Mahadev Betting App Case: सौरभ चंद्राकर की भारत वापसी से खुलेगा प्रोटेक्शन मनी का राज? CM विष्णुदेव साय ने CBI को दी बधाई

रायपुर: Mahadev ऑनलाइन सट्टा ऐप मामले में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। इस मामले के मुख्य आरोपियों में शामिल सौरभ चंद्राकर को ओमान से भारत वापस लाया गया है। उसकी वापसी के बाद छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि सौरभ चंद्राकर से पूछताछ में यह पता चल सकेगा कि महादेव ऐप के अवैध कारोबार को चलाने के लिए कथित तौर पर किस-किस को प्रोटेक्शन मनी दी जाती थी।

मुख्यमंत्री ने इस कार्रवाई के लिए केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और दूसरी केंद्रीय एजेंसियों को बधाई दी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सौरभ से पूछताछ के बाद महादेव सट्टा ऐप मामले से जुड़े कई अहम राज सामने आएंगे। यह मामला लंबे समय से छत्तीसगढ़ की राजनीति और जांच एजेंसियों के लिए चर्चा का विषय बना हुआ है।

Mahadev : ओमान से भारत लाया गया सौरभ चंद्राकर

महादेव ऑनलाइन बुक सट्टा नेटवर्क के प्रमोटर सौरभ चंद्राकर को भारतीय एजेंसियों ने ओमान से प्रत्यर्पित कर भारत लाया है। CBI के मुताबिक, उसके खिलाफ इंटरपोल का रेड कॉर्नर नोटिस जारी था। इसी आधार पर ओमान की रॉयल पुलिस ने उसे हिरासत में लिया था।

इसके बाद CBI और प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने ओमान के अधिकारियों के सामने औपचारिक प्रत्यर्पण प्रस्ताव पेश किए। भारतीय एजेंसियों ने मामले से जुड़े सबूत भी उपलब्ध कराए। प्रत्यर्पण की मंजूरी मिलने के बाद CBI की विशेष टीम ओमान पहुंची और सौरभ चंद्राकर को भारत लेकर आई।

2 नवंबर 2026 को उसे दिल्ली स्थित CBI मुख्यालय से रायपुर की विशेष अदालत में पेशी के लिए ले जाया गया। इस घटनाक्रम को महादेव ऐप मामले की जांच में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 

CM विष्णुदेव साय ने क्या कहा?

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सौरभ चंद्राकर की भारत वापसी पर खुशी जताते हुए CBI की तारीफ की। उन्होंने कहा कि केंद्रीय जांच एजेंसी लंबे समय से उसे विदेश से वापस लाने की कोशिश कर रही थी।

मुख्यमंत्री के मुताबिक, सौरभ चंद्राकर से पूछताछ के बाद महादेव ऐप से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं। सबसे अहम सवाल यह है कि कथित तौर पर इस सट्टा नेटवर्क को चलाने के लिए किसे प्रोटेक्शन मनी दी जाती थी।

साय ने कहा कि जांच के जरिए यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि इस अवैध कारोबार से जुड़े लोगों को किस स्तर पर संरक्षण मिल रहा था। उन्होंने इस कार्रवाई को बड़ी सफलता बताते हुए CBI का आभार जताया। 

 क्या है Mahadev सट्टा ऐप मामला?

महादेव ऑनलाइन बुक को देश के बड़े अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी नेटवर्क में शामिल बताया गया है। जांच एजेंसियों के मुताबिक, इस नेटवर्क का संचालन भारत के बाहर से किया जाता था और इसके जरिए क्रिकेट, फुटबॉल, ताश तथा अन्य खेलों पर ऑनलाइन सट्टा लगाया जाता था।

इस नेटवर्क को चलाने के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों में फ्रेंचाइजी पैनल और शाखाएं बनाई गई थीं। इनके माध्यम से लोगों को सट्टेबाजी के लिए जोड़ा जाता था और उनसे पैसे इकट्ठा किए जाते थे।

CBI की जांच में सामने आया कि सट्टेबाजी से मिलने वाली रकम को कई बैंक खातों के जरिए इधर-उधर भेजा जाता था। इसके बाद कई लेनदेन और हवाला चैनलों के माध्यम से पैसा विदेश पहुंचाया जाता था।

जांच एजेंसी का आरोप है कि इस नेटवर्क से मिले पैसों का एक हिस्सा सरकारी कर्मचारियों को कथित तौर पर प्रोटेक्शन मनी देने में इस्तेमाल किया गया, ताकि सट्टेबाजी का कारोबार बिना किसी बाधा के चलता रहे। 

दो CBI केस और ED की जांच में आरोपी है सौरभ

सौरभ चंद्राकर के खिलाफ दो CBI मामलों में चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है। इसके अलावा प्रवर्तन निदेशालय यानी ED के एक मामले में भी उसके खिलाफ अभियोजन शिकायत दाखिल की गई है।

जांच एजेंसियां इस मामले में कथित अवैध सट्टेबाजी, धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े पहलुओं की जांच कर रही हैं।

CBI ने अपनी जांच में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और जालसाजी से संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की है। इसके अलावा छत्तीसगढ़ जुआ प्रतिषेध अधिनियम के तहत भी मामला दर्ज किया गया है।

ED ने भी इस मामले में भारत और विदेशों में स्थित कई संपत्तियों को अटैच किया है। अब सौरभ की भारत वापसी के बाद जांच एजेंसियों को उससे पूछताछ के जरिए वित्तीय लेनदेन और नेटवर्क से जुड़े दूसरे लोगों के बारे में जानकारी मिलने की उम्मीद है। 

प्रोटेक्शन मनी किसे मिलती थी, अब इस सवाल का जवाब तलाशेंगी एजेंसियां

महादेव ऐप मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल कथित प्रोटेक्शन मनी को लेकर है। जांच एजेंसियों का आरोप है कि सट्टेबाजी से हासिल रकम का इस्तेमाल कुछ सरकारी कर्मचारियों को भुगतान करने में किया गया था।

अब सौरभ चंद्राकर से पूछताछ के दौरान यह जानने की कोशिश की जा सकती है कि पैसा किन लोगों तक पहुंचता था, भुगतान का तरीका क्या था और इस नेटवर्क को किन लोगों का कथित संरक्षण हासिल था।

हालांकि, अभी तक मुख्यमंत्री के बयान से यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि प्रोटेक्शन मनी किन लोगों को मिलती थी। किसी व्यक्ति का नाम सामने आने या आरोप साबित होने से पहले उसे दोषी मानना सही नहीं होगा।

आगे क्या होगा?

सौरभ चंद्राकर की भारत वापसी के बाद अब CBI और ED की जांच में आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी। एजेंसियां उससे कथित सट्टेबाजी नेटवर्क, पैसों के लेनदेन, विदेशी कनेक्शन और प्रोटेक्शन मनी से जुड़े सवालों पर पूछताछ कर सकती हैं।

इस मामले में अब सबकी नजर रायपुर की विशेष अदालत की कार्यवाही और जांच एजेंसियों की अगली कार्रवाई पर रहेगी।

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