Trump Statement: ट्रंप ने मानी रूस और चीन की जासूसी की बात, बोले- हम उनसे भी बेहतर तरीके से करते हैं

वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस और चीन की जासूसी को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्वीकार किया कि चीन और रूस अमेरिका की जासूसी करते हैं, लेकिन साथ ही दावा किया कि अमेरिका भी इन दोनों देशों की निगरानी करता है और इस मामले में उनसे कहीं बेहतर है। ट्रंप ने यह बात आयोवा के डुब्यूक में आयोजित एक चुनावी रैली के दौरान कही। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिका में मध्यावधि चुनाव से पहले राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं।

ट्रंप ने जासूसी को लेकर उठी चिंताओं पर अपने खास अंदाज में जवाब दिया। उन्होंने कहा कि अगर चीन और रूस अमेरिका की जासूसी कर रहे हैं, तो अमेरिका भी उनके खिलाफ ऐसा ही करता है। इसलिए इस बात को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है।

Trump बोले- चीन और रूस हमारी जासूसी करते हैं

डुब्यूक में रिपब्लिकन उम्मीदवारों के समर्थन में आयोजित रैली के दौरान ट्रंप ने कहा कि एक व्यक्ति ने उनसे शिकायत की थी कि चीन अमेरिका की जासूसी कर रहा है। इस पर उन्होंने जवाब दिया कि हां, चीन ऐसा करता है और अमेरिका भी उसकी जासूसी करता है।

इसके बाद जब उन्हें बताया गया कि रूस और चीन दोनों अमेरिका की जासूसी कर रहे हैं, तो ट्रंप ने इसे सही बताया। उन्होंने कहा कि अमेरिका भी इन दोनों देशों के खिलाफ ऐसी गतिविधियां चलाता है और इस काम में उनसे बेहतर है।

ट्रंप का यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि अमेरिका लंबे समय से चीन और रूस की खुफिया गतिविधियों को अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए चुनौती बताता रहा है।

चीन और रूस पर अमेरिका की नजर क्यों?

अमेरिका और चीन के बीच लंबे समय से तकनीक, व्यापार, सैन्य शक्ति और खुफिया गतिविधियों को लेकर प्रतिस्पर्धा चल रही है। वहीं रूस के साथ भी अमेरिका के संबंध काफी तनावपूर्ण रहे हैं।

अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियां कई बार चीन और रूस पर साइबर गतिविधियों, सैन्य ठिकानों से जुड़ी जानकारी जुटाने और संवेदनशील सरकारी सूचनाओं तक पहुंचने की कोशिश करने के आरोप लगा चुकी हैं।

खुफिया एजेंसियों का काम सिर्फ दूसरे देशों की गतिविधियों पर नजर रखना नहीं होता, बल्कि अपने देश की सुरक्षा से जुड़े संभावित खतरों का पहले से आकलन करना भी होता है।

ऐसे में ट्रंप का बयान अमेरिका की खुफिया रणनीति और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को लेकर उसकी सोच को सामने लाता है।

चीनी नागरिकों को जासूसी के मामले में मिली सजा

ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिका में चीनी खुफिया गतिविधियों को लेकर जांच और कानूनी कार्रवाई भी चर्चा में है।

अमेरिकी न्याय विभाग के मुताबिक, 30 अक्टूबर 2026 को दो चीनी नागरिकों को चीनी सरकार के एजेंट के रूप में काम करने की साजिश के मामले में 30 महीने की जेल की सजा सुनाई गई।

रिपोर्ट के अनुसार, दोनों आरोपियों पर चीन के राज्य सुरक्षा मंत्रालय यानी Ministry of State Security (MSS) के निर्देशों पर काम करने का आरोप था। यह मामला अमेरिका में विदेशी खुफिया गतिविधियों को लेकर बढ़ती चिंता को दिखाता है।

हालांकि, ट्रंप ने अपनी रैली में इस मामले का विस्तार से जिक्र नहीं किया, लेकिन उनका बयान ऐसे सुरक्षा माहौल के बीच आया है।

ईरान को लेकर भी Trump ने दी चेतावनी

रैली में ट्रंप ने सिर्फ चीन और रूस की जासूसी पर बात नहीं की, बल्कि ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का भी बचाव किया।

उन्होंने दावा किया कि ईरान की सैन्य क्षमता को काफी नुकसान पहुंचा है। ट्रंप ने कहा कि ईरान के पास अब रडार, विमान-रोधी हथियार और बातचीत करने के लिए प्रभावी नेतृत्व नहीं बचा है।

उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका ने संघर्ष की शुरुआत नहीं की, लेकिन अब उसे खत्म करने की दिशा में कार्रवाई कर रहा है।

ट्रंप के इस बयान से साफ है कि वह अपनी विदेश नीति और सैन्य फैसलों को राष्ट्रीय सुरक्षा के नजरिए से सही ठहराने की कोशिश कर रहे हैं।

महंगाई और तेल की कीमतों पर भी किया दावा

आयोवा की रैली के बाद ट्रंप कंसास के सलीना पहुंचे, जहां उन्होंने अर्थव्यवस्था और महंगाई का मुद्दा उठाया।

उन्होंने दावा किया कि पिछले तीन महीनों में अमेरिका की महंगाई दर घटकर 1.7 प्रतिशत रह गई है। ट्रंप ने इसके लिए पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडन की नीतियों को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि उन्हें पहले से ऊंची कीमतें विरासत में मिली थीं।

तेल की कीमतों पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि ईरान के साथ संघर्ष खत्म होने के बाद कीमतों में तेजी से गिरावट आ सकती है।

हालांकि, ये ट्रंप के चुनावी भाषण में किए गए दावे हैं। इन्हें स्वतंत्र आर्थिक आंकड़ों से अलग समझना जरूरी है।

मध्यावधि चुनाव से पहले ट्रंप का बड़ा संदेश

अमेरिका में 3 नवंबर को मध्यावधि चुनाव होने हैं। इन चुनावों में प्रतिनिधि सभा और सीनेट पर नियंत्रण को लेकर रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक पार्टियों के बीच मुकाबला है।

ट्रंप की रैलियों का उद्देश्य रिपब्लिकन उम्मीदवारों के पक्ष में समर्थन जुटाना है। उनके भाषणों में राष्ट्रीय सुरक्षा, चीन, रूस, ईरान, महंगाई और तेल की कीमत जैसे मुद्दे प्रमुखता से शामिल रहे हैं।

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