Delhi HC on Tiranga : अभिजीत दीपके पर पुलिस करेगी कार्रवाई
Delhi High Court ने अभिजीत के 16 अक्टूबर के तिरंगा मार्च पर रोक लगाने से इनकार किया। दिल्ली पुलिस ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने, जरूरी कार्रवाई का आश्वासन दिया
Niharika Gupta Verified Public Figure • 11 Oct, 2026Journalist
Oct 15, 2026 • 5:33 PM | Delhi
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Niharika Gupta
4 hours ago
Delhi HC on Tiranga : अभिजीत दीपके पर पुलिस करेगी कार्रवाई
Delhi High Court ने अभिजीत के 16 अक्टूबर के तिरंगा मार्च पर रोक लगाने से इनकार किया। दिल्ली पुलिस ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने, जरूरी कार्रवाई का आश्वासन दिया
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15 October 2026
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अभिजीत दीपके के तिरंगा मार्च पर क्या हुआ?
Delhi , Abhijeet Dipke Tiranga March: दिल्ली हाई कोर्ट ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके के 16 अक्टूबर 2026 को प्रस्तावित तिरंगा मार्च पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। अदालत ने दिल्ली पुलिस के इस आश्वासन को रिकॉर्ड पर लिया कि स्थिति को नियंत्रित करने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जाएंगे। यह मार्च दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क में आयोजित करने की घोषणा की गई थी। याचिका में आशंका जताई गई थी कि प्रदर्शन से कारोबार, यातायात और आम लोगों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है।
Abhijeet दीपके के तिरंगा मार्च पर क्या हुआ?
दिल्ली हाई कोर्ट में 15 अक्टूबर को प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर याचिका पर सुनवाई हुई। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नितिन वासुदेव सांबरे और न्यायमूर्ति संजय शर्मा की पीठ ने मामले पर विचार किया।
याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि कनॉट प्लेस का सेंट्रल पार्क नियमित विरोध प्रदर्शनों के लिए निर्धारित स्थल नहीं है। ऐसे में वहां बड़ी संख्या में लोगों के जुटने से आसपास के कारोबार और सार्वजनिक आवाजाही पर असर पड़ सकता है।
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दिल्ली पुलिस की ओर से अदालत को आश्वासन दिया गया कि इन आशंकाओं को ध्यान में रखते हुए उचित कदम उठाए जाएंगे। अदालत ने फिलहाल प्रदर्शन पर रोक लगाने का आदेश नहीं दिया और मामले को आगे की सुनवाई के लिए 3 नवंबर 2026 को सूचीबद्ध किया।
16 अक्टूबर को कहां और कितने बजे होना है मार्च?
अभिजीत दीपके ने ‘लेहरा दो तिरंगा’ नाम से प्रदर्शन का आह्वान किया था। इसके तहत लोगों से 16 अक्टूबर को शाम 5 बजे दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क में राष्ट्रीय ध्वज के साथ जुटने की अपील की गई।
दीपके ने अन्य शहरों के लोगों से भी इसी समय अपने-अपने इलाकों में तिरंगा मार्च आयोजित करने का आग्रह किया था। उन्होंने इस कार्यक्रम को अपनी पार्टी के सदस्यों की गिरफ्तारी के विरोध से जोड़ा।
यह ध्यान रखना जरूरी है कि हाई कोर्ट द्वारा प्रदर्शन पर रोक लगाने से इनकार करने का अर्थ सभी परिस्थितियों में बिना किसी शर्त के प्रदर्शन की अनुमति मिलना नहीं है। कार्यक्रम के दौरान लागू कानूनी निर्देशों और पुलिस की व्यवस्था का पालन करना जरूरी होगा।
दिल्ली पुलिस ने हाई कोर्ट में क्या कहा?
सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने कहा कि मामले में जरूरी कदम उठाए जाएंगे। पुलिस ने प्रदर्शन के कारण कारोबारियों और आम लोगों को होने वाली संभावित परेशानी से जुड़ी आशंकाओं पर कार्रवाई का भरोसा दिया।
अदालत ने पुलिस के आश्वासन को रिकॉर्ड पर लिया। हालांकि, आदेश को अभिजीत दीपके के खिलाफ किसी आपराधिक आरोप पर अंतिम फैसला नहीं माना जाना चाहिए। सुनवाई का प्रमुख मुद्दा प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर सार्वजनिक व्यवस्था और लोगों की आवाजाही से जुड़ी चिंताएं थीं।
कनॉट प्लेस दिल्ली का प्रमुख व्यावसायिक इलाका है। यहां बड़ी संख्या में दुकानें, बाजार, कार्यालय और सार्वजनिक परिवहन सुविधाएं मौजूद हैं। ऐसे क्षेत्र में बड़े जमावड़े के दौरान यातायात और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
किसने दाखिल की थी प्रदर्शन रोकने की याचिका?
यह याचिका अनिल कुमार गुप्ता ने दाखिल की थी, जो पालिका बाजार में रेडीमेड कपड़ों के लाइसेंसधारी विक्रेता हैं। याचिका में कहा गया कि प्रस्तावित प्रदर्शन से कनॉट प्लेस और आसपास के क्षेत्रों में व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं।
याचिकाकर्ता ने छोटे कारोबारियों, दुकानदारों और रोजाना काम करके आजीविका कमाने वाले लोगों को होने वाली परेशानी की आशंका भी जताई। उनका पक्ष था कि विरोध प्रदर्शन के अधिकार का इस्तेमाल करते समय सार्वजनिक रास्तों और कारोबार को प्रभावित होने से बचाने के लिए जरूरी व्यवस्था होनी चाहिए।
याचिका में प्रदर्शन के स्थान, यातायात व्यवस्था और सार्वजनिक सुविधाओं तक पहुंच से जुड़े सवाल उठाए गए थे। अदालत के सामने मुख्य प्रश्न यह था कि प्रस्तावित कार्यक्रम को लेकर किस तरह की प्रशासनिक व्यवस्था और कानूनी कार्रवाई की जरूरत हो सकती है।
CJP नेताओं की गिरफ्तारी के बाद क्यों हुआ मार्च का ऐलान?
अभिजीत दीपके ने यह मार्च अपनी पार्टी के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की गिरफ्तारी के बाद घोषित किया था। दोनों नेताओं को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे जाने की खबर सामने आई थी।
पुलिस के मुताबिक, दोनों पर जंतर-मंतर में कथित तौर पर प्रवेश करने, शांति बनाए रखने से जुड़े बॉन्ड की शर्तों का उल्लंघन करने और ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों के काम में बाधा डालने के आरोप हैं। इस मामले में कानूनी प्रक्रिया जारी है।
दीपके ने गिरफ्तारी के विरोध में तिरंगा मार्च का आह्वान किया और राष्ट्रीय ध्वज के साथ शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने की अपील की। पार्टी की ओर से इसे अपने सदस्यों के खिलाफ कार्रवाई के विरोध के रूप में पेश किया गया।
अब आगे क्या होगा?
दिल्ली हाई कोर्ट ने फिलहाल प्रस्तावित मार्च पर रोक लगाने से इनकार किया है और पुलिस के आश्वासन को दर्ज किया है। मामले की अगली सुनवाई 3 नवंबर 2026 को होगी।
16 अक्टूबर के कार्यक्रम के दौरान दिल्ली पुलिस की सुरक्षा, यातायात और भीड़ प्रबंधन संबंधी व्यवस्था महत्वपूर्ण रहेगी। किसी भी प्रदर्शन में आयोजकों और प्रतिभागियों को लागू कानूनों तथा प्रशासनिक निर्देशों का पालन करना होगा।
इस मामले में अदालत का अगला रुख, पुलिस द्वारा उठाए गए कदम और सार्वजनिक व्यवस्था से जुड़े तथ्य आगे की कार्यवाही में अहम हो सकते हैं। फिलहाल अदालत ने प्रदर्शन पर रोक नहीं लगाई है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि कार्यक्रम के दौरान कानून के उल्लंघन पर कार्रवाई नहीं हो सकती।