJP आंदोलन, जानें पूरा मामला”
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16 October 2026
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Brij Bhushan Sharan Singh News: उत्तर प्रदेश में बीजेपी नेता और पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के ‘लहरा दो तिरंगा’ आंदोलन को लेकर बड़ा आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया कि इस आंदोलन के पीछे अमेरिकी कारोबारी एलन मस्क का हाथ है और इसे भारत के खिलाफ साजिश बताया। बृजभूषण ने यह बयान उत्तर प्रदेश के उन्नाव में मीडिया से बातचीत के दौरान दिया। हालांकि, उनके दावे के समर्थन में कोई सार्वजनिक सबूत सामने आने की जानकारी नहीं है।
Brij भूषण शरण सिंह ने एलन मस्क को लेकर क्या कहा?
16 अक्टूबर 2026 को बृजभूषण शरण सिंह ने CJP के प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया देते हुए आरोप लगाया कि आंदोलन को विदेशी हितों से समर्थन मिल रहा है। उन्होंने इसे देश के खिलाफ बड़ी साजिश बताते हुए कहा कि प्रदर्शन के जरिए सुप्रीम कोर्ट पर दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है।
बृजभूषण ने भारत की तुलना बांग्लादेश और पाकिस्तान से किए जाने पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ विदेशी कारोबारी भारत में अपने हितों के अनुसार काम करना चाहते हैं और इसी वजह से देश में चल रहे आंदोलनों को हवा दी जा रही है।
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हालांकि, एलन मस्क और CJP के आंदोलन के बीच किसी प्रत्यक्ष संबंध का सार्वजनिक प्रमाण इन रिपोर्टों में नहीं दिया गया है। इसलिए इन बयानों को बृजभूषण शरण सिंह के आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP ने दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क में ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च आयोजित करने का आह्वान किया था। यह प्रदर्शन पार्टी से जुड़े नेताओं की गिरफ्तारी और चुनावी प्रक्रिया से संबंधित मुद्दों को लेकर चल रहे विरोध के बीच आयोजित किया जाना था।
रिपोर्टों के अनुसार, CJP के प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठाए हैं। पार्टी ने अपने नेताओं की गिरफ्तारी का विरोध भी किया है।
आंदोलन को लेकर दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई थी। पुलिस ने प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर आयोजकों को नियमों का पालन करने की चेतावनी दी थी। सेंट्रल पार्क में सभा और मार्च को लेकर प्रशासनिक पाबंदियों के कारण भी यह मामला चर्चा में रहा।
एलन मस्क और भारत सरकार के बीच क्या है विवाद?
बृजभूषण शरण सिंह के बयान का संबंध ऐसे समय से है, जब एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स की सैटेलाइट इंटरनेट सेवा स्टारलिंक को लेकर भी चर्चा चल रही है।
मस्क ने भारत में स्टारलिंक की व्यावसायिक शुरुआत में देरी को लेकर सवाल उठाए थे। इसके बाद भारत सरकार ने उनके आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्हें खारिज किया था।
बृजभूषण ने विदेशी कारोबारी हितों और CJP आंदोलन के बीच संबंध होने का आरोप इसी व्यापक संदर्भ में लगाया। हालांकि, स्टारलिंक से जुड़े विवाद और CJP के विरोध प्रदर्शन के बीच सीधा संबंध स्थापित करने वाला कोई सार्वजनिक प्रमाण उपलब्ध रिपोर्टों में नहीं दिया गया है।
इसलिए दोनों घटनाओं को एक ही साजिश का हिस्सा मानने के बजाय उनके अलग-अलग तथ्यों और संबंधित पक्षों के बयानों के आधार पर समझना जरूरी है।
दिल्ली में प्रदर्शन को लेकर सुरक्षा व्यवस्था क्यों बढ़ाई गई?
CJP के प्रस्तावित तिरंगा मार्च को देखते हुए दिल्ली में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। प्रशासन ने संभावित भीड़ और यातायात पर पड़ने वाले असर को ध्यान में रखते हुए कदम उठाए।
प्रदर्शन को लेकर पुलिस और आयोजकों के बीच अनुमति तथा प्रतिबंधों से जुड़े सवाल भी सामने आए। अधिकारियों ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने पर जोर दिया, जबकि प्रदर्शन से जुड़े लोगों ने अपने राजनीतिक और नागरिक अधिकारों के तहत विरोध दर्ज कराने की बात कही।
इस मामले में मुख्य विवाद केवल प्रदर्शन की अनुमति तक सीमित नहीं था। मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों, चुनाव आयोग की भूमिका और गिरफ्तार नेताओं की रिहाई जैसे मुद्दे भी आंदोलन की पृष्ठभूमि में शामिल रहे।
चुनाव आयोग और मतदाता सूची को लेकर क्या है विवाद?
CJP और उससे जुड़े प्रदर्शनकारियों ने मतदाता सूची में बदलाव को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि मतदाता सूची में संशोधन की प्रक्रिया निष्पक्षता और पारदर्शिता से जुड़ी चिंताएं पैदा करती है।
दूसरी ओर, चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया को निष्पक्ष बताते हुए पात्र मतदाताओं को दोबारा पंजीकरण कराने का अवसर दिए जाने की बात कही गई है।