Vande Mataram के 151 साल पूरे, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने देशवासियों को दी बधाई, कई नेताओं ने भी किया नमन

नई दिल्ली: भारत के राष्ट्रीय गीत ' Vande Mataram ' की रचना के 151 वर्ष पूरे होने के अवसर पर देशभर में उत्साह और गौरव का माहौल है। इस खास अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने देशवासियों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारत की राष्ट्रीय अस्मिता, स्वाभिमान, एकता और मातृभूमि के प्रति समर्पण का प्रतीक है।

राष्ट्रपति के अलावा केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, ज्योतिरादित्य सिंधिया, असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव और दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता समेत कई नेताओं ने भी इस ऐतिहासिक अवसर पर देशवासियों को शुभकामनाएं दीं।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने Vande Mataram को बताया राष्ट्रीय अस्मिता का प्रतीक

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की ओर से उनके कार्यालय के आधिकारिक एक्स हैंडल पर जारी संदेश में कहा गया कि राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' की रचना के 151 वर्ष पूरे होने पर सभी देशवासियों को हार्दिक बधाई।

राष्ट्रपति ने अपने संदेश में कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान इस गीत ने देशभक्तों के लिए साहस, एकता और संकल्प के उद्घोष के रूप में काम किया। आज भी यह गीत देश की राष्ट्रीय अस्मिता, स्वाभिमान और मातृभूमि के प्रति समर्पण की भावना का प्रतीक बना हुआ है।

उन्होंने कामना की कि देशवासी वंदे मातरम की राष्ट्र-प्रथम की भावना को अपनाएं और राष्ट्र निर्माण में अपना महत्वपूर्ण योगदान दें।

नितिन गडकरी और ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी दी शुभकामनाएं

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने भी राष्ट्रगीत वंदे मातरम की 151वीं वर्षगांठ पर देशवासियों को शुभकामनाएं दीं।

उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि समस्त देशवासियों को राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम की वर्षगांठ पर हार्दिक शुभकामनाएं।

वहीं, केंद्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने वंदे मातरम को राष्ट्रभक्ति, राष्ट्रीय एकता और मातृभूमि के गौरव का प्रतीक बताया।

उन्होंने कहा कि यह अमर गीत हमेशा देशप्रेम, त्याग और समर्पण की भावना को जागृत करता रहेगा। सिंधिया ने इस ऐतिहासिक अवसर पर सभी देशवासियों को बधाई दी।

हिमंता बिस्वा सरमा बोले- भारत की राष्ट्रीय चेतना का अमर स्वर है Vande Mataram

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने भी वंदे मातरम की 151वीं वर्षगांठ पर विशेष संदेश साझा किया।

उन्होंने कहा कि वंदे मातरम भारत की राष्ट्रीय चेतना का वह अमर स्वर है, जिसने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान असंख्य देशवासियों को मातृभूमि की आजादी के लिए प्रेरित किया।

सरमा के मुताबिक, अंग्रेजी शासन के दौर में यह गीत प्रतिरोध का मंत्र बन गया था। आज भी यह राष्ट्र के प्रति समर्पण, सांस्कृतिक अस्मिता और राष्ट्रीय एकता की भावना को अभिव्यक्त करता है।

उन्होंने कहा कि डेढ़ शताब्दी बीतने के बाद भी वंदे मातरम की गूंज देशवासियों को यह याद दिलाती है कि राष्ट्र सर्वोपरि है।

मोहन यादव ने बताया मां भारती के प्रति श्रद्धा का उद्घोष

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने राष्ट्रगीत वंदे मातरम की 151वीं वर्षगांठ पर देशवासियों को बधाई दी।

उन्होंने कहा कि वंदे मातरम मां भारती के प्रति असीम श्रद्धा, गौरव और राष्ट्र समर्पण का उद्घोष है। स्वतंत्रता संग्राम के कठिन दौर में इस अमर गीत ने देशवासियों के दिलों में आजादी की अलख जगाई और पूरे राष्ट्र को एकता के सूत्र में बांधने का काम किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वंदे मातरम की प्रेरणा आने वाली पीढ़ियों में भी राष्ट्र के प्रति गौरव, कर्तव्य और समर्पण की भावना जगाती रहेगी।

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय को किया नमन

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी इस अवसर पर महान साहित्यकार और वंदे मातरम के रचयिता बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय को नमन किया।

उन्होंने कहा कि वंदे मातरम भारत की आत्मा का उद्घोष, मातृभूमि के प्रति श्रद्धा का मंत्र और राष्ट्रभक्ति की ऊर्जा है।

रेखा गुप्ता ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम के समय से लेकर आज विकसित भारत के निर्माण के संकल्प तक यह गीत हर पीढ़ी को राष्ट्रप्रेम और समर्पण की प्रेरणा देता रहा है।

बिहार भाजपा अध्यक्ष संजय सरावगी ने भी दी बधाई

बिहार भाजपा अध्यक्ष संजय सरावगी ने वंदे मातरम को भारत की आत्मा, स्वतंत्रता संग्राम के संघर्ष और देशभक्तों के त्याग एवं बलिदान की अमर अभिव्यक्ति बताया।

उन्होंने कहा कि यह राष्ट्रगीत हर पीढ़ी में देश के प्रति कर्तव्यबोध, गौरव और समर्पण की भावना जागृत करता है।

सरावगी ने 151वीं वर्षगांठ पर सभी प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दीं।

क्यों खास है वंदे मातरम का 151वां वर्ष?

Vande Mataram भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में विशेष स्थान रखता है। इसके रचयिता महान साहित्यकार बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय थे। यह गीत मातृभूमि के प्रति प्रेम, सम्मान और समर्पण की भावना को व्यक्त करता है।

स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान वंदे मातरम देशभक्तों के बीच एकता और संघर्ष का महत्वपूर्ण प्रतीक बन गया था। इसकी पंक्तियों ने अंग्रेजी शासन के खिलाफ आवाज उठाने वाले स्वतंत्रता सेनानियों में नई ऊर्जा और उत्साह का संचार किया।

आज भी राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम देश की सांस्कृतिक विरासत और राष्ट्रीय चेतना का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके 151 वर्ष पूरे होने का अवसर न केवल इसके ऐतिहासिक महत्व को याद करने का मौका है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को देश के प्रति अपने कर्तव्यों और जिम्मेदारियों का एहसास कराने का भी अवसर है।

इस मौके पर राष्ट्रपति से लेकर विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों और केंद्रीय मंत्रियों तक सभी ने एक स्वर में वंदे मातरम की विरासत और इसके संदेश को याद किया।

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