Bangladesh: में रवींद्रनाथ टैगोर की तस्वीर से छेड़छाड़, म्यूरल पर पोती गई काली स्याही; लोगों में भारी नाराजगी

ढाका: Bangladesh में नोबेल पुरस्कार विजेता और महान साहित्यकार रवींद्रनाथ टैगोर की तस्वीर के साथ छेड़छाड़ का मामला सामने आया है। खुलना रेलवे स्टेशन के पास दीवार पर बने गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर के म्यूरल (भित्ति चित्र) पर अज्ञात उपद्रवियों ने काली स्याही पोत दी। इस घटना के बाद स्थानीय लोगों और सांस्कृतिक संगठनों में नाराजगी देखी जा रही है। लोगों ने इस कार्रवाई की निंदा करते हुए जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जिस दीवार पर कई ऐतिहासिक और सांस्कृतिक हस्तियों के चित्र बनाए गए थे, उनमें से केवल रवींद्रनाथ टैगोर के चित्र को निशाना बनाया गया। इस घटना ने बांग्लादेश में सांस्कृतिक विरासत और महान साहित्यकारों के सम्मान को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

खुलना स्टेशन के पास टैगोर के म्यूरल पर पोती गई काली स्याही

रिपोर्ट के अनुसार, बांग्लादेश के खुलना स्टेशन क्षेत्र में ओल्ड जेसोर रोड के किनारे बनी एक दीवार पर कई प्रमुख हस्तियों के भित्ति चित्र बनाए गए थे। इन चित्रों में रवींद्रनाथ टैगोर, काजी नजरुल इस्लाम, फकीर लालन शाह, कलाकार एसएम सुल्तान और कवि माइकल मधुसूदन दत्त जैसी महान हस्तियां शामिल थीं।

इसके अलावा दीवार पर पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया और पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान के चित्र भी बनाए गए थे। लेकिन अज्ञात लोगों ने इनमें से केवल रवींद्रनाथ टैगोर के म्यूरल पर काली स्याही डालकर उसे खराब कर दिया।

इस घटना के सामने आने के बाद स्थानीय नागरिकों ने नाराजगी जताई है। कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने आशंका व्यक्त की है कि इसके पीछे किसी संगठित समूह का हाथ हो सकता है। हालांकि, इस संबंध में अभी तक किसी संगठन की भूमिका की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

पुलिस ने शुरू की जांच, आरोपियों की पहचान की कोशिश

खुलना सदर पुलिस स्टेशन के प्रभारी अधिकारी लुकमान हुसैन ने घटना की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि पुलिस को शुक्रवार दोपहर इस संबंध में सूचना मिली थी, जिसके बाद मामले की जांच शुरू कर दी गई।

बांग्लादेश के प्रमुख समाचार पत्र 'ढाका ट्रिब्यून' के अनुसार, पुलिस अधिकारी ने बताया कि शुक्रवार को सड़क किनारे की सभी दुकानें बंद थीं। इस वजह से यह पता लगाना मुश्किल हो रहा है कि म्यूरल को किसने और कब नुकसान पहुंचाया।

पुलिस आसपास के हालात और उपलब्ध जानकारी के आधार पर घटना की जांच कर रही है। फिलहाल आरोपियों की पहचान और घटना के पीछे के कारणों को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।

खुलना सिटी कॉरपोरेशन ने बनवाए थे सांस्कृतिक और ऐतिहासिक चित्र

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, खुलना सिटी कॉरपोरेशन (KCC) की ओर से इन भित्ति चित्रों को बनवाने की पहल की गई थी। यह काम प्रधानमंत्री तारिक रहमान के शहर के प्रस्तावित दौरे से पहले किया गया था।

दीवार पर बनाए गए चित्रों में बांग्लादेश की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान को दर्शाने की कोशिश की गई थी। इनमें जुलाई 2024 के जन-विद्रोह, सुंदरबन, ऐतिहासिक साठ गुंबद मस्जिद और जूट उद्योग को भी जगह दी गई थी।

