Amit Shah on Congress: 'अराजकता से सत्ता हासिल करना चाहती है कांग्रेस', अमित शाह का बड़ा हमला, हैदराबाद में निकाली पदयात्रा
हैदराबाद: केंद्रीय गृह मंत्री Amit शाह ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर एक बार फिर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि लगातार चुनावी हार का सामना करने के बाद कांग्रेस अब अराजकता फैलाकर सत्ता हासिल करना चाहती है और लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने की कोशिश कर रही है। अमित शाह ने यह बयान सोमवार को हैदराबाद में 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' पदयात्रा से पहले दिया। उन्होंने कहा कि देश के नागरिक लोकतंत्र पर हो रहे इन कथित हमलों से उसकी रक्षा करने के लिए तैयार हैं।
अमित शाह का यह बयान ऐसे समय आया है, जब एक दिन पहले ही दिल्ली के रामलीला मैदान में विपक्षी INDIA गठबंधन ने चुनावी प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों और वोट चोरी के आरोपों को लेकर बड़ी रैली की थी। इस रैली में कांग्रेस नेता राहुल गांधी समेत विपक्ष के कई बड़े नेता शामिल हुए थे।
कांग्रेस पर Amit शाह का बड़ा आरोप
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए कांग्रेस को निशाने पर लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि लगातार चुनाव हारने के बाद कांग्रेस अराजकता के रास्ते सत्ता हासिल करना चाहती है।
शाह ने कहा कि कांग्रेस लोकतंत्र को कमजोर करने का प्रयास कर रही है, लेकिन देश के नागरिक इन हमलों से लोकतंत्र की रक्षा करने के लिए कमर कस चुके हैं।
उनके इस बयान को विपक्ष की ओर से लगाए जा रहे वोट चोरी के आरोपों के जवाब के तौर पर देखा जा रहा है। भाजपा लगातार विपक्ष के इन आरोपों को खारिज करती रही है।
हैदराबाद में अमित शाह ने निकाली पदयात्रा
अमित शाह सोमवार शाम को हैदराबाद में 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' पदयात्रा का नेतृत्व करने पहुंचे। यह पदयात्रा बशीरबाग स्थित बाबू जगजीवन राम की प्रतिमा से शुरू होकर मोज्जमजाही मार्केट तक निकाली गई।
केंद्रीय गृह मंत्री सोमवार दोपहर बेगमपेट एयरपोर्ट पहुंचे थे। यहां केंद्रीय कोयला मंत्री जी. किशन रेड्डी और तेलंगाना भाजपा के अन्य नेताओं ने उनका स्वागत किया।
हैदराबाद पहुंचने के बाद अमित शाह ने चारमीनार स्थित देवी भाग्यलक्ष्मी मंदिर में दर्शन भी किए। इसके बाद वह पदयात्रा में शामिल होने के लिए रवाना हुए।
इस कार्यक्रम को तेलंगाना में भाजपा की राजनीतिक गतिविधियों और लोकतंत्र के मुद्दे पर पार्टी के अभियान के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
दिल्ली की रैली से क्यों नाराज है भाजपा?
दरअसल, रविवार को दिल्ली के रामलीला मैदान में INDIA गठबंधन ने 'चलो दिल्ली' रैली आयोजित की थी। इसमें कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस समेत विपक्षी दलों के कई नेता शामिल हुए थे।
इस रैली का मुख्य मुद्दा मतदाता सूची में कथित अनियमितताएं और विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR प्रक्रिया थी। विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाए और भाजपा पर चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने का आरोप लगाया।
राहुल गांधी ने रैली में कहा था कि भविष्य में मुख्य चुनाव आयुक्त को उनके पद से हटाया जाएगा और उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह को भी कानून के दायरे में लाने की बात कही थी।
विपक्षी गठबंधन ने भाजपा को सत्ता से हटाने का आह्वान करते हुए चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग उठाई थी।
राहुल गांधी के 'मॉक पार्लियामेंट' पर भी बरसे अमित शाह
रामलीला मैदान की रैली से पहले विपक्षी नेताओं ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर संसद जैसी व्यवस्था में प्रतीकात्मक सार्वजनिक महाभियोग की कार्रवाई की थी। इसमें मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ आरोप लगाते हुए विपक्ष ने उन्हें पद से हटाने और कार्रवाई करने की मांग की थी।
भाजपा ने इस पूरी कवायद को संसद और लोकतांत्रिक संस्थाओं का मजाक बताया था।
इससे पहले चंडीगढ़ में भी अमित शाह ने राहुल गांधी पर निशाना साधा था। उन्होंने कहा था कि अगर राहुल गांधी प्रधानमंत्री बनना चाहते हैं तो उन्हें पूरी जिंदगी मॉक पार्लियामेंट में ही रहना चाहिए।
शाह ने कांग्रेस पर संसद की कार्यवाही बाधित करने, नकारात्मक राजनीति करने और जनता के बीच भ्रम फैलाने का आरोप भी लगाया था।
1984 के सिख दंगों को लेकर भी कांग्रेस पर हमला
अमित शाह ने कांग्रेस पर 1984 के सिख विरोधी दंगों को लेकर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि एक नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में रैली आयोजित करना सिख समुदाय की भावनाओं को आहत करने वाला था।
शाह ने आरोप लगाया कि कांग्रेस को इस तारीख का ध्यान रखना चाहिए था, क्योंकि 1984 में इसी दौरान हजारों सिखों की हत्या हुई थी।
उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के उस बयान का भी जिक्र किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि जब कोई बड़ा पेड़ गिरता है तो धरती हिलती है।
अमित शाह ने कहा कि मोदी सरकार ने सत्ता में आने के बाद 1984 के दंगों से जुड़े मामलों को दोबारा खुलवाया और पीड़ित परिवारों को आर्थिक सहायता भी दी।
हालांकि, 1984 के दंगों और मौजूदा राजनीतिक विवादों को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप लगातार जारी हैं।
पंजाब चुनाव और नशामुक्त भारत पर भी दिया बयान
अमित शाह ने पंजाब की राजनीति को लेकर भी बड़ा दावा किया। उन्होंने भरोसा जताया कि 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव के बाद राज्य में NDA की सरकार बनेगी।
इसके साथ ही उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार का लक्ष्य 31 दिसंबर 2029 तक पूरे देश को नशामुक्त बनाना है। इसमें पंजाब को भी शामिल किया गया है।
शाह ने कहा कि सरकार देश की सुरक्षा, विकास और आर्थिक मजबूती के लिए काम कर रही है। उन्होंने विपक्ष पर विकास के मुद्दों से ध्यान भटकाने का आरोप लगाया।
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