इसके साथ ही रवींद्रनाथ टैगोर और काजी नजरुल इस्लाम जैसे साहित्यकारों को भी सम्मान दिया गया था, जिन्होंने बंगाल क्षेत्र की कला, साहित्य और संस्कृति को समृद्ध करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

खुलना सिटी कॉरपोरेशन के प्रशासक नजरुल इस्लाम मंजू ने घटना पर नाराजगी जताते हुए कहा कि चित्र को खराब करने वालों ने अपनी संकीर्ण सोच और मानसिकता को उजागर किया है।

Bangladesh: सांस्कृतिक संगठनों ने जताई चिंता, संगठित समूह की आशंका

इस घटना पर बांग्लादेश के सांस्कृतिक संगठनों ने भी चिंता जाहिर की है। सांस्कृतिक संगठन 'नाट्यलोक' के महासचिव शरीफुल इस्लाम सलीम ने आशंका जताई कि इस घटना के पीछे कोई संगठित समूह हो सकता है।

'द डेली स्टार' की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने कहा कि ढाका में भी इसी तरह की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। उनके मुताबिक, ऐसी घटनाओं की जांच होनी चाहिए और जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उन्हें सजा दी जानी चाहिए।

सलीम ने कहा कि मामला केवल रवींद्रनाथ टैगोर तक सीमित नहीं रह सकता और भविष्य में दूसरी महान हस्तियों के चित्रों को भी निशाना बनाया जा सकता है।

उन्होंने यह भी कहा कि टैगोर का साहित्य और दर्शन कई पीढ़ियों को स्वतंत्र विचार, धर्मनिरपेक्षता और मानवीय गरिमा का सम्मान करना सिखाता रहा है। उन्होंने समाज के सभी वर्गों से इस घटना के खिलाफ एकजुट होकर आवाज उठाने की अपील की।

ढाका में भी पहले खराब किया गया था टैगोर का भित्ति चित्र

खुलना में सामने आई यह घटना पहली नहीं है। इससे करीब एक महीने पहले बांग्लादेश की राजधानी ढाका में बांग्लादेश शिल्पकला अकादमी के बाहर बने रवींद्रनाथ टैगोर के एक भित्ति चित्र को भी काली स्याही से खराब किए जाने की खबर सामने आई थी।

इस घटना के बाद बांग्लादेश के कम से कम 37 प्रमुख नागरिकों ने चिंता जताते हुए एक बयान जारी किया था। इसमें लेखकों, बुद्धिजीवियों और अन्य नागरिकों ने ऐसी घटनाओं पर गंभीर चिंता व्यक्त की थी।

बयान में आशंका जताई गई थी कि इस तरह की घटनाएं धार्मिक कट्टरपंथी समूहों को प्रोत्साहित कर सकती हैं और देश में सांप्रदायिक तनाव को बढ़ा सकती हैं।

बयान में 1960 के दशक का भी उल्लेख किया गया, जब पाकिस्तानी शासकों ने राजनीतिक कारणों से रवींद्रनाथ टैगोर को मुस्लिम-विरोधी के रूप में पेश करने का प्रयास किया था। हस्ताक्षरकर्ताओं ने उस अभियान की तुलना हालिया घटनाओं से की।

Bangladesh की सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा हैं रवींद्रनाथ टैगोर

रवींद्रनाथ टैगोर का साहित्य और सांस्कृतिक योगदान भारत और बांग्लादेश दोनों के लिए ऐतिहासिक महत्व रखता है। वर्ष 1913 में उन्हें साहित्य का नोबेल पुरस्कार मिला था। वह यह सम्मान पाने वाले पहले गैर-यूरोपीय साहित्यकार थे।

उनकी रचनाओं ने बंगाली साहित्य, संगीत और विचारधारा को गहराई से प्रभावित किया है। भारत के राष्ट्रगान 'जन गण मन' और बांग्लादेश के राष्ट्रगान 'आमार सोनार बांग्ला' की रचना भी टैगोर ने ही की थी।

ऐसे में बांग्लादेश में उनकी तस्वीर को नुकसान पहुंचाने की घटना को लेकर सांस्कृतिक जगत में चिंता जताई जा रही है। फिलहाल पुलिस जांच जारी है और यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस घटना के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान कब तक हो पाती है।

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